प्रेगनेंसी में अधिक जंक फूड खाने से क्या होता है?

सवाल : प्रेगनेंसी में अधिक जंक फ़ूड खाने से क्या होता है?

जवाब : प्रेगनेंसी में अधिक जंक फ़ूड खाने से होने वाले शिशु को पौष्टिक आहार नहीं मिल पाता है, जिसकी वजह से उसको गर्भ में ही कई प्रकार की बीमारियाँ हो सकती हैं। सबसे अधिक ख़तरा शुगर और ओबेसिटी का होता है। इसलिए ये तय कर लें कि प्रेगनेंसी के पूरे समय में आप सिर्फ पौष्टिक और संतुलित आहार ही लेंगी।

सवाल : क्या प्रेगनेंसी की पहली तिमाही सबसे अधिक नाज़ुक होती है?

जवाब : जी हाँ। प्रेगनेंसी की पहली तिमाही सबसे अधिक नाज़ुक होती है। इस समय में शिशु के सभी ऑर्गन और नर्वस सिस्टम बनने शुरू हो जाते हैं और सभी फंक्शन भी करने लगते हैं। हालांकि पहली तिमाही में बच्चा सिर्फ 4 इंच का होता है। लेकिन यदि इस समय में आपसे चूक हो गई तो उसका असर शिशु के विकास पर पड़ता है।

सवाल : क्या प्रेगनेंसी में मुड़ने या झुकने से बच्चे को चोट पहुँचती है?

जवाब : जहाँ तक बच्चे का सवाल है, तो आपके गर्भ में वह पूरी तरह से सुरक्षित होता है। इसलिए आपके मुड़ने या झुकने से उसे तो चोट नहीं पहुँचती, लेकिन यह खुद आपके लिए ठीक नहीं है। प्रेगनेंसी में ऐसा करने से आपकी कमर में तकलीफ आ सकती है। इसलिए कोशिश करें कि प्रेगनेंसी के दौरान आप ना गलत तरीके से ना मुड़ें और झुकें।

सवाल : क्या प्रेगनेंसी के दौरान फर्श पर बैठ सकते हैं?

जवाब : प्रेगनेंसी के शुरूआती दौर में तो फर्श पर बैठने में कोई भी परेशानी नहीं है। लेकिन जैसे-जैसे समय बढ़ता है, आपको ख़ुद ही नीचे बैठने में असुविधा महसूस होने लगेगी। कुछ महिलाओं को उनकी डॉक्टर्स सुझाव देती हैं कि वो क्रॉस-लेग होकर बैठें। वैसे आम तौर पर इस तरह बैठने से खून का दबाव बढ़ जाता है और वेरिकोज़ वेन्स की समस्या बढ़ जाती है। इसलिए डॉक्टर की सलाह के बाद ही निर्णय लें कि आपको किस तरह से बैठना है।

सवाल : प्रेगनेंसी के दौरान मन को शांत कैसे रखा जाए?

जवाब : प्रेगनेंसी के दौरान बहुत ज़रूरी है कि आप विचारों को अच्छा रखें और अपने मन को शांत रखें। इसके लिए आप किसी भी विचार के आने पर सिर्फ अपने शिशु के बारे में सोचें। क्योंकि इस दौरान आप जो भी करेंगी या सोचेंगी, उसका सीधा असर आपके शिशु की सेहत पर पड़ेगा। इसलिए पूरा आराम करें और पूरी नींद लें। अच्छी तरह खाएं। हल्का व्यायाम करें।

सवाल : क्या गर्भ में ही शिशु को बुद्धिमान बनाया जा सकता है?

जवाब : जी हाँ। गर्भ में शिशु को बुद्धिमान बनाना संभव है। इसके लिए महिलाओं को प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही ज्ञानवर्द्धक कार्यक्रमों में हिस्सा लेना चाहिए। इसके अलावा अच्छी-अच्छी किताबें पढ़नी चाहिए और मधुर संगीत सुनना चाहिए। साथ ही, पोषक आहार और स्वस्थ विचारों को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए।

सवाल : प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में गर्भस्थ बच्चे के लड़का होने के क्या लक्षण हैं?

जवाब : ऐसा माना जाता है कि प्रेगनेंसी में लड़का और लड़की होने के अलग-अलग लक्षण होते हैं। लेकिन ये सिर्फ एक मिथक है। कहा जाता है कि यदि गर्भ में लड़का हो तो गर्भवती महिलाओं का मीठा खाने का मन करता है या फिर महिलाओं के चेहरे की चमक चली जाती है, लेकिन ऐसे ही लक्षण गर्भ में पल रही लड़की के समय में भी देखे जाते हैं। इसलिए कोई भी लक्षण ये गारंटी नहीं दे सकते कि गर्भ में लड़का है या लड़की।

सवाल : प्रेगनेंसी के शुरुआती तीन महीनों में महिलाओं को क्या आहार लेना चाहिए?

जवाब : प्रेगनेंसी की पहली तिमाही या फर्स्ट ट्राइमेस्टर में अचानक हुए हार्मोनल चेंजेज के कारण गर्भवती महिलाओं को बहुत से शारीरिक और मानसिक बदलावों से गुज़रना पड़ता है। ऐसे में बहुत ज़रूरी है कि पूर्णतः स्वस्थ, स्वच्छ और पोषक आहार लिया जाए। पहली तिमाही शिशु के लिए काफी इम्पॉर्टेन्ट होती है। इस समय शिशु के सभी अंगों का विकास होता है। इसलिए ज़रूरी है कि अपने आहार में सभी प्रकार के विटामिन, प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, पोटेशियम और अन्य ज़रूरी मिनरल्स को शामिल किया जाए। यदि आप शाकाहारी हैं तो प्रतिदिन दाल, दूध, दही, हरी सब्जियां और विटामिन सी युक्त फलों का सेवन अवश्य करें। और यदि मांसाहारी हैं तो अपने आहार में प्रतिदिन दो उबले अंडे और सैलमन मछली को शामिल करें।

सवाल : प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में अत्यधिक उल्टियाँ आने और नौज़िया होने पर क्या करें?

जवाब : प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में शरीर में हुए हार्मोनल बदलावों के कारण थोड़ी बहुत वॉमिटिंग और नॉज़िया महसूस होना एक आम और सामान्य समस्या है, लेकिन कुछ महिलाओं को बहुत अधिक वॉमिटिंग होती है। किसी भी प्रकार की गंध से, खाने की खुशबू या फिर खाना खाने से वॉमिटिंग होने लगती है। इससे बचाव के लिए सबसे पहले ज़रूरी है कि आप अपने आहार पर बहुत ध्यान दें। अपने आहार में किसी भी ऐसे खाद्य पदार्थ को शामिल ना करें, जिससे आपको एसिडिटी की समस्या हो। एसिडिटी ना होने से ये समस्या 80 प्रतिशत तक कम हो जाएगी। ध्यान रखें कि एक बार में बहुत अधिक ना खाएं, बल्कि दिन में 5 से 6 बार थोड़ा-थोड़ा खाएं। जो भी खाया है, कोशिश करें कि वो अच्छे से हज़म हो जाए। अगर आप थोड़ा ध्यान देंगी, तो आपका ये समय बहुत ही आसानी से निकल जाएगा।

सवाल : क्या प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में सामान्य व्यायाम कर सकते हैं?

जवाब : इस विषय में सबसे पहले अपने डॉक्टर की सलाह लें, क्योंकि आपकी सही स्थिति के बारे में आपके डॉक्टर से बेहतर कोई नहीं जानता है। लेकिन अगर आप प्रेगनेंसी की शुरुआत में पूरी तरह से सामान्य महसूस कर रही हैं, तो आप रोज़ाना 30 मिनट हल्का व्यायाम जैसे सैर, योग और स्ट्रेच अप एक्सरसाइज कर सकती हैं।

सवाल : क्या प्रेगनेंसी की पहली तिमाही के दौरान सीढ़ियाँ चढ़ना सुरक्षित है?

जवाब : प्रेगनेंसी की शुरुआत में सीढ़ियाँ चढ़ने से गर्भ में मौजूद भ्रूण पर दबाव पड़ सकता है। शुरुआत में गर्भ बहुत नाज़ुक होता है, उसकी अधिक से अधिक देखभाल ज़रूरी होती है। इसीलिए किसी भी दुर्घटना से बचने के लिए सीढ़ियाँ ना ही चढ़ें तो अच्छा है। लेकिन अगर आपकी मजबूरी है और आपकी प्रेगनेंसी एकदम सामान्य है तो दिन में एक बार धीरे-धीरे एक मंजिल तक सीढ़ियाँ चढ़ सकती हैं।

सवाल : क्या प्रेगनेंसी में पूरा दिन खड़ा रहना शिशु के लिए अच्छा नहीं है?

जवाब : खड़े रहने से अपने शरीर का पूरा वजन पैरों के निचले भाग में पड़ता है। ऐसे में वजन बढ़ने से पैर सूजने लगते हैं। पूरा दिन खड़ा रहना आपके और शिशु दोनों के लिए ही ठीक नहीं है। क्योंकि यदि आपको तकलीफ होगी तो इसका मतलब आपका शिशु भी तकलीफ में ही होगा।

सवाल : प्रेगनेंसी के फर्स्ट ट्राइमेस्टर में एक्टिव कैसे रहा जा सकता है?

जवाब : प्रेगनेंसी में एक्टिव रहना बिल्कुल भी मुश्किल नहीं है। अपनी दिनचर्या में ऐसे काम शामिल करें, जिन्हें करने में आपको आनंद आता है। अपनी दोस्तों के साथ सैर पर जाएं या फिर उनके साथ दिन में थोड़ा समय बिताएं। घर के काम करने के साथ अपनी पसंद के गाने सुनें। ध्यान रखें कि आप गर्भवती हैं, बीमार नहीं।

सवाल: प्रेगनेंसी की क्रेविंग कैसे रोका और नियंत्रित किया जाए?

जवाब : सबसे पहले तो ये निर्णय कर लें कि आप थोड़ी भी भूखी नहीं रहेंगी। समयानुसार दो-दो घंटों के अंतराल पर कुछ हेल्दी खाती रहें। मीठे से परहेज़ करें। क्योंकि यदि आप मीठा नियमित तौर पर खाएंगी, तो उससे आपका रोज़ाना मीठा खाने का मन करेगा। आपको रोज़ उसकी क्रेविंग होगी। हमेशा आहार में प्रोटीन, विटामिन, कैल्शियम, आयरन और पोटेशियम शामिल करें। ऐसा करने से आपको जल्दी-जल्दी भूख नहीं लगेगी और आपको कुछ अनहेल्दी खाने की इच्छा भी नहीं होगी।

सवाल : क्या नींद की कमी से प्रेगनेंसी में कोई ख़तरा पैदा होता है?

जवाब : नींद की कमी प्रेगनेंसी में बहुत ख़तरनाक है। पूरी तरह से नींद ना लेने पर बहुत तरह की समस्याएँ जैसे वजन बढ़ना, हाइपरटेंशन, शुगर और एसिडिटी से ग्रसित हो सकती हैं। इसीलिए कोशिश करें कि समय पर सोएं और सुबह जल्दी उठ जाएं, ताकि रोज़ का रूटीन सही रहे।

सवाल : क्या प्रेगनेंसी में बासी भोजन ग्रहण कर सकते हैं?

जवाब : प्रेगनेंट महिलाओं के लिए सलाह है कि वो हमेशा ताज़ा भोजन ही करें। लेकिन सुबह का बना हुआ भोजन यदि सही से रेफ्रिजरेट हुआ है, तो शाम तक करना अनुचित नहीं है। 24 घंटों से अधिक पहले बना हुआ खाना न खाएं।

सवाल : प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में महिलाओं को वॉमिटिंग से बचने के लिए क्या करना चाहिए?

जवाब : प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में अधिकतर महिलाओं को वॉमिटिंग और नौज़िया की शिकायत होती है। इससे बचने के लिए सबसे पहले तो ज़रूरी है कि एसिडिटी से बचें। एसिडिटी से बचने के लिए ज़रूरी है कि अधिक से अधिक पानी पिएं और भूखी बिल्कुल ना रहें। अपने आहार में खट्टे और मसालेदार पदार्थ शामिल ना करें। हैवी भोजन ना करें। दिन में कम से कम 5 से 6 बार तक खाएं और सबसे ज़्यादा ज़रूरी है कि ख़ुद को किसी न किसी एक्टिविटी में व्यस्त रखें।

सवाल : प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में कौन-कौन से टेस्ट होते हैं?

जवाब : यूरीन टेस्ट: प्रेगनेंसी की शुरुआत में ही डायबिटीज, प्रोटीन और रेड और वाइट सेल्स का पता लगाने के लिए यूरीन टेस्ट किया जाता है।
ब्लड टेस्ट: आपके ब्लड ग्रुप का पता लगाने के लिए Rh फैक्टर टेस्ट किया जाता है और अन्य सभी प्रकार की स्थितियों का पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट का सहारा लिया जाता है। इसके अलावा HIV के लिए भी ब्लड टेस्ट होता है।
अल्ट्रासाउंड: प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही अल्ट्रासाउंड के द्वारा शिशु के हर मूवमेंट पर नज़र रखी जाती है। अल्ट्रासाउंड के द्वारा आप अपने शिशु की झलक देख सकती हैं।

सवाल : क्या गर्भस्थ शिशु भावनाओं को महसूस कर सकते हैं?

जवाब : अब तक हुए अनगिनत शोधों से यह बात सही पाई गई है कि गर्भवती महिलाओं की सोच का सीधा असर उनके गर्भस्थ शिशु पर पड़ता है। उनकी भावनाएं एक केमिकल के द्वारा गर्भ तक पहुँचती हैं। इसीलिए हमेशा कहा जाता है कि प्रेगनेंसी में हमेशा अच्छे विचार और भाव ही मन में लाएं।

सवाल : प्रेगनेंसी की शुरुआत में सिर-दर्द की समस्या कितनी सामान्य है?

जवाब : प्रेगनेंसी की शुरुआत में शरीर में एकदम से हार्मोनल बदलाव होते हैं। इन बदलावों के कारण सिर दर्द की समस्या होना सामान्य है। लेकिन आपको कोशिश करते रहनी पड़ेगी कि आप इस समस्या को ना होने दें। इसके लिए सही समय पर भोजन, पूरा आराम और खुली हवा में थोड़ी देर सैर करना फायदेमंद रहता है।

सवाल : ऐसा क्या करें कि प्रेगनेंसी में मन प्रसन्न रहे?

जवाब : मन को प्रसन्न रखने के लिए सबसे अधिक ज़रूरी है कि आप अपने पसंद के कार्यों में ख़ुद को व्यस्त रखें। अपने दोस्तों से दिन में कम से कम एक बार ज़रूर बात करें। अच्छी-अच्छी किताबें पढ़ें और अच्छी-अच्छी फ़िल्में देखें। ख़ुद पर ध्यान दें।

सवाल : प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में अत्याधिक वॉमिटिंग होने पर क्या किया जाए?

जवाब : प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में बहुत अधिक वॉमिटिंग होने पर सबसे पहले ऐसी गंध से दूर रहें, जिससे आपको वॉमिटिंग जैसा महसूस होता है। खाने में ऐसी वस्तुओं से परहेज़ करें जिससे एसिडिटी बनती हो। अपने डॉक्टर से परामर्श लेकर सुबह खाली पेट ली जाने वाली दवाई लें, जिससे वॉमिटिंग आनी बहुत कम हो जाती है।

सवाल : क्या सभी महिलाओं को दूसरे महीने में वॉमिटिंग और चक्कर जैसी परेशानी होती है?

जवाब : प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में अधिकतर महिलाओं को वॉमिटिंग और चक्कर की परेशानी होती है। लेकिन लगभग 30 प्रतिशत महिलाओं को किसी भी प्रकार की कोई भी परेशानी नहीं होती है। उनकी प्रेगनेंसी का समय बिलकुल सामान्य निकलता है।

सवाल : प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में क्या महिलाओं को सबसे अधिक परेशानियों का सामना करना होता है?

जवाब : प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में अचानक से होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिलाओं को बहुत अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस समय में महिलाओं को अत्यधिक थकान, चिड़चिड़ापन, वॉमिटिंग, नौज़िया, मॉर्निंग सिकनेस और चक्कर जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

सवाल : प्रेगनेंसी की शुरुआत में क्या बेड रेस्ट लेना उचित है?

जवाब : प्रेगनेंसी की शुरुआत में बेड रेस्ट लेना उचित है। शुरुआत में हार्मोनल चेंजेज के कारण हमेशा ही थकान और कमज़ोरी महसूस होती है। ऐसे में यदि आप अधिक से अधिक आराम करेंगी या फिर बेड रेस्ट लेंगी तो आपके और शिशु के लिए बेहतर ही रहेगा।


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प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में सिर-दर्द भी उन आम समस्याओं में से एक है, जो अक्सर महिलाओं को होती है। इस से निजात के लिए पूरी तरह से आराम लें। अधिक से अधिक पानी पिएं।

पांचवें महीने में आपको अपने पेट में गैस घूमती हुई सी महसूस होती है। इस महीने एसिडिटी, अधिक भूख लगना, स्तनों में बदलाव, कब्ज़, मसूड़ों से खून आना, सांस फूलना जैसे लक्षण आपको महसूस होते हैं।

प्रेगनेंसी के छठे महीने में शिशु बहुत विकसित हो जाता है। महिलाओं का पेट भी काफी बाहर की तरफ आ जाता है। महिलाओं का वजन भी बढ़ जाता है। छठे महीने में शिशु के मूवमेंट्स अधिक अच्छी तरह पता लगने लगते हैं।

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