प्रेगनेंसी का पहला महीना : लक्षण, टेस्ट व उपाय

हर महिला के लिए प्रेगनेंसी के शुरूआती सिम्प्टम अलग-अलग होते हैं। ज़्यादातर महिलाओं के लिए, यह वह महिना होता है जब आपको पता चलता है कि आप प्रेग्नेंट हैं। इस महीने आपको प्रेगनेंसी के शायद सिर्फ़ दो ही सिम्प्टम दिखेंगे -- पॉज़िटिव प्रेगनेंसी टेस्ट (और पीरियड मिस करना)

आप निम्न बदलाव महसूस कर सकती हैं

  • वॉमिट करने का मन होना -- पहले महीने में आपको “मॉर्निंग सिकनेस” के शुरूआती साइन दिखने लगेंगे।
  • ब्रेस्ट सॉफ़्ट हो जाना- आपके ब्रेस्ट या निप्पल्स में स्वेलिंग और सॉफ़्टनेस हो सकती है।
  • थकान- जैसे-जैसे आपकी बॉडी हॉर्मोनल चेंजेज़ के साथ एडजस्ट करती है आपको थकान महसूस हो सकती है।
  • बार-बार यूरिन (पेशाब) आना -- यह बॉडी में ह्यूमन क्रोरियोनिक गोनेडोट्रोपिन (एचसीजी) (hCG) के प्रोडक्शन का एक साइड इफ़ेक्ट होता है।

खाने की चीज़ों की स्मेल से परेशानी होना – कुछ खाने की चीज़ों की सिर्फ़ स्मेल से ही आपकी तबियत खराब हो सकती है।

आपका बच्चा कैसे ग्रो कर रहा है 

आपका बच्चा अभी सिर्फ़ .1 से .2 मिलीमीटर बड़ा है और इस स्टेज में उसे ब्लास्टोसिस्ट कहते हैं। तीन हफ़्तों की प्रेगनेंसी में आपके बच्चे के सभी जेनेटिक मटेरियल ग्रो कर चुके हैं -- उसका जेंडर भी तय हो चुका है।

इस महीने डॉक्टर के पास प्रीनेटल विज़िट में डॉक्टर आपके कौन-से टेस्ट्स करेंगे ?

  1. आपका प्रेगनेंसी टेस्ट किया जाएगा जिससे पक्का हो जाएगा कि आप प्रेग्नेंट हैं।
  2. आप अपनी पूरी फैमिली की मेडिकल हिस्ट्री डॉक्टर के साथ शेयर करेंगी।
  3. आम तौर पर, डॉक्टर आपके यूटेरस, वेजाइना और सर्विक्स को चेक करने के लिए इंटर्नल पेल्विक एग्ज़ैम करेंगे।  
  4. अगर पिछले साल आपने पैप स्मीयर नहीं करवाया तो डॉक्टर आपका पैप स्मीयर टेस्ट करेंगे।
  5. रूटीन ब्लड टेस्ट और यूरिन टेस्ट किए जा सकते हैं।
  6. आपकी हेल्थ असेसमेंट की जाएगी जिसमें आपकी हाइट, आपका वज़न और ब्लड प्रेशर चेक किए जाएंगे।
  7. आपको प्रीनेटल विटामिन और फ़ोलिक एसिड दिया जाएगा।

अगर आप कोई ओवर-द-काउंटर या प्रिस्क्रिप्शन दवाई लेती हैं तो डॉक्टर को इस बारे में बताएं।


इस महीने आपने किस बारे में सोचना है:

यह प्रेगनेंसी का आपका पहला महीना है और प्रेगनेंसी के बारे में आपके मन और दिमाग में बहुत सवाल होंगे, अपने लिए सपने होंगे और मन में जोश होगा। लेकिन इस महीने आपको प्लान करना होगा कि आपको क्या खाना चाहिए और क्या नहीं। आपको ध्यान से सभी प्रीकॉशन लेने होंगे और आने वाले महीनों के लिए ज़रूरी सामान की लिस्ट भी तैयार करनी होगी; ऐसा करने से आपको स्ट्रेस और एंग्ज़ायटी नहीं होगीअटैचमेंट:

प्रेगनेंसी के पहले महीने में ख़ास तौर पर बच्चे की फॉर्मेशन होती है। एग फल्लोपियन ट्यूब्स से जाते हुए हेड स्पर्म से मिलता है। स्पर्म के एग के साथ मिलने के बाद, वह ब्लास्टोसिस्ट बन जाता है और अब वह अपने आप को अटैच करने के लिए यूटेरस में जगह ढूँढता है। उसे यूटेराइन वॉल में जो जगह ठीक लगती है वहाँ वह अपने आप को अटैच कर लेता है।

यह बहुत इम्पॉर्टेन्ट स्टेप है क्योंकि अगर ठीक से अटैचमेंट नहीं हुआ तो बच्चे की आगे की ग्रोथ नहीं होगी। इसे इम्प्लांटेशन कहते हैं। अटैचमेंट ठीक से न होने पर मिसकैरिज हो जाता है और ब्लास्टोसिस्ट (या बच्चा) खून के साथ महिला की बॉडी से निकल जाता है।।

एग की साइज़ और सेल्स:

अब एग की साइज़ महीने के शुरूआती दिनों की साइज़ से 10,000 गुना ज़्यादा बढ़ गया है। प्लैसेंटा डेवलप होनी शुरू हो गई है और आपका बच्चा धीरे-धीरे साइज़ में बड़ा हो रहा है। उसके अंदर के ब्लड सेल्स डेवलप होने लगे हैं और वे काम करने के लिए तैयार हैं। उसकी बॉडी की साइज़ लगभग चावल के दाने की साइज़ के बराबर है और वह पहले से ज़्यादा तेज़ी से बढ़ रहा है। जल्द ही, महीने के बीच से बेबी फॉर्मिंग स्टेज शुरू हो जाएगा, जिसके बारे में आप आगे पढ

बेबी फॉर्मिंग:

इस समय, आपकी नन्ही जान ऐम्नीऑटिक फ्लूइड में तैरते हुए एक मटर के दाने जितनी बड़ी है जिसे सॉफ्ट कुशन जैसे यूटेरीन वॉल ने प्रोटेक्ट किया हुआ है। लेकिन, यह अभी भी दीवार पर दाग की तरह एक छोटे ट्यूमर जैसी ही है। इम्प्लांटेशन के एकदम बाद बच्चे की फॉर्मेशन प्रोसेस शुरू हो जाती है। यह अभी भी इंसान जैसा नहीं दिखता बल्कि एक एलियन जैसा दिखता है जो इंसान की बॉडी जैसे बनने की कोशिश कर रहा है। माँ और बच्चे को जोड़कर रखने वाला अम्बिलिकल कॉर्ड ग्रो होना शुरू हो जाता है। यह कॉर्ड, प्लैसेंटा की मदद से माँ से बच्चे तक न्यूट्रीएंट्स और ऑक्सीजन पहुँचएगा और बच्चे से निकलने वाले वेस्ट को माँ तक वापस पहुँचएगा

बच्चे की स्पाइन:

पिछले हफ़्ते बच्चे ने यूटेरस में अपने लिए जगह ढूँढ ली थी और अब इस हफ़्ते उसकी स्पाइन तैयार होनी शुरू हो जाएगी और फ़िर, उसके एकदम बाद, कुछ सॉफ्ट हड्डियाँ उसकी स्पाइन के आसपास साफ़-सुथरे तरीके से अपने आप फिट होने लगें

स्किन और ऑर्गन्स:

इस समय, आपके बच्चे का सिर पिचका हुआ है, उसकी एक चपटी नाक है और उसकी स्किन का रंग फ़ीका है। इसी फॉर्मेशन प्रोसेस से आने वाले महीनों में उसकी बॉडी के फीचर्स पर्फेक्ट बन जाएंगे।

एक सीरियस बात:

मुमकिन है कि आपके कन्सीव करने के 25वे दिन या इस महीने के बीच से आपके बच्चे के हार्ट ने धड़कना शुरू कर दिया है। आप अल्ट्रासाउंड के पिक्चर्स से या डॉप्लर जैसे बीट डिटेक्टिंग मशीन से इस बात का पता लगा सकती हैं

पहले महीने के सिम्प्टम और उनसे निपटना

प्रेगनेंसी के पहले महीने आपके ब्रेस्ट में चेंजेज़ आएंगे और आपकी भूख बढ़ जाएगी। इन दोनों सिम्प्टम के साथ-साथ दूसरे सिम्प्टम भी हैं जिनसे आप प्रेग्नेंट होने का अंदाज़ा लगा सकती हैफनी फ़ील करना:

आपको हमेशा ही फनी फ़ील होता रहेगा। आपके गले के पीछे के हिस्से में सॉफ्ट मेटल और खट्टेपन का टेस्ट आएगा। ऐसा शायद बार-बार वॉमिट करने या बॉडी के ज़्यादा हॉर्मोन्स बनाने की वजह से हो रहा है। आप दिन में थकान और सुस्त महसूस करेंगी और पूरी रात नींद नहीं आने की वजह से आपकी बॉडी में भी फनी फ़ीलिंग होती रहेगी। आपको इस नए एक्सपीरियंस से निपटने में मुश्किल तो होगी लेकिन इससे निपटना आसान है। अपने डाइजेस्टिव सिस्टम के अनुसार ऐसी डाइट अपनाएं जिसमें आपको जो फ्लेवर पसंद हैं वे सभी फ्लेवर मौजूद हों। कुछ अलग खाने के लिए, आप दो या उससे ज़्यादा फ्लेवरों को मिक्स कर अलग एक फ्लेवर बना सकती हैं।भूख ज़्यादा लगना:

धीरे-धीरे आपको अपनी बढ़ती हुई भूख को शांत करने की ज़रूरत महसूस होगी। प्रेगनेंसी के दौरान आप अपना खाना अपने बच्चे के साथ शेयर करती हैं इसलिए आपको बार-बार भूख लगेगी और आप ज़्यादा से ज़्यादा खाना खाएँगी। आपका मन करेगा कि आप ब्रेकफास्ट और लंच के बीच या लंच और डिनर के बीच दिन में किसी भी वक़्त किचन से कोई खाने की चीज़ लेकर खाएं। आपके लंच और डिनर भी हेवी हो जाएंगे। ऐसा होना पूरी तरह से नॉर्मल और हेल्दी है। बस आपको ध्यान रखना है कि आप हर बार भूख लगने पर कुछ हेवी न खाएं। हेवी मील के बजाय स्नैक्स, सलाद, फ़ल, आदि खाएं या जूस पीएं क्योंकि इनसे आप की भूख भी मिटेगी और बच्चे को वूम्ब (कोख) में बढ़ने की जगह भी मिलेगी। साथ ही, हेवी मील अब आपके लिए डाइजेस्ट करना थोड़ा मुश्किल होगा जिसकी वजह से आपको कई परेशानियों का सामन भी करना पड़ सकता है।बेबी बंप:

ं।

प्रेगनेंसी के पहले महीने में आप कौन-सी एक्टिविटीज़ कर सकती हैं:

यह सही है कि प्रेगनेंसी के पहले ही महीने में आप अपने रोज़ के एक्टिविटीज़ बदल नहीं सकतीं लेकिन आप अपने वर्कलोड को कुछ हद तक कम ज़रूर कर सकती हैं जिससे आप इवनिंग वॉक करने, अपना फेवरेट डिश बनाने, फ़ल खाने या फ्रूट जूस पीने जैसी दूसरी रेफ्रेशिंग एक्टिविटीज़ के लिए समय निकाल सकती हैं। साथ ही, आप अपने दोस्तों/सहेलियों और घरवालों से बातचीत कर अपने आप को मेंटली हेल्दी भी रख सकती हैं।

प्रेगनेंसी के पहले महीने में आपको क्या डाइट लेना चाहिए:

1. फोलेट से भरपूर खाने की चीज़ें:

आप अपने गाइनकॉलजिस्ट द्वारा सुझाए गए आयरन सप्लीमेंट ले रही होंगी लेकिन उनके साथ-साथ आप आयरन से भरपूर फ़ल या सब्ज़ियाँ जैसे संतरे, ब्रोकोली, अंडे, बीन्स, आलू, आदि को भी अपनी डाइट में शामिल कर सकती हैं।

2. विटामिन बी6:

प्रेगनेंसी के पहले फेज़ को एन्जॉय करते हुए अगर आपको वॉमिट करने का मन होता है या वॉमिटिंग होती है तो आपको अपने खाने में विटामिनबी6 को शामिल करना चाहिए। विटामिन बी6 के टैबलेट्स लेने के बजाय अनाज, पीनट बटर, नट्स और सैल्मन आदि अपने डाइट में शामिल करें जिनमें भरपूर विटामिन बी6 मौजूद होता है।

3. फ़ल:

एक प्रेग्नेंट महिला की डाइट में फ़लों का होना ज़रूरी होता है। प्रेगनेंसी के इस स्टेज में पानी से भरे फ़ल खाने से ज़्यादा फ़ायदा होता है क्योंकि ये आपकी बॉडी को हाइड्रेटेड रखते हैं। इनमें फाइबर भी होता है जो कि प्रेगनेंसी के शुरूआती स्टेज में यूटेरस और उसके आसपास की डेवलपमेंट के लिए ज़रूरी होता है।

4. दूध के प्रोडक्ट्स:

इस स्टेज में दूध और दूध के प्रोडक्ट्स अपने डाइट में शामिल करना बहुत ही फायदेमंद होता है और डॉक्टर भी इस पर बहुत ज़ोर देते हैं। दूध और दूध के प्रोडक्ट्स में अच्छी मात्रा में न्यूट्रीएंट्स, एसिड्स, कैल्शियम, आदि मौजूद होते हैं। अगर आपके लिए दूध डाइजेस्ट करना मुश्किल होता है तो आप दही, चीज़, पनीर जैसे दूध के प्रोडक्ट्स हफ़्ते में दो बार ले सकती हैं।

5. मीट:

प्रेगनेंसी के दौरान, कुछ प्रकार के मीट सेफ होते हैं। हालांकि, आपको मीट थोड़ी मात्रा में ही खाना चाहिए। आपके लिए, वाइट लीन मीट, चिकन, और फिश सेफ हैं क्योंकि इनमें प्रोटीन होता है, लेकिन ध्यान रहे कि इन्हें हमेशा अच्छे-से पकाकर ही खाएं। दूसरी ओर, पोर्क या सी फ़ूड आपके बच्चे को नुकसान पहुँचा सकता है और इसलिए इसे नहीं खाना चहिए।

प्रेगनेंसी के पहले महीने में किए जाने वाले एक्सरसाइज़ेज़

1. लेग स्ट्रेचेज़:

अपने लेग्स को स्ट्रेच कर लें। अपने दाहिने लेग को फ़ोल्ड करते हुए अपने बाएं हाथ से अपने दाएं पैर की उँगलियों को टच करें। अपने एक लेग को दूसरे लेग के पास लाते हुए साँस अंदर खींचे और साँस बाहर छोड़ते हुए उसे वापस दूर ले जाएँ। इसे अपने दूसरे लेग के साथ 5 बार दोहराएं।

2. बटरफ्लाई स्ट्रेचिंग:

अपने घुटनों को ऐसे मोड़ें ताकि आपके दोनों पैर एक दूसरे को टच कर रहे हों। अपने पैरों को अपनी बॉडी के पास लाते हुए अपने थाई मसल्स को रिलैक्स करें। अपने हाथों को घुटनों के जॉइंट्स पर रखें और प्रेशर दें।

3. फ्लोर स्ट्रेच:

फ्लोर पर लेट जाएँ और एक तरफ़ टर्न करें। अपने हाथ को ऊपर की ओर स्ट्रेच करते हुए दूसरी ओर लेकर जाएँ। अपने हाथ को वापस ले आएं और दूसरी तरफ़ टर्न हो जाएं। अब पहले हाथ की तरह दूसरे हाथ को स्ट्रेच करें। इस एक्सरसाइज़ को 5 बार करें।

4. स्विमिंग:

प्रेगनेंसी के पहले महीने में वज़न बढ़ने की वजह से आपकी बॉडी पर, ख़ास तौर पर आपके पेट पर स्ट्रेच मार्क्स दिख सकते हैं। स्विमिंग, इनसे बचने का सबसे अच्छा तरीका है। स्विमिंग से वज़न घटने के साथ-साथ स्ट्रेच मार्क्स भी कम दिखेंगे।

5. इवनिंग वॉक:

पूरी प्रेगनेंसी के दौरान वॉक करना आपके लिए सबसे अच्छा एक्सरसाइज़ है। इस एक्सरसाइज़ से आपको प्रेगनेंसी प्रॉब्लम्स से छुटकारा मिलेगा और साथ ही, आप पूरे दिन एक्टिव भी रहेंगी। मॉर्निंग वॉक से भी आपको फ़ायदा होगा क्योंकि इससे आपकी बॉडी को ताज़ा ऑक्सीजन मिलेगा जबकि इवनिंग वॉक से आपका डाइजेस्टिव सिस्टम हेल्दी रहेगा।

प्रेगनेंसी के पहले महीने में सेक्स:

प्रेगनेंसी के पहले महीने में सेक्स बिलकुल सेफ होगा क्योंकि ऐम्नीऑटिक सैक और फ्लूइड आपके बच्चे को एक कुशन की तरह अच्छे-से संभालकर रखेंगे। हालांकि, ऑर्गैज़्म से कॉन्ट्रैक्शन्स होंगे लेकिन इनसे आपके फीटस को कोई नुकसान नहीं पहुँचेगा।

पहले महीने में स्ट्रेस को कैसे दूर रखें:

1. पूरे महीने के लिए पहले से ही प्लान बनाकर रखें। अपने पार्टनर से डिस्कस करके तय करें कि आप किस प्रकार सबको अपनी प्रेगनेंसी की न्यूज़ देना चाहेंगी; साथ ही, यह भी तय करें कि आप अपने और अपने पार्टनर के जीवन में क्या-क्या चेंजेज़ लाना चाहेंगी। पहले हफ़्ते में, आप खुद अपनी प्रेगनेंसी के न्यूज़ एडजस्ट होने के लिए अपने आप को समय दें।

2. चेकअप्स के डेट्स को कैलेंडर में मार्क करके रखें ताकि बाद में कोई स्ट्रेस न हो। डाइट रिपोर्ट और मेडिकल डॉक्यूमेंट्स सहित दूसरी जो-जो चीज़ें आपको लेकर जानी हैं उनकी एक लिस्ट बना लें।

3. हफ़्ते में एक बार अपनी मॉम के साथ कहीं घूमने जाने का आईडिया बुरा नहीं है क्योंकि किसी के साथ समय बिताने से आपको स्ट्रेस से छुटकारा मिलेगा।

4. प्रेगनेंसी के दौरान एक्सरसाइज़, योग और मैडिटेशन से आपको बहुत फ़ायदा मिलेगा। इससे न सिर्फ़ आपका दिमाग और आपकी हेल्थ तरोताज़ा रहेंगे बल्कि आपकी साँस लेने से जुड़ी परेशानियाँ भी कम होंगी।

5. बच्चा प्लान करने से पहले ही अपने पार्टनर से सारी बाते डिस्कस कर लें। इससे शुरू से ही आप दोनों के बीच न तो कोई कन्फ्यूश़न रहेगा और न ही बाद में कोई स्ट्रेस होगा।

प्रेगनेंसी के पहले महीने में मेडिकल ट्रीटमेंट और चेकअप:

अपने डॉक्टर के एडवाइस के अनुसार चलें और रेगुलर चेकअप पर जाती रहें। पूरे प्रेगनेंसी के दौरान ऐसा करना आप के लिए फ़ायदेमंद रहेगा और आप के लिए आने वाले महीने आसान होंगे। वॉमिटिंग, सिरदर्द, दर्द जैसी छोटी-छोटी परेशानियों के लिए डॉक्टर से दवाई लेना न भूलें क्योंकि डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के बजाय कोई और दवाई लेने से नुकसान हो सकता है। आपके सिम्प्टम को ठीक करने के लिए कुछ दवाइयाँ इस प्रकार हैं।

पहले महीने के दौरान निम्नलिखित सुझाव और प्रीकॉशन अपनाएं:

वाइन, कार्बोहायड्रेट और दूसरे जंक फूड्स अपने डाइट चार्ट में शामिल न करें क्योंकि इस स्टेज में ये सब आपके हेल्थ को नुकसान पहुंचाएंगे।

अगर आप सिगरेट पीती हैं तो धीरे-धीरे सिगरेट पीना कम करते हुए इस आदत को पूरा छोड़ दें। एकदम से सिगरेट पीना छोड़ने से ऐसा हो सकता है कि आपके जल्द ही वापस पीना शुरू कर दें।

पक्के तौर पर, प्रिस्क्रिप्शन के अनुसार समय पर अपनी दवाइयाँ लेती रहें ताकि आपको किसी दो या उससे ज़्यादा दवाइयों के एक साथ लेने पर होने वाले रिएक्शन का सामना न करना पड़े।

ज़्यादा पानी पीएं और जितना आप आम तौर पर सोती हैं उससे ज़्यादा समय के लिए सोएं ताकि आपकी बॉडी को ज़रूरी आराम मिले।

अभी से ही अपनी पीठ के बल सोना शुरू कर दें; इससे आने वाले समय के लिए आसानी रहेगी।

प्रेगनेंसी एक फ़ूल की तरह है जो समय के साथ-साथ ख़ूबसूरत बनता जाता है। हर एक फ़ूल की कली सख्त (हार्ड) होती है और उसमें कोई रहस्य छुपा होता है लेकिन जैसी ही वह फ़ूल बनने की ओर धीरे-धीरे अपने कदम बढ़ाती है उसका सफ़र आसान होता रहता है। समय के साथ-साथ एक माँ भी अपने सिचुएशन और अपनी ज़िम्मेदारियों को अपना लेती है। वह समझ जाती है की वह इस दुनिया में एक नए जीवन को लाने का ज़रिया है। आने वाले दिनों में उसके जीवन में जो चेंजेज़ होते हैं वह उनके अनुसार अपने आपको ढालना सीख जाती है।


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अगर आप पहली बार गर्भवती हैं तो यह एक नया अनुभव होगा और आपके मन में कई अलग-अलग सवाल उमड़ रहे होंगे। जहां कई छोटे-मोटे सवालों के जवाब आपको अपनी सास, माँ या अन्य कोई क़रीबी, अनुभवी महिला से मिल सकते हैं

अगर आप एक स्वस्थ गर्भावस्था का आश्वासन चाहती हैं तो गर्भावस्था में होने वाली देखभाल में सही टीकाकरण भी शामिल करें। यह आपको गर्भावस्था के दौरान कई प्रकार के संक्रमणों से प्रतिरक्षा प्रदान करके गर्भ के अंदर पल रहे शिशु की अच्छी सेहत और उचित विकास को सुनिश्चित करता है।

जैसे-जैसे अलग होने वाले सेल के गोले किसी इंसानी शरीर का रूप ले रहे हैं, आपका बच्चा ब्लास्टोसिस्ट से ज़ाइगोट में बदल रहा है। उसी प्रकार, जैसे-जैसे आपका शरीर और दिमाग आपके माँ बनने की नई भूमिका को अपना रहे हैं, वैसे-वैसे आपको भी बदलाव महसूस हो रहे होंगे।

जैसे ही एक महिला गर्भवती होती है वो यह जानने लिए उत्सुक होती है की कब वो अपने नन्हे से शिशु को अपनी गोद में ले सकेगी। आपकी इस उत्सुकता को कम करने के लिए जननम आपके लिये लाया है गर्भावस्था देय तारीख

एक सामान्य गर्भावस्था, प्रायः 40 हफ्तों की होती है और इसको 3 तिमाहियों में बाँटा जा सकता है। प्रत्येक तिमाही अपने साथ अलग-अलग चुनौती, विकास और सावधानियाँ लेकर आती है। गर्भावस्था की पहली तिमाही भ्रूण विकास

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