क्या प्रेगनेंसी के चौथे महीने से सिर-दर्द शुरू होना एक आम परेशानी है?

सवाल : क्या प्रेगनेंसी के चौथे महीने से सिर-दर्द शुरू होना एक आम परेशानी है?

जवाब : प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में सिर-दर्द भी उन आम समस्याओं में से एक है, जो अक्सर महिलाओं को होती है। इस से निजात के लिए पूरी तरह से आराम लें। अधिक से अधिक पानी पिएं। किसी भी पेन किलर का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के बिना ना करें। ऐसा कोई भोजन ना करें, जिसको खाने से आपको एसिडिटी की समस्या हो। अगर आप सही ढंग से अपनी देखभाल करेंगी, तो इस समस्या से निजात पा सकती हैं।

सवाल : क्या प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में वॉमिटिंग आना सामान्य है?

जवाब : वैसे तो आम तौर पर पहली तिमाही के साथ वॉमिटिंग, चक्कर और नौजिया की तकलीफ चली जाती है। लेकिन कुछ महिलाओं को दूसरी और तीसरी तिमाही में भी वॉमिटिंग की समस्या हो सकती है। ध्यान रखें कि एसिडिटी और तनाव से दूर रहें। अधिक से अधिक पानी पिएं और नियमित रूप से आराम करें।

सवाल : प्रेगनेंसी में कब्ज़ की समस्या से बचे रहने के लिए क्या किया जाए?

जवाब : प्रेगनेंसी की शुरुआत के साथ ही महिलाओं को अक्सर कब्ज़ की समस्या हो जाती है। कब्ज़ के कारण कुछ महिलाओं को इस समय में पाइल्स की भी तकलीफ हो जाती है। इससे बचाव बहुत ज़रूरी है। इसके लिए अपने खानपान पर अधिक ध्यान दें और बिल्कुल भी लापरवाही ना बरतें। खाने में फाइबर युक्त भोजन और फलों का प्रयोग करें। अधिक से अधिक पानी और लिक्विड डाइट लें। ज्यादा फैट वाला खाना, जंक फूड, मसालेदार और चटपटा खाना ना खाएं। अधिक देर तक बैठे ना रहें, ना ही बिना काम-काज के लेटे रहें। इसके अलावा इन उपायों को भी आजमाकर देखें-
एक गिलास गर्म पानी में एक नींबू का रस डालकर आधा चम्मच शहद मिलाएं, रोज़ सुबह खाली पेट पिएं।
एक चम्मच जैतून का तेल और एक चम्मच नींबू का रस लें। इन्हें मिलाकर सुबह खाली पेट लें।
एक बड़ा चम्मच एलोवेरा जेल निकालकर इसे किसी फ्रूट, सेब या संतरे के रस के साथ लें।
एक चम्मच सौंफ के बीज या तिल के बीज़ चबा सकती हैं।

सवाल : प्रेगनेंसी के तीन महीने बाद से ऐसा क्या किया जाए कि बच्चा एक्टिव हो?

जवाब : आपका बच्चा एक्टिव हो, इसके लिए आपका एक्टिव होना बहुत ज़रूरी है। बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास की बागडोर सिर्फ आपके पास है। आपके पास केवल 6 महीने और हैं, जिनमें आपको अच्छा सोचना, अच्छा खाना-पीना और अच्छा करना है। अपनी दिनचर्या ऐसी बनाएं, जिसमें आप अच्छी और ज्ञानवर्द्धक किताबें पढ़ें, अच्छा संगीत सुनें, 5 से 6 बार पौष्टिक और अच्छा भोजन करें, अच्छे लोगों की संगति में रहें और सकारात्मक सोच रखें। दिन भर सिर्फ आराम ही ना करें, बल्कि जिन कामों में आपकी रूचि है, उनको करें। जिस विश्वास में आस्था रखती हों, सुबह उसका ध्यान अवश्य करें और सबसे ज़रूरी बात ये है कि दिन भर में कम से कम 20 मिनट के लिए हल्का-फुल्का व्यायाम अवश्य करें। किसी खास योगा या आसन को करना चाहती हैं, तो उससे पहले एक्सपर्ट की सलाह लेना ना भूलें।

सवाल : क्या प्रेगनेंसी में डायरिया ख़तरनाक हो सकता है?

जवाब : प्रेगनेंसी में डायरिया बहुत सी महिलाओं को होता है, लेकिन इसे सामान्य समझने की भूल नहीं करनी चाहिए और हर हाल में इसका इलाज ज़रूरी है। इसलिए अगर 2-3 दिन या इससे भी अधिक समय से लूज़ बाउल मूवमेंट रहे, तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
साथ ही, इन बातों का ध्यान रखकर भी आप डायरिया से अपना बचाव कर सकती हैं-
1. दिन में 8-10 ग्लास पानी पिएं, ताकि डिहाइड्रेशन न होने पाए।
2. जूस और शोरबा से बॉडी को हाईड्रेट रखें।
3. चावल और दही को डाइट में शामिल करें।
4. फ्रूट्स में केला और सेब खाने से लाभ होगा, लेकिन पपीता और पाइन एपल न खाएं।

सवाल : क्या प्रेगनेंसी के सेकेंड ट्राइमेस्टर में सम्बन्ध बनाना उचित है?

जवाब : प्रेगनेंसी के नौ महीनों तक कभी भी सम्बन्ध बनाना उचित नहीं हैं। इससे यूट्रस पर दबाव पड़ता है और शिशु के स्वास्थ्य के लिए भी ये ठीक नहीं है।

सवाल : क्या प्रेगनेंसी में सफ़र करना उचित है?

जवाब : प्रेगनेंसी के तीन चरण होते हैं- पहली तिमाही, दूसरी तिमाही और तीसरी तिमाही। पहली तिमाही में कोशिश करें कि आप लम्बा सफ़र ना करें, ऐसा बिल्कुल भी उचित नहीं है। अगर बहुत ज़रूरी है तो आप सिर्फ हवाई सफ़र करें। चौथे महीने से छठे महीने तक महिलाओं के लिए हर चीज़ में आसानी रहती है। इस समय अगर पूरी तरह स्वस्थ हैं तो आप सफ़र कर सकती हैं। तीसरी तिमाही सबसे अधिक क्रिटिकल होती है। इस समय आपको सबसे अधिक देखभाल की जरूरत है, इसलिए जान बूझकर रिस्क ना लें। यदि बहुत ही अधिक ज़रूरी नहीं है, तो सफ़र ना करें।

सवाल : प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में किए जाने वाले ज़रूरी टेस्ट कौन-कौन से हैं?

जवाब : प्रेगनेंसी के हर ट्राइमेस्टर में ब्लड और यूरिन टेस्ट होते हैं, जिनमें हीमोग्लोबिन, ब्लड ग्लूकोस, यूरिन शुगर, ट्रिपल स्क्रीनिंग टेस्ट और हर महीने अल्ट्रासाउंड होता है।

सवाल : प्रेगनेंसी के चौथे महीने से कौन से पेय पदार्थ लेना उचित है?

जवाब : प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही ही नहीं बल्कि पूरी प्रेगनेंसी के समय रोज़ 10-12 ग्लास पानी के अलावा आप ये सब पेय पदार्थ ले सकती हैं-

  • चॉकलेट मिल्क
  • ऑरेंज जूस
  • नारियल पानी
  • दूध
  • अनार का जूस
  • सेब का जूस
  • मैंगो शेक
  • बनाना शेक

सवाल : क्या प्रेगनेंसी के सेकेंड ट्राइमेस्टर में वजन घटाया जा सकता है?

जवाब : प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में वजन घटाने के बारे में नहीं, बल्कि बढ़ाने के बारे में सोचें। दूसरे ट्राइमेस्टर में शिशु के सभी अंग विकसित होते हैं, इसके लिए महिलाओं को अधिक कैलोरीज चाहिए होती हैं। इस समय कम से कम 20 पाउंड वजन बढ़ना चाहिए। पूरी प्रेगनेंसी के समय में आप वजन की चिंता करना बिल्कुल छोड़ दें।

सवाल : प्रेगनेंसी का कौन-सा महीना सबसे आरामदायक और अच्छा होता है?

जवाब : वैसे तो प्रेगनेंसी का पूरा समय ही बहुत अच्छा होता है, लेकिन फिर भी स्वास्थ्य और आराम की दृष्टि से चौथे महीने से लेकर छठे महीने तक का समय सबसे अधिक आरामदायक और सुरक्षित होता है। इस महीने में पहली तिमाई जैसी परेशानियाँ भी नहीं होती हैं और तीसरी तिमाही जैसे जटिलता भी नहीं होती है। इस समय में महिलाएं बहुत फ्रेश रहती हैं और उनकी भूख भी पहली तिमाही के विपरीत बहुत अधिक हो जाती है।

सवाल : प्रेगनेंसी के कौन से महीने में पेट बाहर आने लगता है?

जवाब : प्रेगनेंसी के चौथे महीने से हल्का-हल्का पेट बाहर आने लगता है, लेकिन पांचवें महीने से वो काफी बाहर दिखने लगता है। अगर किसी महिला की दूसरी प्रेगनेंसी है तो उसका पेट तीसरे महीने से ही दिखने लगता है। पहली डिलिवरी की वजह से यूट्रस बाहर की तरफ आ जाता है।

सवाल : प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में क्या लक्षण नज़र आते हैं?

जवाब : प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में ये सभी लक्षण नज़र आते हैं-

  • पेट और स्तनों का आकार बढ़ना
  • त्वचा में बदलाव
  • नाक में जमाव
  • पैरों में दर्द
  • सफ़ेद डिस्चार्ज

सवाल : क्या प्रेगनेंसी के चौथे महीने से महिलाओं की भूख बढ़ने लगती है?

जवाब : प्रेगनेंसी के चौथे महीने से महिलाओं को होने वाली वॉमिटिंग, नौजिया और चक्कर आने की समस्या ख़त्म हो जाती है। उसके ख़त्म होने की वजह से और शिशु के गर्भ में लगातार विकसित होने के कारण महिलाओं को लगातार पोषक तत्वों की ज़रूरत होती है। इसी कारण महिलाओं की भूख बढ़ने लगती है। इस समय खाया जाने वाला भोजन सही मायनों में सबसे अधिक फायदा करता है।

सवाल : प्रेगनेंसी के दूसरे ट्राइमेस्टर में महिलाओं को एक दिन में कितने कदम चलना चाहिए?

जवाब : शुरुआत में आप जितने कदम आसानी से चल सकती हैं, उतने ही चलें। फिर धीरे-धीरे 1000 से 2000 क़दमों के बराबर चलने की कोशिश करें।

सवाल : प्रेगनेंसी के चौथे महीने में क्या लक्षण होते हैं?

जवाब : प्रेगनेंसी के चौथे महीने के कुछ सामान्य लक्षण-

  • वजन बढ़ना
  • बढ़ते हुए पेट और स्तनों पर खुजली
  • स्ट्रेच मार्क्स
  • सांस फूलना
  • अधिक भूख लगना
  • बदहजमी और एसिडिटी
  • वेरिकोज़ वेंस

सवाल : क्या प्रेगनेंसी के चौथे महीने में सांस फूलने की समस्या सामान्य है?

जवाब : प्रेगनेंसी के चौथे महीने से अनेक महिलाओं को सांस फूलने की समस्या शुरू हो जाती है। दरअसल, बढ़ते गर्भाशय से आस-पास के फेफड़ों पर दबाव पड़ता है, जिसके कारण सांस लेने में थोड़ी दिक्कत होती है। चौथे महीने की शुरुआत से ही सांस फूलना एक सबसे सामान्य परेशानी होती है। इस दौरान रुटीन वर्क के बीच कभी-कभी ब्रीदिंग प्रॉब्लम हो सकती है। करीब 60 परसेंट महिलाओं को ऐसी प्रॉब्लम होती है। तीसरे ट्राइमेस्टर में यह प्रॉब्लम और बढ़ जाती है और डिलिवरी के बाद ही सही होती है।

सवाल : क्या चौथे महीने में शिशु किक मारना शुरू कर देते हैं?

जवाब : चौथे महीने में शिशु की कोई भी मूवमेंट महसूस नहीं होती है, लेकिन अल्ट्रासाउंड में आप अपने शिशु की किक देख सकती हैं।

सवाल : प्रेगनेंसी के चौथे महीने में क्या खाना चाहिए?

जवाब : प्रेगनेंसी के चौथे महीने में अपने खाने में इन चीज़ों को शामिल करें-

  • आयरन युक्त भोजन
  • फाइबर युक्त भोजन
  • कैल्शियम युक्त भोजन
  • विटामिन सी और जिंक युक्त भोजन
  • ओमेगा फैटी एसिड युक्त भोजन
  • फल और सब्जियां
  • प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट

सवाल : प्रेगनेंसी के चौथे महीने में कैसा महसूस होता है?

जवाब : प्रेगनेंसी का चौथा महीना दूसरे और तीसरे महीने की अपेक्षा अधिक आसान होता है। आप अधिक आराम महसूस करती हैं। लेकिन पेट में गैस जैसा महसूस होता है, जो कि वास्तव में शिशु की मूवमेंट्स होती हैं। अधिकांश महिलाओं को इस दौरान वॉमिटिंग, नौजिया और चक्कर आने भी बंद हो जाते हैं। भूख भी बढ़ जाती है।

सवाल : प्रेगनेंसी के चौथे महीने में शिशु कैसा होता है?

जवाब : प्रेगनेंसी के चौथे महीने में शिशु की पलकें, भंवें और आँखें विकसित होती हैं। बच्चे के शरीर पर छोटे-छोटे बाल आ जाते हैं।

सवाल : क्या ऐसा संभव है कि चार महीने की प्रेगनेंसी होने के बावजूद भी प्रेगनेंसी का पता न चले?

जवाब : चौथे महीने तक बहुत से ऐसे लक्षण होते हैं, जिसके द्वारा सभी महिलाओं को प्रेगनेंसी का पता चल जाता है। सिर्फ मानसिक बीमारी से जूझ रही महिलाएं ही शायद प्रेगनेंसी को महसूस न कर पाएं। सामान्य महिलाओं को चौथे महीने तक प्रेगनेंसी का पता न चलना संभव नहीं है।

सवाल : चार महीने का भ्रूण कितना बड़ा होता है?

जवाब : चार महीने का भ्रूण साढ़े 6 से 7 इंच तक बड़ा होता है। इस समय शिशु को अल्ट्रासाउंड में अक्सर अंगूठा चूसते हुए देखा जाता है।

सवाल : प्रेगनेंसी के चौथे महीने में किन चीज़ों से परहेज़ करना चाहिए?

जवाब : प्रेगनेंसी के चौथे महीने में शरीर में खून की मात्रा बढ़ जाती है। इसलिए आपको
अपने भोजन में आयरन की मात्रा बढ़ा देनी चाहिए। इससे शरीर की बहुत सी ज़रूरतें पूरी होंगी।
इसके अलावा आपको कैफीन और निकोटीन की मात्रा बहुत कम कर देनी चाहिए।
गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्थों का सेवन बिल्कुल ना करें।

सवाल : प्रेगनेंसी के चौथे महीने में कैसे सोना चाहिए?

जवाब : पूरी प्रेगनेंसी में आपको पीठ के बल सोने से परहेज़ करना चाहिए। हमेशा एक तरफ करवट लेकर सोएं। ऐसा करने से आपको और शिशु दोनों को ही कोई तकलीफ नहीं होगी।

सवाल : प्रेगनेंसी मे कौन-सा फल सबसे अधिक खाना चाहिए?

जवाब : प्रेगनेंसी में महिलाओं को रोज़ाना 75 मिली विटामिन सी ज़रूर ग्रहण करना चाहिए। इसके लिए आप ऐसा फल चुनें, जिसमें विटामिन सी की मात्रा अधिक हो। जैसे- संतरा, मौसमी, टमाटर, स्ट्रॉबेरी आदि।

सवाल : प्रेगनेंसी में गैस बदहजमी से बचने के लिए क्या करना चाहिए?

जवाब : प्रेगनेंसी में गैस और बदहजमी से बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखें-

  • एक बार में बहुत अधिक ना खाएं।
  • थोड़ी-थोड़ी देर में थोड़ा-थोड़ा खाते रहें।
  • 5 से 6 छोटी-छोटी मील लें।
  • भारी, गरिष्ठ और गैस बनाने वाले भोजन से परहेज़ करें।
  • अत्यधिक तैलीय और बाहर का भोजन ना करें।
  • फाइबर युक्त भोजन करें। डेली 25 से 30 ग्राम फाइबर बॉडी में जाना ज़रूरी है।
  • खूब पानी पिएं। डेली 8-10 गिलास पानी पीना ज़रूरी है।
  • अगर आप अपने खानपान पर ध्यान देंगी तो गैस और बदहजमी से हमेशा बची रहेंगी।
  • इसके साथ ही डेली आधा घंटा ज़रूर टहलें। इससे पाचन प्रक्रिया बेहतर रहती है।

सवाल : प्रेगनेंसी के दौरान स्तनों के बढ़ने और दर्द होने का क्या कारण होता है?

जवाब : प्रेगनेंसी के दौरान स्तन शिशु के स्तनपान के लिए तैयार हो रहे होते हैं। कुदरती तौर पर इनका आकार बढ़ जाता है और इनमें से खून का बहाव तेज़ हो जाता है। इसी के चलते स्तनों में दर्द होता है, जिससे कभी-कभी निपल से सीक्रेशन भी होने लगता है। प्रेगनेंसी के 3 से 4 हफ्ते बाद ही यह दर्द महसूस होना शुरू हो जाता है और शुरू के चार-पांच महीनों तक ऐसा फील होता है। कई बार भारी कपड़े या टाइट इनरवियर की वजह से भी दर्द हो सकता है। निपल पर खुश्की या खारिश के चलते भी ऐसा हो सकता है।

सवाल : प्रेगनेंसी में ब्रेस्ट पेन से कैसे अपना बचाव करें?

जवाब : निम्नलिखित बातों पर ध्यान देकर आप ब्रेस्ट पेन से राहत पा सकती हैं-

  • ब्रेस्ट पर किसी तरह का दबाव न पड़ने दें।
  • अपने इनरवियर पर ध्यान दें। अंडरवायर ब्रा न पहनें।
  • मैटरनिटी ब्रा का इस्तेमाल करें। इससे ब्रेस्ट को सही सपोर्ट मिलेगा।
  • विटामिन और मिनरल युक्त खाद्य पदार्थ ज्यादा लें।
  • खाने में दही और फ्रूट जूस ज़रूर शामिल करें।
  • जब भी पानी पिएं, उसमें नींबू या अदरक का रस मिला लें।
  • ब्रेस्ट पर जैतून तेल या नारियल तेल से मसाज करती रहें।

सवाल : क्या गर्भ में बच्चा उबासी लेता है?

जवाब : प्रेगनेंसी के नौवें सप्ताह से शिशु गर्भ में उबासी लेने लगता है, इसका पता 4d स्क्रीनिंग में लगता है। 24 सप्ताह के गर्भ में शिशु लगभग 6 बार उबासी लेता है।


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प्रेगनेंसी के छठे महीने में शिशु बहुत विकसित हो जाता है। महिलाओं का पेट भी काफी बाहर की तरफ आ जाता है। महिलाओं का वजन भी बढ़ जाता है। छठे महीने में शिशु के मूवमेंट्स अधिक अच्छी तरह पता लगने लगते हैं।

प्रेगनेंसी में अधिक जंक फ़ूड खाने से होने वाले शिशु को पौष्टिक आहार नहीं मिल पाता है, जिसकी वजह से उसको गर्भ में ही कई प्रकार की बीमारियाँ हो सकती हैं। सबसे अधिक ख़तरा शुगर और ओबेसिटी का होता है।

प्रेगनेंसी के नौवें सप्ताह में शिशु एक जैतून (ऑलिव) के आकार का होता है। इस समय शिशु की मांसपेशियों का विकास होना शुरू हो जाता है। ऐसे में महिलाओं को बहुत नींद आती है।

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बधाई हो! आपने गर्भावस्था की दूसरी तिमाही पार कर ली है और तीसरी तिमाही में कदम रख लिया है। एक ओर जहां दूसरी तिमाही को हैप्पी टाइम कहा जाता है, वहीं तीसरी तिमाही में आपको पूरी सतर्कता बरतनी होती है। अब जब डिलीवरी का समय नज़दीक है और शिशु गर्भ में तेज़ी से विकास कर रहा है, तो आप ऐसा कोई काम न करें, जिससे आपको या शिशु को हानि पहुंचे। जननम के इस लेख में प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही की शुरुआत यानी गर्भावस्था के सातवें महीने (25वें सप्ताह से 28वें सप्ताह तक) से जुड़ी ज़रूरी जानकारियां और इससे रिलेटेड सवालों के जवाब दे रहे हैं।

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