जानिए, क्या है सीमन्तोन्नयन संस्कार और क्या हैं इसके फ़ायदे

गर्भाधान और पुंसवन संस्कार के बाद तीसरा संस्कार है सीमन्तोन्नयन संस्कार, जिसे सीमन्तकरण या फिर सीमन्त संस्कार के नाम से भी जानते हैं। जब गर्भ चौथे, छठे या आठवें महीने का होता है, तब यह संस्कार संपन्न किया जाता है। इसका भी उद्देश्य गर्भ को शुद्धि प्रदान करना ही होता है, ताकि होने वाली संतान में अच्छे गुणों का समावेश हो। इस संस्कार में गर्भवती स्त्रियों को प्रसन्नचित रखने के लिए सौभाग्यवती स्त्रियों द्वारा उनकी मांग भरी जाती है, ताकि उनके मन के प्रसन्न रहने से मां और शिशु दोनों स्वस्थ रह सकें।

देखा जाए तो पुंसवन संस्कार का ही विस्तार है सीमन्तोन्नयन संस्कार। सीमन्त का अर्थ होता है केश या बाल और उन्नयन का तात्पर्य है ऊपर उठाना। इस संस्कार में पति अपनी पत्नी के बालों को संवारते हुए ऊपर की ओर उठाता है। यही वजह है कि इस संस्कार का नाम सीमन्तोन्नयन संस्कार पड़ गया। इस संस्कार से गर्भवती महिलाएं मानसिक रूप से मजबूत होती हैं। इस संस्कार को करते वक्त पति को एक मंत्र का भी उच्चारण करना होता है, जो इस प्रकार हैः 

येनादितेः सीमानं नयाति प्रजापतिर्महते सौभगाय।

तेनाहमस्यौ सीमानं नयामि प्रजामस्यै जरदष्टिं कृणोमि।।

इस श्लोक का अर्थ यह है कि जिस तरह से प्रजापति ने देवमाता अदिति का सीमंतोन्नयन संस्कार किया था, उसी तरह से मैं भी इस गर्भवती का सीमंतोन्नयन करके इसकी संतान के दीर्घायु होने की कामना करता हूं। इस संस्कार में खिचड़ी भी खिलाने की परंपरा है। इस खिचड़ी मे पर्याप्त मात्रा में घी का होना जरूरी है। इस खिचड़ी को गर्भवती स्त्री को भी खाना होता है। संस्कार के वक्त जो महिलाएं मौजूद होती हैं, उन्हें गर्भवती स्त्री को यह आशीर्वाद देना चाहिए कि उसकी जन्म लेने वाली संतान जीवित हो और उस स्त्री का भाग्य हमेशा उज्जवल बना रहे।

jaanie kya hai seemantonnayan sanskaar aur kya hain isake phaayade

इसलिए करना जरूरी है सीमन्तोन्नयन संस्कार

एक तो इस संस्कार को करने से गर्भपात की आशंका कम हो जाती है, क्योंकि इससे मां खुश रहती हैं और उनके खुश रहने की वजह से मां व गर्भ में पल रहे शिशु का स्वास्थ्य भी उत्तम बना रहता है। इससे गर्भ तो शुद्ध होता ही है, साथ ही मां को यह प्रेरणा मिलती है कि वे केवल सकारात्मक, आध्यात्मिक, धार्मिक और अच्छी चीजों के बारे में ही सोचें। गर्भ में चौथे महीने में बच्चों के अंगों का विकास होना शुरू होता है। इसी दौरान दिल भी विकसित होने लगता है। मां यदि अच्छे संस्कारों के बारे में जानती हैं, तो इस दौरान शिशु के अंदर भी वे चीजें पहुंचनी शुरू हो जाती हैं। तभी तो कई बार गर्भवती महिलाओं को इस दौरान वेद और शास्त्र आदि भी पढ़ने को दिये जाते हैं। कहा जाता है कि शिशु का करीब 90 फीसदी बौद्धिक विकास तो गर्भ में ही हो जाता है। महाभारत में अुर्जन का पुत्र अभिमन्यु इसका उदाहरण है, जिसने गर्भ में ही चक्रव्यूह को भेदना सीख लिया था।

सारांश : जब भ्रूण चार, छह या आठ महीने का होता है, तो सीमन्तोन्नयन संस्कार किया जाता है। यह संस्कार अच्छे गुण वाले स्वस्थ संतान की प्राप्ति के लिए किया जाता है। यह संस्कार मां और गर्भस्थ शिशु दोनों को ही शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनने में मदद करता है।

Summary: When the embryo is of four, six or eight months, symantonian is performed. This ritual is done for achieving healthy children with good qualities. This ritual helps both mother and pregnant infant to become physically and mentally strong.

यह भी पढ़ें :-

मुंडन संस्कार, बच्चे को स्वस्थ और सुंदर बनाने के लिए ज़रूरी

नामकरण संस्कार का असर बच्चे के व्यक्तित्व पर पड़ता है?

16 संस्कारों के बारे में सब कुछ जानिए केवल 5 मिनट में

आज ही जननम फेसबुक कम्युनिटी को ज्वाइन करें जहां हमारे एक्सपर्ट्स प्रेगनेंसी के हर पहलू पर टिप्स दे रहे हैंजननम आपको सही, सटीक और उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए हमेशा आपके साथ हैं। लेकिन इसी के साथ आपको डॉक्टर से सलाह लेना भी ज़रूरी है।


Other articles related to this

शरीर के बाकी हिस्सों की तरह मुंह की सफ़ाई सबसे अहम होती है। ख़ासकर दांतों को स्वस्थ रखना और मसूड़ों ...

गर्भावस्था के नौ महीने काफी अहम होते हैं। इस दौरान आपको हर दिन अतिरिक्त कैलोरी के साथ ही साथ ज्यादा ...

बच्चा परिवार में असीमित खुशियाँ लेकर आता है। ऐसे में अगर आपको जुड़वा बच्चे होने होने की खबर मिले तो ...

महिलाओं को गर्भधारण के बाद जो सबसे पहली बात ध्यान में रखनी पड़ती है, वो है संतुलित, पोषक और नियमित आह...

गर्भ धारण करना किसी भी महिला के लिए बहुत ही ख़ुशी का पल होता है । अगर आप कार्यरत महिला हैं तो इस दौर...

कुछ समय पहले तक घर में होने वाली किसी भी खुशी को मनाने के लिए गुड़ से मुँह मीठा करने की प्रथा थी। यह...

Other articles related to this

शरीर के बाकी हिस्सों की तरह मुंह की सफ़ाई सबसे अहम होती है। ख़ासकर दांतों को स्वस्थ रखना और मसूड़ों की मज़बूती। गर्भावस्था के दौरान और बच्चे को जन्म देने के

गर्भावस्था के नौ महीने काफी अहम होते हैं। इस दौरान आपको हर दिन अतिरिक्त कैलोरी के साथ ही साथ ज्यादा पोषक तत्वों की ज़रूरत होती है। ऐसे में महिलाएं हमेशा पसोपेश में रहती हैं कि वो क्या खाएं और क्या ना खाएं? तो हम आपको बताते हैं

बच्चा परिवार में असीमित खुशियाँ लेकर आता है। ऐसे में अगर आपको जुड़वा बच्चे होने होने की खबर मिले तो खुशियाँ ओर उत्साह दोगुनी ही हो जाती है!

महिलाओं को गर्भधारण के बाद जो सबसे पहली बात ध्यान में रखनी पड़ती है, वो है संतुलित, पोषक और नियमित आहार। गर्भ के पहले तीन महीने शिशु के विकास की दृष्टि से सबसे अधिक महत्वपूर्ण होते हैं

गर्भ धारण करना किसी भी महिला के लिए बहुत ही ख़ुशी का पल होता है । अगर आप कार्यरत महिला हैं तो इस दौरान आपको कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

कुछ समय पहले तक घर में होने वाली किसी भी खुशी को मनाने के लिए गुड़ से मुँह मीठा करने की प्रथा थी। यही गुड़ आज भी बहुत से घरों में खाने के बाद मुखवास के तौर पर खाया जाता है।

जननम कम्युनिटी से जुड़ने के फायदे!

Join the #1 global parenting resource and start receiving the following helpful newsletter:

Join the community now!

Fill the following & enjoy perks!

Due Date or child's birthday