प्रसव के बाद ये 4 उपाय अपनाकर रहें तंदुरुस्त

मां बनने की खुशी हर महिला को होती है। साथ ही परिवार में भी हर्षोल्लास का वातावरण बन जाता है, लेकिन मां बनने की खुशी में महिलाएं अक्सर अपना ध्यान रखना भूल जाती हैं, जिससे कि बाद में गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। ऐसे में बच्चा होने की खुशी मनाने के साथ-साथ नवप्रसूताओं को अपना भी ख्याल रखना ज़रूरी होता है। आयुर्वेद के अनुसार, प्रसव के बाद 42 दिन तक नवप्रसूता और नवजात को विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। इस दौरान नवप्रसूता शरीर, मन और भावनाओं में तालमेल बिठाने के लिए जूझ रही होती है। अगर सी सेक्शन डिलीवरी यानी शल्यक्रिया से प्रसव हुआ है, तो शुरुआत के 15 दिन का समय स्वस्थ होने में ही निकल जाता है।


इस हालत में नवप्रसूता के खान-पान से लेकर नहाने, टहलने और सोने के समय का ध्यान रखना बेहद ज़रूरी होता है। हार्मोनल असंतुलन यानी वात दोष के कारण उन्हें गैस, कब्ज और अनिद्रा की शिकायत हो सकती है। ऐसी समस्याओं के लिए आयुर्वेद में कुछ निदान सुझाए गए हैं, जिन्हें अपनाने से नवप्रसूता ही नहीं, बल्कि गर्भवती महिलाओं को भी फ़ायदा हो सकता है।


(1) जच्चा का कैसा हो आहार (Diet for new mom and pregnant ladies)


गर्भावस्था (Pregnancy) और प्रसव (Delivery) के दौरान हार्मोन की जो गड़बड़ियां हो जाती हैं, उन्हें आयुर्वेदिक सिद्धांतों के मुताबिक भोजन, आराम, मालिश और हर्बल थैरेपी से ठीक किया जा सकता है।


आयुर्वेद में नवप्रसूता के वात दोष (Vata dosha) को नियंत्रित करने के लिए उसे गर्म, ताज़ा और कम तैलीयभोजन लेने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा, मीठा, खट्टा और नमकीन खाना भी नवप्रसूता को दिया जा सकता है। मीठे के तौर पर चीनी की जगह शहद, चावल और ताज़े फल दे सकते हैं।


जिस कमरे में जच्चा-बच्चा रह रहे हैं, उसके तापमान को भी संतुलित रखने की ज़रूरत होती है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को भी बहुत ज्यादा ठंडी चीज़ें खाने से परहेज के साथ सर्दी से बचने की सलाह दी जाती है। जहां कमरे के तापमान के बराबर पानी पीना फ़ायदेमंद होता है, वहीं कच्ची सब्ज़ियां, आइसक्रीम और सलाद को फ्रिज़ से निकालकर सीधे खाना नुकसानदेह हो सकता है।


नवप्रसूता को हमेशा ऐसा भोजन दिया जाना चाहिए, जो पचने में आसान हो, ताकि नवजात को मां का दूध भरपूर मिल सके।

प्रसव के बाद ये 4 उपाय अपनाकर रहें तंदुरुस्त

सूखे मेवे (Dry fruits)



नवप्रसूता को सूखे मेवे यानी ड्राई फ्रूटस ज़रूर खाना चाहिए। अगर इन्हें रात भर पानी में भिगोकर फिर सुबह खाया जाए, तो ये काफी फ़ायदेमंद होते हैं। बादाम को छीलकर खाना चाहिए। प्रोटीन वाले आहार ज़रूर लें। इसके लिए चुकंदर, गाजर, हरी सब्ज़ियां, दलिया, सोयाबीन पकाकर खा सकते हैं। देसी घी में बना हलवा, या ऑलिव ऑयल में पका खाना खा सकते हैं। सूप और दही को भी खाने में शामिल करना चाहिए।

प्रसव के बाद ये 4 उपाय अपनाकर रहें तंदुरुस्त

प्रोटीन (Protein)



गर्म दूध, दूध से बनी चीज़ें, सूप, मसूर की दाल, बादाम, अखरोट, दही या मक्खन को खाने में ज़रूर शामिल करना चाहिए।

प्रसव के बाद ये 4 उपाय अपनाकर रहें तंदुरुस्त

कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrate)


बासमती चावल, पास्ता, चपाती, दलिया, शहद खाएं।


 इन चीज़ों से करें परहेज़ (Foods to avoid)


कॉफी, ब्लैक टी, चॉकलेट, कोल्ड ड्रिंक, चिप्स, टोस्ट, ह्वाइट पोटैटो नहीं खाना चाहिए।


(2) जच्चा-बच्चा की मालिश (Massage for moms and babies)


आयुर्वेद में वैसे तो सभी के लिए मालिश यानी बॉडी मसाज को सही माना गया है, लेकिन ख़ास तौर पर नवप्रसूताओं के लिए शरीर की मालिश ज़रूरी बताई गई है। इसे अभ्यंग कहा जाता है। इसमें शरीर को आराम पहुंचाने के लिए कम से कम 90 मिनट तक पूरे शरीर की मालिश की जाती है। इसे घर पर भी कर सकते हैं, लेकिन जिन महिलाओं का प्रसव शल्य क्रिया से (सी सेक्शन डिलीवरी) हुआ है, उन्हें शुरू के कुछ हफ्तों में इस तरह की मालिश से बचना चाहिए। इसके बाद शरीर में पेट से ऊपर के हिस्सों में मालिश करा सकती हैं।

प्रसव के बाद ये 4 उपाय अपनाकर रहें तंदुरुस्त

नवजात की हर दिन 15 मिनट मालिश की जा सकती है। नहलाने से पहले बच्चे की किसी भी आयुर्वेदिक तेल (तिल या नारियल के तेल) से मालिश करें और इस तेल को कुछ देर तक शरीर को अच्छी तरह से सोखने दें। उसके बाद गुनगुने पानी से नहलाएं।


प्रसव के बाद ये 4 उपाय अपनाकर रहें तंदुरुस्त

(3) पेट को बांधना (Belly wrapping)



पेट पर कपड़ा बांधना (Belly wrapping) पुरानी और पारंपरिक आयुर्वेदिक तकनीक है। यह शरीर में ख़ाली जगह को भरने, मांसपेशियों को मज़बूत करने में सहायक मानी जाती है। बेली रैपिंग को शरीर में वात दोष के प्रवेश को रोकने के लिए बेहतर और कारगर बताया गया है।


प्रसव के बाद ये 4 उपाय अपनाकर रहें तंदुरुस्त

(4) सकारात्मक माहौल (Positive Environment)



गर्भावस्था में या प्रसव (Delivery) के बाद महिलाओं के शरीर में जिस तरह के हार्मोनल परिवर्तन होते हैं, उसे देखते हुए उन्हें भावनात्मक समर्थन की काफी ज़रूरत होती है। ऐसी स्थिति में उन्हें खुश रखना और किसी भी तरह का तनाव नहीं देना चाहिए। गर्भवती महिला या नवप्रसूता को खुद भी किसी भी तरह के तनाव से बचना चाहिए। इसके लिए घर पर ही अरोमाथेरेपी लेना काफी कारगर हो सकता है। इससे मन और शरीर दोनों स्वस्थ रहेंगे और आप खिला-खिला सा महसूस करेंगी।

प्रसव के बाद ये 4 उपाय अपनाकर रहें तंदुरुस्त

ढेर सारा पानी पीकर शरीर को हाईड्रेट करते रहना चाहिए। बच्चा अगर 6 महीने से ज्यादा का है, तो उसे भी दिन में कई बार थोड़ा-थोड़ा गुनगुना पानी पिलाएं। गर्भावस्था में प्राणायाम और कसरत करना उतना ही फ़ायदेमंद है, जितना प्रसव (Delivery) के बाद। अदरक और पुदीने की चाय पिएं।

प्रसव के बाद ये 4 उपाय अपनाकर रहें तंदुरुस्त

जनजम कहे हां


  • प्रोटीन, कैल्शियम युक्त पदार्थ
  • सूप, दालें, दलिया
  • अभ्यंग
  • बेली रैपिंग
  • शहद


जननम कहे ना


  • आसानी से न पचने वाला भोजन
  • अचार, खट्टी चीज़ें
  • कच्ची सब्ज़ियां, विनेगर
  • कॉफी, चॉकलेट


सारांश


आयुर्वेद के अनुसार, प्रसव के बाद 6 हफ्ते तक नवप्रसूता और नवजात को विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। इस दौरान नई माँ शरीर, मन और भावनाओं से जूझ रही होती है। अगर प्रसव शल्य क्रिया (सी-सेक्शन) से है, तो उन्हें अपने खान-पान, स्नान, टहलने और सोने के वक्त का ख़ास ख्याल रखने की आवश्यकता है।


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