प्रेगनेंसी के नौवें सप्ताह में क्या होता है?

प्रेगनेंसी एक ऐसा समय है, जिसमें विशेष देखभाल की ज़रूरत होती है, ताकि प्रेग्नेंट महिला खुद भी स्वस्थ रहे और एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सके। यहां हम बात करने जा रहे हैं, गर्भावस्था के तीसरे महीने की। गर्भावस्था का तीसरा महीना गर्भवती महिला के शरीर में तमाम तरह के बदलाव लेकर आता है। इस महीने में तमाम सवाल व शंकायें मन में होती हैं इन्हीं सवालों के सिम्पल जवाब हम यहां आपको दे रहे हैं साथ ही गर्भावस्था के तीसरे महीने (9वें सप्ताह से 12वें सप्ताह) से जुड़ी कई ज़रूरी जानकारियां भी देंगे।

सवाल : प्रेगनेंसी के नौवें सप्ताह में क्या होता है?

जवाब : प्रेगनेंसी के नौवें सप्ताह में शिशु एक जैतून (ऑलिव) के आकार का होता है। इस समय शिशु की मांसपेशियों का विकास होना शुरू हो जाता है। ऐसे में महिलाओं को बहुत नींद आती है।

सवाल : प्रेगनेंसी के दसवें सप्ताह में क्या होता है?

जवाब : प्रेगनेंसी के दसवें सप्ताह में शिशु एक बेर के आकार का हो जाता है। इस समय शिशु की हड्डियों का विकास होना शुरू हो जाता है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को अधिक से अधिक फाइबर लेना शुरू कर देना चाहिए ताकि वो कब्ज़ से बची रह सकें।

सवाल : प्रेगनेंसी के ग्यारहवें सप्ताह में क्या होता है?

जवाब : ग्यारहवें सप्ताह में शिशु एक नीम्बू के आकार का हो जाता है। इस समय तक शिशु पूरी तरह अपना आकार ले चुका होता है।

सवाल : प्रेगनेंसी के बारहवें सप्ताह में क्या होता है?

जवाब : प्रेगनेंसी के बारहवें सप्ताह में शिशु का आकार एक आलू बुखारे जितना हो जाता है। इस समय तक आपको आपके वजन में बढ़ोतरी नज़र आएगी।

सवाल : प्रेगनेंसी के तीसरे महीने के क्या लक्षण हैं?

जवाब :

सवाल : क्या तीसरे महीने में शिशु महसूस होता है?

जवाब : तीसरे महीने में शिशु महसूस नहीं होता है। शिशु के होने का एहसास चौथे महीने के अंत में होता है।

सवाल : प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में शिशु कैसा दिखता है?

जवाब : प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में शिशु 3 से 4 इंच तक लम्बा होता है और उसका वजन लगभग 28 ग्राम का होता है।

सवाल : प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में महिलाओं को क्या खाना चाहिए?

जवाब :

  • विटामिन बी 6 से भरपूर भोजन
  • फोलेट से भरपूर भोजन
  • ताज़े फल
  • ओमेगा 3 से भरपूर भोजन
  • हरी सब्जियां
  • कार्बोहाइड्रेट
  • प्रोटीन
  • डेयरी प्रोडक्ट 
  • (वीडियो में देखें )

सवाल : प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में क्या होता है?

जवाब : तीसरे महीने में महिलाएं थोड़ा ऊर्जावान महसूस करने लगती हैं। थोड़ा वजन भी बढ़ता है। इसके अलावा तीसरे महीने के ख़त्म होते-होते मॉर्निंग सिकनेस, वॉमिटिंग और नौज़िया जैसी परेशानियां भी बहुत कम हो जाती हैं।

सवाल : प्रेगनेंसी के शुरुआती तीन महीनों में क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

जवाब :

  • डेली 10 से 12 ग्लास पानी पिएं यानी हाइड्रेटेड रहें
  • सिगरेट, शराब या नशा पैदा करने वाली किसी भी चीज़ से दूर रहें
  • कैफीन बहुत कम कर दें यानी चाय, कॉफी आदि चीज़ों से परहेज करें
  • अच्छी तरह से खाएं, ताकि आपको और आपके गर्भस्थ शिशु को भरपूर पोषण मिले
  • नियमित रूप से हल्के-फुल्के व्यायाम, मॉर्निंग वॉक और जॉगिंग इत्यादि करें
  • पूरी नींद लें और पूरा आराम करें
  • जानवरों के संपर्क में बहुत कम रहें
  • बहुत तेज़ सुगंध से दूर रहें

सवाल : क्या प्रेगनेंसी के शुरुआती तीन महीनों में बालों को कलर करना सेफ है?

जवाब : प्रेगनेंसी के शुरुआती तीन महीनों में सुरक्षित होकर बालों को कलर करना सेफ है लेकिन कलर की तेज़ सुगंध से आपको वॉमिटिंग और नौज़िया की तकलीफ हो सकती है। इसलिए जहाँ तक हो सके शुरुआती तीन महीनों में कलर ना ही करें तो अच्छा है।

सवाल : क्या तीन महीने की प्रेगनेंसी के बावजूद भी ब्लड और यूरीन टेस्ट में प्रेगनेंसी नेगेटिव आ सकती है?

जवाब : जी हाँ, ऐसा संभव है कि आप तीन महीने की प्रेगनेंट हों, उसके बावजूद भी टेस्ट नेगेटिव आ जाए।

सवाल : क्या घर पर किया जाने वाला प्रेगनेंसी टेस्ट रात को कर सकते हैं?

जवाब : घर पर किया जाने वाला प्रेगनेंसी टेस्ट सुबह सबसे पहले यूरीन के साथ ही किया जाए तभी सही आता है। कई बार रात और दिन के परिणाम अलग आते हैं।

सवाल : क्या प्रेगनेंसी के तीसरे महीने से फ़ूड क्रेविंग्स और एवर्सन्स शुरू हो जाते हैं?

जवाब : प्रेगनेंसी के तीसरे महीने से फ़ूड क्रेविंग्स और एवर्सन्स शुरू हो जाते हैं। इस समय में फ़ूड क्रेविंग के अलावा किसी प्रकार की गंध से या किसी प्रकार के स्वाद से दूरी भी बन सकती है। फूड क्रेविंग्स और एवर्सन्स के मुख्य लक्षणों में

  1. अचानक से खट्टा, मीठा, स्पाइसी, चॉकलेट, कॉफी या जंक फूड खाने की इच्छा होना
  2. आइस्क्रीम खाने या ठंडा पीने की इच्छा होना
  3. रोटी, दाल या किसी मसाले की गंध से परेशानी महसूस होना
  4. खाने की स्मेल से वॉमिटिंग या नॉसिया महसूस होना आदि शामिल हैं।

सवाल : प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में किस प्रकार के शारीरिक बदलाव होते हैं?

जवाब : प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में महिलाओं में निम्न प्रकार के शारीरिक बदलाव होने शुरू हो जाते हैं-

  • ब्रेस्ट टेंडरनेस- इस दौरान स्तनों में दूध तैयार होने लगता है, जिसके चलते स्तनों के आकार में बदलाव और दर्द होता है, जिससे कभी-कभी निपल से सीक्रेशन भी होने लगता है।
  • स्ट्रेच मार्क्स- पेट, स्तनों, बम और जांघों पर स्ट्रेच मार्क्स उभरने शुरू हो जाते हैं। इनका कलर लाइट पिंक, भूरा या लाल हो सकता है।
  • लिनिया नाइग्रा- पेट के बीच में डार्क लाइन बनना शुरू हो जाता है।

सवाल : प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में महिलाओं का कितना वजन बढ़ता है?

जवाब : प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में शिशु का आकार बहुत छोटा होता है, इसलिए महिलाओं का एक से दो किलो तक ही वजन बढ़ता है।

सवाल : क्या प्रेगनेंसी के पहले ट्राइमेस्टर में अधिक देखभाल की ज़रूरत होती है?

जवाब : प्रेगनेंसी के पहले ट्राइमेस्टर में अधिक देखभाल की ज़रूरत होती है। क्योंकि भ्रूण विकसित होना शुरू होता है। शरीर में भी कई तरह के बदलाव आते हैं। इसके अलावा पहले ट्राइमेस्टर में गर्भपात का भी ख़तरा बहुत अधिक होता है। इसलिए बेहतर है कि शुरुआत में अपनी बहुत अच्छी तरह से देखभाल करें।

सवाल : क्या तीसरे महीने से महिलाओं की भूख बढ़ने लगती है?

जवाब : प्रेगनेंसी की शुरुआत में हार्मोनल बदलाव की वजह से महिलाओं को भूख न लगने की समस्या होती है। लेकिन तीसरे महीने के जाते-जाते ये समस्या दूर हो जाती है। तीसरे महीने के बीच में महिलाओं को भूख लगने लगती है और इसके अंत तक भूख बढ़ने भी लगती है और खाना भी हज़म होने लगता है। इस दौरान खाने की तेज इच्छा होने का एक कारण महिला और गर्भस्थ शिशु के हिसाब से पोषण की कमी पड़ना है। दरअसल, शरीर में जिस चीज़ की कमी होती है, दिमाग उसकी डिमांड करने लगता है। एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन्स का लेवल बढ़ जाने से भी ऐसा होता है।

सवाल : क्या प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में सम्बन्ध बनाना सुरक्षित है?

जवाब : प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी समय सम्बन्ध बनाना उचित नहीं है। इससे गर्भाशय पर प्रेशर पड़ता है और शिशु को भी ख़तरा हो सकता है।

सवाल: प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में क्या-क्या बातें ध्यान रखनी चाहिए?

जवाब : प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में हेल्दी भोजन लेना चाहिए, जिससे आपको और गर्भस्थ शिशु दोनों को बेहतर पोषण मिल सके। इसके अलावा :

  • विटामिन बी-6, फोलेट और ओमेगा-3 से भरपूर भोजन, ताज़े फल, हरी सब्जियां, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन आदि पर्याप्त मात्रा में लें।
  • गर्म तासीर वाली चीज़ें खाने से बचना चाहिए।
  • डेली 10-12 ग्लास पानी पीना चाहिए, ताकि आप हाइड्रेटेड रहें।
  • पूरी नींद लेनी चाहिए और अधिक से अधिक आराम करना चाहिए।
  • सिगरेट, शराब या किसी भी तरह के नशीले पदार्थ से दूर रहना चाहिए।
  • चाय, कॉफी आदि चीज़ों से परहेज करें।
  • नियमित रूप से मॉर्निंग वॉक और जॉगिंग इत्यादि करें।
  • जानवरों के संपर्क में बहुत कम रहें।
  • तेज़ सुगंध से दूर रहें।

सवाल : प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में क्या शिशु के मूवमेंट्स शुरू हो जाते हैं?

जवाब : अल्ट्रासाउंड करवाने पर तीसरे महीने में आप अपने शिशु के मूवमेंट्स देख सकती हैं, लेकिन अपने अन्दर उन मूवमेंट्स को तीसरे महीने में महसूस नहीं कर पातीं।

सवाल : प्रेगनेंसी के फर्स्ट ट्राइमेस्टर के अंत में क्या वॉमिटिंग और नौज़िया की समस्या समाप्त हो जाती है?

जवाब : प्रेगनेंसी के फर्स्ट ट्राइमेस्टर के अंत में अधिकतर महिलाओं की वॉमिटिंग और नौज़िया की परेशानी दूर हो जाती है। लेकिन कुछ महिलाओं को ये समस्या पूरे नौ महीने तक रहती है।

सवाल : गर्भ में लड़का होने के क्या लक्षण हैं?

जवाब : वैसे तो अंत तक ये पता लगा पाना मुश्किल है कि गर्भ में लड़का है या लड़की। लेकिन फिर भी अधिकतर लड़के के समय में ये लक्षण होते हैं-

  • बहुत कम मॉर्निंग सिकनेस
  • बहुत अधिक मूड चेंज
  • पेट के बीच से वजन बढ़ना
  • पेट के बीच में शिशु
  • मीठा खाने की क्रेविंग होना

सवाल : क्या प्रेगनेंसी का पहला ट्राइमेस्टर सबसे अधिक ख़तरे से भरा होता है?

जवाब : प्रेगनेंसी के पहले ट्राइमेस्टर को ख़तरे से भरा तो नहीं कह सकते, लेकिन हाँ, पहले ट्राइमेस्टर में बहुत अधिक ध्यान रखना पड़ता है। क्योंकि इसी समय में गर्भपात का सबसे अधिक ख़तरा रहता है।

सवाल : क्या प्रेगनेंसी के पहले ट्राइमेस्टर में वजन कम करना उचित रहता है?

जवाब : प्रेगनेंसी के पहले ट्राइमेस्टर में अगर आप नहीं भी चाहेंगी, तब भी आपका वजन कम होगा ही। क्योंकि इस समय आप सही ढंग से खाना नहीं खा पाती हैं। इसके अलावा वॉमिटिंग और चक्कर की वजह से भी सब कुछ सामान्य नहीं रहता। इसलिए वजन अपने आप ही कम हो जाता है।

सवाल : क्या शरीर का तापमान बढ़ने से गर्भपात हो सकता है?

जवाब : शरीर का तापमान यदि अधिक बढ़ जाए तो गर्भ में शिशु को ख़तरा हो सकता है। अधिक तापमान के असर से गर्भपात का ख़तरा बढ़ जाता है।

सवाल : प्रेगनेंसी का पहला ट्राइमेस्टर सबसे अधिक ज़रूरी क्यों होता है?

जवाब : प्रेगनेंसी के पहले ट्राइमेस्टर में माँ और शिशु में बहुत जल्दी-जल्दी बदलाव आता है। इस दौरान शिशु के सभी अंग तेज़ी से विकसित होते हैं। इसलिए इस समय में सही प्रकार से देखभाल और खान-पान बहुत ज़रूरी है।

सवाल: क्या प्रेगनेंसी के दौरान महिलाएं शेप में रह सकती हैं?

जवाब : प्रेगनेंसी में भी एक हद तक शेप में रहा जा सकता है। इसके लिए महिलाओं को संतुलित आहार, सही ढंग से व्यायाम और सही समय पर आराम करने की ज़रूरत होती है। इससे महिलाएं अतिरिक्त वजन होने से बचती हैं और डिलिवरी के बाद आराम से अपना वजन कम कर पाती हैं।

सवाल : क्या प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में सैर करना लाभदायक है?

जवाब : सैर करना हर प्रकार से और हर समय में लाभप्रद ही होता है। सप्ताह में पांच दिन यदि आधे घंटे की सैर की जाए तो प्रेगनेंसी की जटिलताओं से बचाव होता है।

सवाल : क्या प्रेगनेंसी के शुरुआती महीनों में कूदने से गर्भपात हो सकता है?

जवाब : यदि आप लगातार बहुत ज़ोर-ज़ोर से कूदेंगी, तो इससे ब्लीडिंग होने और गर्भपात होने का ख़तरा रहेगा। इसके अलावा कूदने से गर्भाशय भी नीचे की ओर आ सकता है, जिससे प्रेगनेंसी में और भी अधिक जटिलताएं आ सकती हैं।

सवाल: क्या प्रेगनेंसी में सीढ़ियाँ चढ़ना उचित है?

जवाब : यदि आपकी प्रेगनेंसी सामान्य है तो सीढ़ियाँ चढ़ने उतरने में कोई भी दिक्कत नहीं है, लेकिन यदि आपकी प्रेगनेंसी मुश्किल दौर से गुज़र रही है, तब आप ये रिस्क नहीं ले सकती हैं। कोशिश करें कि आपको सीढ़ी चढ़ने की ज़रूरत ही ना पड़े।

सवाल : यदि आप प्रेगनेंसी के दौरान बहुत अधिक वजन बढ़ा लेती हैं, तब क्या होता है?

जवाब : बहुत अधिक वजन बढ़ने से आपको टाइप-2 डायबिटीज का ख़तरा बढ़ जाता है। इसके अलावा अधिक वजन बढ़ने से शिशु का वजन भी अधिक होगा और बचपन से ही शिशु ओबेसिटी का शिकार हो जाएगा।

सवाल : क्या प्रेगनेंसी में गुनगुने पानी में स्नान करना उचित नहीं है?

जवाब : यदि आपको शरीर दर्द या फिर सूजन की परेशानी है, तो थोड़ी देर गुनगुने पानी का स्नान नुकसान नहीं पहुंचाएगा। लेकिन अधिक समय तक बहुत गर्म पानी में स्नान करने से आपके शरीर का तापमान बढ़ सकता है, जिससे शिशु को ख़तरा हो सकता है।

सवाल : क्या गर्भ में शिशु को चोट लग सकती है?

जवाब : गर्भ में मौजूद द्रव्य शिशु के लिए कुशन की तरह काम करता है। उसी की सहायता से शिशु हर प्रकार के ख़तरे से सुरक्षित होता है।

सवाल : क्या HCG टेस्ट जुड़वाँ बच्चों का पता लगा सकता है?

जवाब : प्रेगनेंसी की शुरुआत में अधिक बढ़ा हुआ HCG जुड़वाँ बच्चे होने का प्रमाण नहीं होता है।

सवाल : क्या 6 सप्ताह की प्रेगनेंसी में जुड़वाँ बच्चों का पता चलता है?

जवाब : सोनोग्राफी (अल्ट्रासाउंड) ही एक मात्र ऐसा उपाय है जिसके द्वारा जुड़वाँ बच्चे होने का पता लगाया जा सकता है। अधिकतर जुड़वाँ बच्चों का पता 6 सप्ताह के बाद ही चलता है। इससे पहले टेस्ट करने पर एक बच्चा कई बार मिस हो जाता है।

सवाल : क्या जुड़वाँ में से एक बच्चा गर्भ में छिप सकता है? क्या ये संभव है कि अल्ट्रासाउंड में वो दिखाई ना दे?

जवाब : वैसे तो अल्ट्रासाउंड ही एक मात्र ऐसा जरिया है जिससे जुड़वाँ बच्चों का पता लगाया जा सकता है। बहुत कम केसों में ऐसा होता है कि डॉक्टर दो में से एक ही बच्चा देख पाते हैं, जब दूसरा भ्रूण बहुत ही छोटा होता है।

सवाल : क्या लड़के के जन्म के पहले महिलाएं अधिक खाती हैं?

जवाब : बहुत से शोधों के बाद ऐसा पता लगाया गया है कि जिन महिलाओं ने लड़कों को जन्म दिया, उन्होंने लड़कियों को जन्म देने वाली महिलाओं की अपेक्षा 10 प्रतिशत अधिक खाया है और उन्हें अधिक भूख लगी। इसलिए ऐसा कहना ग़लत नहीं होगा कि लड़कियों की अपेक्षा लड़कों के जन्म से पहले महिलाओं को अधिक भूख लगती है।

सवाल : प्रेगनेंसी में अधिक जंक फ़ूड खाने से क्या होता है?

जवाब : प्रेगनेंसी में अधिक जंक फ़ूड खाने से होने वाले शिशु को पौष्टिक आहार नहीं मिल पाता है, जिसकी वजह से उसको गर्भ में ही कई प्रकार की बीमारियाँ हो सकती हैं। सबसे अधिक ख़तरा शुगर और ओबेसिटी का होता है। इसलिए ये तय कर लें की प्रेगनेंसी के पूरे समय में आप सिर्फ पौष्टिक और संतुलित आहार ही लेंगी।

सवाल : प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में मैं अपने शिशु का वजन कैसे बढ़ा सकती हूँ?

जवाब :

  • दिन में कम से कम पांच या छः बार थोड़ा-थोड़ा खाएं।
  • हमेशा ऐसा आहार लें, जो पोषण से भरपूर हो। जैसे- ड्राई फ्रूट्स, फल, दूध, दही, पनीर, मक्खन, मखाने इत्यादि।
  • अंडा या दालें रोज़ के आहार में शामिल करें। इससे शिशु को नियमित रूप से प्रोटीन मिलेगा, जो कि उसके और आपके लिए बहुत अच्छा होगा।

सवाल : क्या प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में फर्श पर बैठ सकते हैं?

जवाब : प्रेगनेंसी के शुरूआती दौर में तो फर्श पर बैठने में कोई भी परेशानी नहीं है। लेकिन जैसे-जैसे समय बढ़ता है, आप को ख़ुद ही नीचे बैठने में असुविधा महसूस होगी। तीसरे महीने तक आपको ऐसी असुविधा महसूस होने लगती है। कुछ महिलाओं को उनकी डॉक्टर्स सुझाव देती हैं कि वो क्रॉस-लेग होकर बैठें। वैसे आमतौर पर ऐसे बैठने से खून का दबाव बढ़ जाता है और वेरिकोज़ वेन्स की समस्या बढ़ जाती है। इसलिए डॉक्टर की सलाह के बाद ही निर्णय लें कि आपको किस तरह से बैठना है।

सवाल : प्रेगनेंसी में महिलाओं को कितने घंटे की नींद ज़रूरी होती है?

जवाब : प्रेगनेंसी में शरीर में बदलाव के साथ ही महिलाओं का आराम करना मुश्किल होने लगता है। ऐसे में प्रेगनेंट महिलाओं को सलाह है कि रात को कम से कम 8 घंटे की नींद ज़रूर लें और दिन में कम से कम आधे से एक घंटे का आराम ज़रूर करें।

सवाल : क्या प्रेगनेंसी में इच्छा अनुसार भोजन करना शिशु के लिए ठीक है?

जवाब : प्रेगनेंसी में बहुत तरह की चीज़ें खाने की क्रेविंग होती है। उनमें हेल्दी और अनहेल्दी दोनों तरह के ही आहार हो सकते हैं। सप्ताह में एक या दो बार अनहेल्दी क्रेविंग को दूर करना चल सकता है, लेकिन लगातार ही ऐसा करना ठीक नहीं है। यदि आपको रोज़ चॉकलेट और मिठाई खाने की इच्छा होती है, तो ये आपके और आपके शिशु की सेहत के लिए अच्छा नहीं होगा।

सवाल : प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में अनहेल्दी फूड खाने का मन करे तो क्या करें?

जवाब : प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में अनहेल्दी फूड खाने की क्रेविंग होना एक नॉर्मल बात है, लेकिन ऐसा खाना खाने से खुद को भी और गर्भस्थ शिशु को भी नुकसान पहुंच सकता है, इसलिए कोशिश करनी चाहिए कि अनहेल्दी फूड को खाने की क्रेविंग से बचें। इसके लिए हम आपको कुछ फॉर्मूले यहां बता रहे हैं-

  • आइसक्रीम की क्रेविंग होने पर योगर्ट एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है। इसके लिए 500 ml हल्का गुनगुना दूध लें। इसमें ज़रूरत अनुसार चीनी मिलाएं। फिर इसमें फ्रूट पल्प, फ्रूट्स के टुकड़े और कटे हुए ड्राई फ्रूट्स डालें। अब इसमें 2 चम्मच योगर्ट कल्चर डालकर अच्छे से मिलाएं और फिर ठंडा कर लें। ये ठंडा-ठंडा योगर्ट आपकी आईस्क्रीम की क्रेविंग को ख़त्म कर देगा, वो भी बिना किसी नुकसान के।
  • कोल्ड ड्रिंक पीने की इच्छा होने पर इसे नींबू-पानी से रिप्लेस करें। एक गिलास पानी में एक नींबू निचोड़ लें। फिर इसमें एक बड़ा चम्मच चीनी, एक चुटकी नमक, एक चुटकी काला नमक मिला लें। अब इसमें 8-10 पत्तियां मिंट की पीसकर डाल दें। ये ड्रिंक आपको तरोताजा रखेगा। गर्मियों में इस ड्रिंक को आप 2-3 बार ले सकती हैं।
  • केक खाने का मन करे, तो मैदा का नहीं खाकर घर पर आटे का केक बनाएं और खाएं।
  • फ्राइ किया हुआ खाने की जगह बेक्ड खाने को तवज्जो दें।
  • ज्यादा चीनी शुगर लेवल को बढ़ा सकती है, इसलिए गुड़ या गुड़ से बनी चीजें खाएं।

सवाल : प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में हेल्दी फूड खाने का मन न करे तो क्या करें?

जवाब : फूड एवर्जन से बचने के लिये अदरक को खाने में शामिल करें। अदरक के दो बड़े टुकड़े दो गिलास पानी में 15 मिनट तक उबालें। फिर इस पानी को छान लें और दिन में बार-बार पिएं। चाहें तो कच्चे अदरक का एक छोटा टुकड़ा चबाएं। अदरक की चाय बनाकर भी पी सकती हैं। इसे अपने सूप और सलाद में भी इस्तेमाल करने से फायदा होता है। लेकिन आपकी प्रेगनेंसी स्टेज के हिसाब से दिन में कितना अदरक खाना ठीक है, इसके लिये डॉक्टर से बात करें।
इसके अलावा, इन उपायों को भी आजमा सकती हैं-

  • अगर सब्ज़ियों को देखने से मन खराब हो जाता है तो खाने में फ्रूट्स ज्यादा लें। अंगूर, मैंगो, स्ट्रॉबेरीज़,वाटरमेलन और अखरोट प्रेगनेंसी के बेहतरीन फ्रूट्स माने जाते हैं।
  • प्याज और लहसुन की जगह खाने में हर्ब्स को शामिल करें। बासिल, रोज़मेरी और अजवायन के फूल के अलावा काली मिर्च को खाने में इस्तेमाल करें।
  • चाय, कॉफी या दूध पीने का मन नहीं होता, तो नींबू-पानी या फ्रेश फ्रूट जूस पी सकती हैं।

सवाल : प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में किस प्रकार का भोजन वर्जित होता है?

जवाब : प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में किसी भी प्रकार के गर्म तासीर वाले भोजन को ग्रहण करना वर्जित है। इससे ब्लीडिंग शुरू होने की सम्भावना रहती है।

सवाल : क्या अधिक टाइट कपड़े गर्भस्थ शिशु को चोट पहुंचा सकते हैं?

जवाब : अधिक टाइट कपड़े शिशु को तो चोट नहीं पहुंचाते हैं, लेकिन आप उनमें आरामदायक महसूस नहीं करती हैं। इसलिए ऐसे कपड़े पहनें, जो कि आपको बहुत आराम दें।

सवाल : क्या प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में सीधे लेट कर सोना मुमकिन है?

जवाब : प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में सीधे लेट कर सोना हर प्रकार से मुमकिन है। लगभग 20 हफ़्तों बाद महिलाओं को सीधे लेटकर सोना नामुमकिन होने लगता है। लेकिन कोशिश करनी चाहिए कि प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही करवट लेकर सोएं।

सवाल : क्या प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में शिशु के गर्भ में होने का एहसास होता है?

जवाब : प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में वॉमिटिंग और नौज़िया जैसे लक्षणों के कारण गर्भवती होने का एहसास ज़रूर रहता है, लेकिन गर्भस्थ शिशु का कोई भी मूवमेंट महसूस नहीं होता है।

सवाल : प्रेगनेंसी की पहली तिमाही (फर्स्ट ट्राइमेस्टर) कब ख़त्म होती है?

जवाब : गर्भावास्था की पहली तिमाही आपके अंतिम पीरियड के पहले दिन से शुरू होकर 12 सप्ताह पूरा होने पर ख़त्म होती है। तिमाही का अर्थ है तीन महीने और तीन महीने पूरे होने पर तिमाही ख़त्म होती है।


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प्रेगनेंसी में अधिक जंक फ़ूड खाने से होने वाले शिशु को पौष्टिक आहार नहीं मिल पाता है, जिसकी वजह से उसको गर्भ में ही कई प्रकार की बीमारियाँ हो सकती हैं। सबसे अधिक ख़तरा शुगर और ओबेसिटी का होता है।

प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में सिर-दर्द भी उन आम समस्याओं में से एक है, जो अक्सर महिलाओं को होती है। इस से निजात के लिए पूरी तरह से आराम लें। अधिक से अधिक पानी पिएं।

पांचवें महीने में आपको अपने पेट में गैस घूमती हुई सी महसूस होती है। इस महीने एसिडिटी, अधिक भूख लगना, स्तनों में बदलाव, कब्ज़, मसूड़ों से खून आना, सांस फूलना जैसे लक्षण आपको महसूस होते हैं।

प्रेगनेंसी के छठे महीने में शिशु बहुत विकसित हो जाता है। महिलाओं का पेट भी काफी बाहर की तरफ आ जाता है। महिलाओं का वजन भी बढ़ जाता है। छठे महीने में शिशु के मूवमेंट्स अधिक अच्छी तरह पता लगने लगते हैं।

बधाई हो! आपने गर्भावस्था की दूसरी तिमाही पार कर ली है और तीसरी तिमाही में कदम रख लिया है। एक ओर जहां दूसरी तिमाही को हैप्पी टाइम कहा जाता है, वहीं तीसरी तिमाही में आपको पूरी सतर्कता बरतनी होती है। अब जब डिलीवरी का समय नज़दीक है और शिशु गर्भ में तेज़ी से विकास कर रहा है, तो आप ऐसा कोई काम न करें, जिससे आपको या शिशु को हानि पहुंचे। जननम के इस लेख में प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही की शुरुआत यानी गर्भावस्था के सातवें महीने (25वें सप्ताह से 28वें सप्ताह तक) से जुड़ी ज़रूरी जानकारियां और इससे रिलेटेड सवालों के जवाब दे रहे हैं।

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