गर्भावस्था के दौरान सर्वश्रेष्ठ श्वास व्यायाम

हालांकि एक महिला के गर्भवती होने की खबर एक परिवार के लिए बहुत सी खुशियां लेकर आती है, पर यह महिला के लिए कई प्रकार के शारीरिक और मानसिक बदलाव भी लाती है, जिससे कुछ परिशानियाँ हो सकती है। इसके लिए गर्भावस्था में आपको बुद्धिमानी और लगन के साथ कुछ मूल प्रसव पूर्व ली जाने वाले टिप्स का पालन करना पड़ता है। श्वास व्यायाम उनमें से एक बहुत ही लाभदायक उपाए हैं। जननम की सलाह : क्यों करे गर्भावस्था में श्वास व्यायाम?


  • यह मॉर्निंग सिकनेस के निपटने में मदद करता है।
  • यह गर्भावस्था में नींद की परेशानियों को दूर करने में मदद करता है।
  • यह प्रसव पीड़ा को सहने की ताकत देता है।
  • यह आपके शरीर में रक्त का उचित संचालन करके आपको तरोताज़ा महसूस कराता है।


जननम से जानिये : गर्भावस्था के दौरान की जाने वाले कुछ लाभकारी श्वास व्यायाम

 

पेट के द्वारा श्वास व्यायाम या गहरी सांस लेना

श्वास व्यायाम की इस तकनीक में आप अपने डायाफ्राम को पेट के निचले हिस्से में ला कर अपनी छाती को अंदर-बाहर धकेलते हैं। ऐसा करके आप अपने फेफड़ो में अधिक हवा लाने में सक्षम हो पाते हैं। इस व्यायाम से एक गर्भवती महिला अपने स्टैमिना को बढ़ा सकती है।

गर्भावस्था के दौरान सर्वश्रेष्ठ श्वास व्यायाम

प्राणायाम



योग में इस श्वास व्यायाम की खास जगह है क्योकि यह आपकी श्वशन प्रणाली को मजबूत बनाता है। यह एक ऐसा व्यायाम है, जिसमें आप अपनी सांस लेने की प्रकिया में ध्यान केंद्रित करके उसको और भी सशक्त बना सकती हैं। यह एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा को झेलने की ताकत देता हैछाती द्वारा श्वास व्यायाम - इस व्यायाम को आपको पेट के द्वारा किये जाने वाले श्वास व्यायाम में बीच में किया जाना चाहिये। इससे एक गर्भवती महिला अपनी पसलियों और थोरैसिक गुहा पक्षों को आगे पीछे करके अपने शरीर में ऑक्सीजन के प्रवाह को बढ़ा सकती है।गर्भावस्था की कई छोटी-बड़ी शारीरिक व मानसिक तकलीफों को दूर करने में यह श्वास व्यायाम आपकी मदद कर सकते हैं। इन्हे अपनाके आप जननम के साथ एक स्वस्थ गर्भावस्था और मातृत्व की तैयारी कर सकती हैं

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बच्चा परिवार में असीमित खुशियाँ लेकर आता है। ऐसे में अगर आपको जुड़वा बच्चे होने होने की खबर मिले तो खुशियाँ ओर उत्साह दोगुनी ही हो जाती है!

महिलाओं को गर्भधारण के बाद जो सबसे पहली बात ध्यान में रखनी पड़ती है, वो है संतुलित, पोषक और नियमित आहार। गर्भ के पहले तीन महीने शिशु के विकास की दृष्टि से सबसे अधिक महत्वपूर्ण होते हैं

गर्भ धारण करना किसी भी महिला के लिए बहुत ही ख़ुशी का पल होता है । अगर आप कार्यरत महिला हैं तो इस दौरान आपको कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

गर्भाधान और पुंसवन संस्कार के बाद तीसरा संस्कार है सीमन्तोन्नयन संस्कार, जिसे सीमन्तकरण या फिर सीमन्त संस्कार के नाम से भी जानते हैं। जब गर्भ चौथे, छठे या आठवें महीने का होता है, तब यह संस्कार संपन्न किया जाता है।

कुछ समय पहले तक घर में होने वाली किसी भी खुशी को मनाने के लिए गुड़ से मुँह मीठा करने की प्रथा थी। यही गुड़ आज भी बहुत से घरों में खाने के बाद मुखवास के तौर पर खाया जाता है।

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