मातृत्व वित्तीय योजना क्या है?

गर्भावस्था जहाँ एक ओर अपने साथ कई खुशियाँ लेकर आती हैं, वहीं कई चिंताएं भी लेकर आती हैं। नए बच्चे के स्वागत के लिए मानसिक और शरीरिक रूप से तैयार होना जितना आवश्यक है, वित्तीय रूप से तैयार होना भी उतना ही आवश्यक है। अक्सर लोग इसके बारे में पूर्व योजना नहीं बनाते और बाद में पछताते हैं। इसलिए आवश्यक है कि शुरुआत से ही इसके बारे में सचेत रहा जाए ।

इस वित्तीय योजना में कई खर्च शामिल होते हैं; जैसे: डॉक्टर का खर्च जो कि शुरुआत में मासिक और गर्भावस्था के अंत तक साप्ताहिक हो जाता है, समय-समय पर किए जाने वाले ब्लड टेस्ट, सोनोग्राफी या अन्य टेस्ट, नियमित दवाइयां, अतिरिक्त आहार, बच्चे के जन्म के तुरंत बाद की आवश्यकताएं जिनमें सामान्य चिकित्सा, दूध, डायपर इत्यादि होते हैं। इसके अलावा अन्य आकस्मिक खर्चों के लिए भी तैयार होना पड़ता है।

हम यहाँ आपको कुछ ऐसे ख़ास तरीके बताने जा रहे हैं जिनके जरिए आपके लिए एक सही वित्तीय योजना बनाना आसान हो जाएगा।

जननम से जानिये : 7 ख़ास मैटरनिटी फाइनेंसियल टिप्स

1. महत्वपूर्ण तिथियों को लिखें

अपने कैलेंडर में महत्वपूर्ण तिथियों को चिन्हित करें। यह देखें कि किस महीने में और किन सप्ताहों में आपको अधिक पैसे की जरुरत हो सकती है। इन तारीखों में अपने पास पैसे रखने के लिए बचत या कमाई की योजना बनाएं।

2. सही मातृत्व स्वास्थ्य बीमा चुनें

वर्तमान में आपके पास मातृत्व स्वास्थ्य बीमा के कई विकल्प मौजूद हैं। ऐसे में अपने बजट का ध्यान रखते हुए सही बीमा योजना का चयन करें। यह बीमा भविष्य में होने वाले आपके आकस्मिक खर्चों के बोझ को कम कर सकता है।

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3. सही डॉक्टर और सही अस्पताल का चयन करें

कई विकल्प हो सकते हैं, मगर सही बजट में सबसे अच्छा डॉक्टर और सबसे सही अस्पताल कौन सा है, यह आपको चुनना होगा। अगर आप कोई दूर का डॉक्टर या अस्पताल चुन रहे हैं तो उसके साथ एक नजदीक का विकल्प भी देखकर रखें, ताकि जरुरत के समय उनका भी उपयोग किया जा सके। 

4. चेकबुक और कार्ड्स को अपने साथ रखें

कई बार हाथ में नकद नहीं होते और पैसों की जरुरत पड़ जाती है। ऐसे में अपने चेकबुक और कार्ड्स को अपने साथ रखें ताकि आपके पास विकल्प मौजूद हों।

5. अस्पताल के लिए आकस्मिक फण्ड रखें

कुछ खर्चे आकस्मिक आ सकते हैं। यदि संभव है तो शुरुआत से ही कुछ पैसे अलग रखना शुरू कर दें। हर महीने इसमें कुछ पैसे डालते रहें और इन पैसों को आवश्यकता आने पर ही खर्च करें।

6. बच्चे के पहले साल की जरूरतों की सूची बनाइए

बच्चे को शुरुआत में अधिक देखभाल की जरुरत पड़ती है। ऐसे में उसके पीछे खर्चे भी अधिक होते हैं। शुरूआती आवश्यकताओं के बारे में पता होने से आप इसके लिए पहले से तैयार हो पाएंगे।

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7. बच्चे के लिए कोई बीमा योजना देख कर रखें

यह बाद की योजना है। मगर यदि आप इसके बारे में पहले से ही थोड़ा रिसर्च कर लेते हैं तो बाद में निर्णय लेना आसान हो जाएगा। 

जननम का सुझाव

मातृत्व वित्तीय योजना बनाना एक समझदारी भरा प्रयास है। अपनी योजना बनाते वक्त अपने बजट का ध्यान रखें। आपको यह अच्छी तरह मालूम होना चाहिए कि कितने पैसों की आवश्यकता हो सकती है और ये पैसे कहाँ से आने वाले हैं। एक सही योजना आपको वित्तीय रूप से सक्षम बनाएगी और आप चिंतामुक्त होकर अपने बच्चे का अच्छे से स्वागत कर पाएंगे।

Summary : Pregnancy and childcare comes with new responsibilities and challenges as well, one of them is - increased financial needs. Advance financial planning is a smart way to deal with the upcoming financial challenges.

सारांश: गर्भावस्था और चाइल्डकैअर नई जिम्मेदारियों और चुनौतियों के साथ-साथ आता है, उनमें से एक है - वित्तीय आवश्यकताओं में वृद्धि। आगामी वित्तीय चुनौतियों से निपटने के लिए अग्रिम वित्तीय नियोजन एक स्मार्ट तरीका है।

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हर महिला के लिए प्रेगनेंसी के शुरूआती सिम्प्टम अलग-अलग होते हैं। ज़्यादातर महिलाओं के लिए, यह वह महिना होता है जब आपको पता चलता है कि आप प्रेग्नेंट हैं। इस महीने आपको प्रेगनेंसी के शायद सिर्फ़ दो ही सिम्प्टम दिखेंगे -- पॉज़िटिव प्रेगनेंसी टेस्ट (और पीरियड मिस करना)।

जैसे-जैसे अलग होने वाले सेल के गोले किसी इंसानी शरीर का रूप ले रहे हैं, आपका बच्चा ब्लास्टोसिस्ट से ज़ाइगोट में बदल रहा है। उसी प्रकार, जैसे-जैसे आपका शरीर और दिमाग आपके माँ बनने की नई भूमिका को अपना रहे हैं, वैसे-वैसे आपको भी बदलाव महसूस हो रहे होंगे।

मेडिकल ट्रीटमेंट पिछले छह महीनों के समान ही रहेगा। अब से लेकर ये ट्रीटमेंट एकसमान ही रहेंगे। डॉक्टर बच्चे की पोज़ीशन (स्थिति) देखने या उसमें कोई गंभीर विकलांगता (डीफॉर्मिटी) का पता लगाने के लिए कुछ और जांचें कर सकते हैं।

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