गर्भावस्था में योग पर आपके सवालों के जवाब

क्या प्रेगनेंसी के दौरान योग करना सुरक्षित है?

यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी प्रेगनेंसी किस स्टेज में है और आप कौन सा योग कर रही हैं। प्रेगनेंसी के अलग-अलग स्टेज में कई योगासन सुरक्षित भी हो सकते हैं और कई योगासनों के साथ रिस्क भी हो सकते हैं। इसलिए बेहतर है कि अपने लिए किसी भी योग का चुनाव करने से पहले अपने डॉक्टर या किसी योग एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। आप उनसे अपने लिए ऐसे योगासनों के बारे में पूछ सकती हैं, जिनसे आपके पैरों और पेल्विक रीज़न को मज़बूती मिले और डिलिवरी के समय होने वाली परेशानी और दर्द में कमी आ सके।
मोटे तौर पर सुखासन, कोणासन, ताड़ासन, वीरभद्रासन, शवासन आदि सुरक्षित माने जाते हैं। इनके अलावा, उज्जायी, भ्रामरी और योगनिद्रा जैसे प्राणायाम भी फायदेमंद माने जाते हैं। लेकिन प्रेगनेंट महिलाओं को कोई भी ऐसा कठिन आसन या प्राणायाम नहीं करना चाहिए, जो आपको थका दे या जिसमें अधिक फुर्ती की ज़रूरीता हो। साथ ही, ऐसे आसन या प्राणायाम बिल्कुल न करें, जिनसे पेट के निचले हिस्सों पर अधिक दबाव पड़ता है। कई विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रेगनेंसी के 10वें से लेकर 14वें हफ्ते तक कोई भी योग नहीं करना चाहिए।

क्या एक प्रेगनेंट महिला योग कर सकती है?

बिल्कुल। प्रेगनेंसी के दौरान नियमित रूप से योग करने से शरीर एक्टिव रहता है और प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली कई समस्याओं जैसे कब्ज, वॉमिटिंग, इनसोमनिया, शॉर्टनेस ऑफ ब्रीद, लिगामेंट पेन आदि से राहत मिलती है। साथ ही, डिलिवरी के वक्त होने वाली परेशानी और दर्द में कमी आती है।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप कोई भी कठिन आसन या प्राणायाम कर सकती हैं। कोई भी आसन या प्राणायाम चुनने से पहले किसी योगा एक्सपर्ट या अपने डॉक्टर से गाइडेंस अवश्य लें। साथ ही अपनी प्रेगनेंसी के स्टेज को अवश्य ध्यान में रखें। प्रेगनेंसी के दौरान ऐसा कोई भी योगासन या प्राणायाम नहीं करना चाहिए, जिससे पेट के निचले हिस्सों पर अधिक दबाव पड़ता है या जिससे आपको थकान महसूस होने लगती है या जिसे करने में अधिक फुर्ती की ज़रूरीता होती है।

क्या प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में योग सुरक्षित है?

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में सुरक्षित तरीके से योग किया जा सकता है, बशर्ते कि इसे आप किसी अच्छे योगा एक्सपर्ट के गाइडेंस में करें, जिसे कि यह मालूम हो कि आप प्रेगनेंट हैं और इस वक्त आप पहली तिमाही से गुजर रही हैं। इसकी वजह यह है कि कुछ आसन ऐसे भी होते हैं, जो यूटरस में खून का प्रवाह रोक सकते हैं, जिससे दर्द हो सकता है, मांसपेशियों में खिंचाव आ सकता है या फिर पेट के निचले हिस्सों पर दबाव डाल सकता है। पहली तिमाही में खड़े रहकर किए जाने वाले कुछ योगासन किए जा सकते हैं क्योंकि इनसे पैरों और पेल्विक रीज़न को मज़बूती मिलती है, शरीर में एनर्जी मिलती है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है।

प्रेगनेंसी के दौरान योग क्यों फायदेमंद है?

प्रेगनेंसी के दौरान आपके शरीर में कई अहम शारीरिक बदलाव होते हैं। योग आपको शारीरिक और मानसिक तौर पर न सिर्फ आराम पहुंचाता है, बल्कि बेहद मज़बूत भी बनाता है। साथ ही, शरीर में लचीलापन भी बरकरार रहता है। योग करने से सांस की दिक्कतें दूर हो जाती हैं। प्रेगनेंसी के दौरान योग करने से तनाव भी दूर होता है और नींद भी अच्छी आती है। इससे सिरदर्द और कमर के निचले हिस्से में होने वाला दर्द भी दूर होता है। साथ ही, समय से पहले प्रसव की आशंका भी कम हो जाती है।
लेकिन हमारी सलाह यह है कि अपने लिए किसी भी योगा एक्टिविटी को करने से पहले अपने डॉक्टर या किसी अच्छे योगा एक्सपर्ट की सलाह ज़रूर लें, क्योंकि कोई गलत आसन चुन लेने या फिर कोई आसन ठीक तरीके से न करने से फायदा होने के बजाय उल्टा नुकसान भी पहुंच सकता है।

क्या प्रसव पूर्व योग वास्तव में डिलीवरी को आसान बनाता है?

योग करने से प्रसव के वक्त बड़ी मदद मिल सकती है। योग करने से आपके शरीर की मांसपेशियां मज़बूत होती हैं और ब्लड फ्लो बेहतर होता है, थकान मिटती है और ऊर्जा प्राप्त होती है, नकारात्मकता खत्म होती है और सकारात्मकता आती है। इसके साथ ही, नींद की दिक्कतें भी दूर होती हैं और आप हमेशा तरोताज़ा महसूस करती हैं। इसलिए यदि आप प्रेगनेंसी के दौरान योग करती हैं, तो प्रसव के दौरान आपको कम तनाव होने के साथ-साथ दर्द का अनुभव भी बहुत कम होता है। योग करने से आपके और गर्भस्थ शिशु के बीच एक आत्मिक संबंध भी विकसित हो जाता है, जिससे आप अपने शिशु को समझने लगती हैं। यह समझ आपके आत्मविश्वास को बढ़ाता है। योग से अपने शरीर पर आपका पूर्ण नियंत्रण रहता है, जो प्रसव के दौरान बहुत काम आता है।

क्या प्रसव पूर्व योग आसान डिलीवरी में मदद करता है?

निश्चित रूप से प्रसव पूर्व योग आसान डिलीवरी में मदद करता है। कई योगासन ऐसे होते हैं, जो प्रेगनेंसी के दौरान आपके शरीर में होने वाले बदलावों को ध्यान में रखकर ही डिजाइन किये जाते हैं। इससे प्रेगनेंसी में आप स्वस्थ रह सकती हैं। ये योगासन आपकी मांसपेशियों को तो मजबूत बनाते ही हैं, साथ ही आपमें स्फूर्ति व ताकत का भी संचार करते हैं, जो प्रसव के दौरान काफी काम आता है। इन योगासनों से आप प्रसव के दर्द को झेलने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार हो जाती हैं, क्योंकि ये योगसान प्रेगनेंसी में आपके सांस लेने से लेकर शरीर की मांसपेशियों की कार्यप्रणाली तक को आपके नियंत्रण में ला देते हैं।

क्या मैं प्रेगनेंसी की पहली तिमाही के दौरान योग कर सकती हूं?

आप प्रेगनेंसी की पहली तिमाही के दौरान योग कर सकती हैं। इस दौरान आपके शरीर के अंदर शिशु को विकसित होने के लिए जो वातावरण तैयार हो रहा होता है, योग करने से वह शिशु के अनुकूल बन जाता है। पहली तिमाही के दौरान शरीर में हार्मोन्स में बदलाव होने के साथ-साथ शरीर में रक्त का प्रवाह भी तेजी से बढ़ता है और आपका ब्लडप्रेशर घटता है, ताकि आपका दिल बढ़े हुए रक्त प्रवाह से अतिरिक्त रक्त को सुरक्षित तरीके से पंप कर सके। इन चीजों से आपका शरीर बुरी तरह से थक जाता है। ऐसे में सुरक्षित तरीके से योग करने से आपको शारीरिक और मानसिक तौर पर बहुत आराम मिलता है।

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प्रेगनेंसी में कौन-सा योगासन सबसे अच्छा है?

प्रेगनेंसी के दौरान इसके अनुसार डिजाइन किये गये कुछ खास प्रकार के योगासन ही करने चाहिए, जिनमें तितली आसन, बिल्ली आसन, वृक्षासन, चक्रासन, मलासन, धनुराषन, वीरासन, ताड़ासन, मत्स्यासन, नटराजासन, भुजंगासन त्रिकोणासन और सुखासन आदि प्रमुख हैं। इन योगासनों को प्रेगनेंसी के अलग-अलग चरणों के अनुसार ही डिजाइन किया गया है। इन योगासनों को करते वक्त इस बात का ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि ये किसी कुशल योग शिक्षक के मार्गदर्शन में ही किये जाएं, ताकि इनसे लाभ मिलने की बजाय कहीं नुकसान न हो जाए।

प्रेगनेंसी के दौरान कौन-से योगासन असुरक्षित हैं?

प्रेगनेंसी के दौरान योग तो करना चाहिए, मगर कुछ ऐसे योगासन भी हैं, जो नुकसानदायक साबित हो सकते हैं और इनसे हर हाल में बचना चाहिए। उछलने वाले किसी भी योग को आपको नहीं करना चाहिए। साथ ही जिनमें आपको अपने शरीर को मोड़ना हो, वैसे आसनों से भी दूर रहना ही उचित है। साथ ही जिन आसनों में आपको पीछे की तरफ झुककर लेटना हो, वैसे आसनों से हर हाल में बचें। गर्भ बढ़ने पर पेट के बल लेटकर किए जाने वाले योगासन भी ठीक नहीं होते। ये आसन आपके लिए और आपके गर्भस्थ शिशु के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं।

प्रसव पूर्व योग कब शुरू करना चाहिए?

यदि आपने प्रेगनेंसी से पहले कभी योग नहीं किया है, तो आपको प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में ही योग की शुरुआत करनी चाहिए। पहली तिमाही एक बहुत ही संवेदनशील दौर होता है। ऐसे में यदि आप सही योगासन नहीं करती हैं, तो इससे आपके शरीर पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है, जिससे कई तरह की जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। हालांकि यदि आप नियमित रूप से योग करती रही हैं, तो आप पहली तिमाही से ही योग की शुरुआत कर सकती हैं, क्योंकि आपका शरीर योगासनों के अनुसार पहले से ही ढल चुका होता है। हालांकि, योग की शुरुआत करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श लेना न भूलें।

प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में कौन-से व्यायाम सुरक्षित हैं?

प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही के दौरान जो व्यायाम आप कर सकती हैं, उनमें सबसे पहला और सबसे साधारण है- रोजाना 30 से 40 मिनट तक टहलना। इससे आपका दिल मजबूत रहता है। चलते वक्त हाथों को हिलाती रहें। बेहद धीमी गति से और पूरी तरह से समतल सतह पर आप जॉगिंग भी कर सकती हैं। सांस लेने से संबंधित योग इस दौरान आपको करने चाहिए। प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही के दौरान आप करीब आधा घंटा तक तैर सकती हैं, जिससे आपको राहत महसूस होती है। शरीर का संतुलन बनाने वाला नटराजासन भी इस वक्त अच्छा माना जाता है। इस अवधि में त्रिकोणासन भी आपके लिए बेहद मददगार साबित हो सकता है। लेकिन कोई भी योग या आसन अपने मन से न करें। इसके लिए किसी अच्छे प्रशिक्षक से ट्रेनिंग और उचित सलाह लें।

मैं अपनी प्रेगनेंसी के योग को कैसे संशोधित कर सकती हूं?

प्रेगनेंसी में अपने शरीर को सुरक्षित रखने और आराम महसूस करने के लिए आप अपने योग को कई तरह से संशोधित कर सकती हैं। जैसे-जैसे प्रेगनेंसी में आपके पेट का आकार बढ़ने लगता है, ताड़ासन में आपके लिए दोनों पैरों को साथ रखकर संतुलन बनाते हुए पंजों के बल पर ऊपर उठना कठिन हो जाता है। ऐसे में आप दोनों पैरों को फैलाकर इस आसन को कर सकती हैं। कुत्तों की तरह झुकने वाला आसन इस दौरान लाभकारी माना जाता है, जिसमें आप अपने दोनों हाथों और पैरों पर भार देकर झुकते हुए अपने शरीर को ऊपर उठा लेती हैं, लेकिन प्रेगनेंसी में इसमें जब तकलीफ शुरू हो जाए तो आप इस आसन में बदलाव करके बच्चों की तरह अपने घुटनों को भी जमीन पर टिका सकती हैं। प्रेगनेंसी योगा में संशोधन या बदलाव के लिए दो बातों का हमेशा ध्यान रखें। एक तो कोई भी योग या आसन जब आपको असहज लगे या करने में परेशानी हो तो उसे न करें। दूसरे प्रेगनेंसी के दौरान कोई भी योग या आसन किसी अच्छे प्रशिक्षक की देख-रेख में ही करना चाहिए।

क्या गर्भवती होने पर सामान्य योग सुरक्षित है?

यदि आप गर्भवती होने से पहले से ही योग करती रही हैं, तो गर्भवती होने के बाद भी आपका योग करते रहना सुरक्षित माना जाता है। लेकिन अब यह जरूरी हो जाता है कि आप योग किसी कुशल योग शिक्षक के मार्गदर्शन में करें, जिसे कि प्रेगनेंसी के दौरान के योगासनों की सही जानकारी हो। इस दौरान सामान्य योग सुरक्षित माने जाते हैं, क्योंकि इनसे आपको शरीर में होने वाले कई बदलावों का सफलतापूर्वक सामना करने में मदद मिलती है। साथ ही सामान्य योग से प्रसव के दौरान भी दर्द कम होने और सुरक्षित प्रसव जैसे लाभ मिलते हैं।

प्रेगनेंसी के दौरान कौन-से योगासन असुरक्षित हैं?

प्रेगनेंसी में योग का उद्देश्य गर्भस्थ शिशु के लिए शरीर में जगह बनाना होता है। इस दौरान आपको अपने शरीर को मोड़ने वाले योगासनों से बचना चाहिए, क्योंकि इससे शिशु के लिए जगह कम हो जाती है। साथ ही इससे शिशु तक पहुंचने वाला रक्त प्रवाह भी प्रभावित होता है। पहली तिमाही के बाद उन योगासनों से आपको दूर रहना चाहिए, जिनमें आपको पीठ के बल लेटना पड़े। साथ ही पीछे झुकने वाले योगासन भी आपको प्रेगनेंसी के दौरान नहीं करने चाहिए, क्योंकि इससे आपके पेट में खिंचाव पैदा होता है, जो शिशु के लिए अच्छा नहीं माना जाता।

क्या मैं प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही के दौरान योग कर सकती हूं?

जी बिल्कुल। अपने डॉक्टर की सलाह और अपने व अपने गर्भस्थ शिशु के विकास की जरूरत को समझते हुए आप प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही के दौरान भी योग कर सकती हैं। बस इस दौरान आपको दूसरी तिमाही के दौरान किये गये बहुत से योगासनों से तौबा करनी पड़ती है, क्योंकि तीसरी तिमाही के दौरान आपके द्वारा कोई भी ऐसा योगासन करना सुरक्षित नहीं माना जाता, जिससे शरीर पर अत्यधिक दबाव पड़े। तीसरी तिमाही के दौरान उचित योगासन करने से आपके शरीर में जरूरी लचीलापन बना रहता है। इससे आप राहत महसूस करती हैं, जिससे शिशु को भी आराम मिलता है। पेट के बल लेटकर कोई योग या आसन इस दौरान न करें। यदि इस चरण से ही आप योग की शुरुआत करने जा रही हैं, तो बेहतर होगा कि इससे पहले अपने डॉक्टर और योग शिक्षक से यह रिपोर्ट ले लें कि कौन-सा योग करना आपके लिए उचित होगा।

तीसरी तिमाही के दौरान कौन-से व्यायाम सुरक्षित हैं?

तीसरी तिमाही के दौरान आपको शुरुआत हाथों को घुमाने वाले व्यायाम से करनी चाहिए। इसमें घड़ी की सुई के घूमने की दिशा में पहले दाएं हाथ को पांच बार और फिर बाएं हाथ को इतनी ही बार घुमाना चाहिए। इसके अलावा आप बैठकर अपने दाएं पैर को मोड़कर फैले हुए बाएं पैर के घुटने पर रखकर और बाएं हाथ से अपने दाएं पैर की एड़ी और दाएं हाथ से तलवे के नीचे पंजे को पकड़कर 10 बार घड़ी की सुई के घूमने की दिशा में घुमा सकती हैं। ऐसा ही आप फिर दूसरे पैर से कर सकती हैं। इस दौरान तितली आसन और अर्ध तितली आसन करना भी उचित माना जाता है।

आपको प्रसव पूर्व योग कब बंद करना चाहिए?

प्रेगनेंसी के करीब 36वें महीने में आपको योगा करना कम कर देना चाहिए। इस दौरान शिशु किसी भी वक्त जन्म लेने वाला होता है। ऐसे में आपको किसी भी तरह का ऐसा आसन नहीं करना चाहिए, जिससे कि शिशु के पोजीशन में किसी भी तरह का बदलाव आ जाए। आपको पैर को ऊपर की ओर उठाने वाले व्यायाम बंद करने के साथ ही शरीर से ब्रिज बनाने जैसे आसन भी अब बंद कर देने चाहिए। इसके अलावा कुत्ते के पोजीशन में जो आकर योग किया जाता है, उसे भी आपको अब रोक देना चाहिए या फिर इसकी संख्या कम कर देनी चाहिए।

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गर्भावस्था महिलाओं के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव होती है। इस समय में हर महिला स्वयं से ज़्यादा अपने होने वाले शिशु के हित के विषय में सोचती है, क्योंकि इस समय का हर एक क्षण शिशु के आने वाले जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। इसीलिए गर्भवती महिलाओं को चाहिए कि वो विशेष प्रकार से अपना ध्यान रखें और हर प्रकार से सुरक्षित रहें।

प्रेगनेंसी का पहला महीना दरसल गर्भधारण करने से भी पहले शुरू होता है। गर्भधारण करने से पहले जो अंतिम पीरियड का पहला दिन होता है, तभी से पहला महीना शुरू होता है और अगले महीने की उसी तारीख तक वो महीना ख़त्म होता है।

गनेंसी के पांचवें सप्ताह में आपका शिशु एक संतरे के बीज के जितना बड़ा होता है। इस समय शिशु के हृदय और सर्कुलेटरी सिस्टम का विकास होता है। इस समय आपके शरीर में हार्मोनल बदलाव होने के कारण आपको घर पर प्रेगनेंसी टेस्ट करने की ज़रूरत महसूस होगी।

प्रेगनेंसी में अधिक जंक फ़ूड खाने से होने वाले शिशु को पौष्टिक आहार नहीं मिल पाता है, जिसकी वजह से उसको गर्भ में ही कई प्रकार की बीमारियाँ हो सकती हैं। सबसे अधिक ख़तरा शुगर और ओबेसिटी का होता है।

प्रेगनेंसी के नौवें सप्ताह में शिशु एक जैतून (ऑलिव) के आकार का होता है। इस समय शिशु की मांसपेशियों का विकास होना शुरू हो जाता है। ऐसे में महिलाओं को बहुत नींद आती है।

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