गर्भावस्था के दौरान और इसके बाद इन आसनों और प्राणायामों से ख़ुद को रखें फिट

प्राणायाम हर किसी के लिये ज़रूरी है। गर्भवती महिलाओं और नयी माताओं के लिए यह इसलिए अहम हो जाता है, क्योंकि इससे जहां तनाव निकल जाता है और शरीर लचीला हो जाता है, वहीं डिलिवरी भी आसानी से होने की संभावना बढ़ जाती है। इतना ही नहीं, प्रसव के बाद ठीक होने में भी ज़्यादा समय नहीं लगता। अगर शरीर पर अतिरिक्त फैट जमा हो जाए, तो वह भी आसानी से निकल जाता है।

प्रेगनेंसी के दौरान खड़े रहने वाले कुछ योगासन पैरों की समस्या के लिए सही माने जाते हैं। इससे पैरों में होने वाली अकड़न व सूजन भी ख़त्म होती है। डिलिवरी के बाद कपालभाति जैसे प्राणायाम बॉडी को पुरानी शेप में लाने में मदद कर सकते हैं।

आसन और प्राणायाम के 7 सामान्य फ़ायदे

  1. विभिन्न आसनों और प्राणायामों से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है।
  2. चिंता और तनाव कम होता है।
  3. अनिद्रा दूर हो जाती है।
  4. शरीर से विषैले तत्व यानी टॉक्सिन बाहर निकलते हैं।
  5. शुगर लेवल भी कंट्रोल रहता है।
  6. लगातार बदलने वाले मूड, मॉर्निंग सिकनेस में फ़ायदा मिल सकता है।
  7. प्रसव के बाद शरीर को पुरानी शेप में लाना आसान हो जाता है।

गर्भवती महिलाओं के लिए 5 आसन (5 Asana during pregnancy)

1. सुखासन (Sukhasana)

मन को प्रसन्न रखने, मूड अच्छा करने, चिंता, अवसाद, क्रोध दूर करने के लिये महिलाएं सुखासन कर सकती हैं।

ऐसे करें यह आसन

भूमि पर बैठें। दोनों पैर सामने और सीधे रखें। पालथी मार कर बैठना उत्तम है। अपनी पीठ को जितना हो सके सीधा रखें। कंधों को थोड़ा ढ़ीला छोड़ें। अब गहरी सांस अन्दर की ओर लें। फिर धीरे-धीरे बाहर छोड़ें। इसे दोहराते रहें।

गर्भावस्था के दौरान और इसके बाद इन आसनों और प्राणायामों से ख़ुद को रखें फिट

2. पर्वतासन (The mountain pose)

पर्वतासन करने से कमर के दर्द में आराम मिल सकता है। शरीर बेडौल नहीं होता, बल्कि लचीला बना रहता है।

ऐसे करें यह आसन

सुखासन की स्थिति में आराम से बैठें। पीठ सीधी होनी चाहिए। सांस को भीतर लेते हुए दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाएं और हथेलियों को नमस्ते की मुद्रा में जोड़ लें। कोहनी सीधी रखें। कुछ समय के लिए इसी मुद्रा में रहें और फिर वापस पुरानी अवस्था में आ जाएं। इस आसन को 3-4 बार दोहराएं।

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3. ताड़ासन (Tadasana)

शुरू के 6 महीनों में ताड़ासन करना अच्छा माना जाता है। गर्भवती महिलाओं के लिए ताड़ासन बहुत ही फ़ायदेमंद है। इससे गर्दन की तकलीफ में आराम आता है और रीढ़ की हड्डी भी मज़बूत होती है।

गर्भावस्था के दौरान और इसके बाद इन आसनों और प्राणायामों से ख़ुद को रखें फिट

4. कोणासन (Konasana)

कोणासन करने से रीढ़ की हड्डी में मज़बूती आती है। ब्लड सर्कुलेशन सही रहता है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

ऐसे करें यह आसन

किसी आसन या चटाई पर खड़े होकर दोनों पैरों के बीच 3 फीट की दूरी बनाएं। दाहिने हाथ को उपर की ओर उठाएं। सांस लें, हथेली को उल्टा करें और दूसरे हाथ को कान के पास ले जाएं। फिर दूसरी तरफ झुकें। दोनों तरफ (दाएं और बाएं) बारी-बारी से 5 बार इसे दोहराएं।

गर्भावस्था के दौरान और इसके बाद इन आसनों और प्राणायामों से ख़ुद को रखें फिट

5. वीरभद्रासन (Veerbhadrasana)

इस आसन से गर्भवती महिला के हाथों, कंधों, जांघों एवं कमर की मांसपेशियों को मज़बूती मिलती है।

गर्भावस्था के दौरान और इसके बाद इन आसनों और प्राणायामों से ख़ुद को रखें फिट

डिलिवरी के बाद के लिए 3 आसन और प्राणायाम (3 Asana and Pranayama after baby birth)

(1) अनुलोम–विलोम (Anulom Vilom)

इस प्राणायाम को 'नाड़ी शोधक प्राणायाम' भी कहते हैं। यह प्राणायाम शरीर के वात, कफ, पित्त दोषों को दूर करने में मददगार माना जाता है। इससे फेफड़े मज़बूत होते हैं। कॉलेस्ट्रोल लेवल नियंत्रित होता है।

ऐसे करें यह प्राणायाम

इस प्राणायाम को शुरू करने के लिये पद्मासन में बैठें। दाहिने हाथ के अंगूठे से नाक के दाएं छिद्र को बंद करें और बाएं छिद्र से सांस अंदर की ओर भरें। फिर वही प्रक्रिया बायीं तरफ से दोहराएं। बार-बार सांस अंदर लेते रहें और बाहर छोड़ते रहें

गर्भावस्था के दौरान और इसके बाद इन आसनों और प्राणायामों से ख़ुद को रखें फिट

(2) कपालभाति (Kapalbhati)

कपालभाति प्राणायाम की मदद से आप अपने शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकाल सकते हैं। ये लिवर और किडनी को बेहतर काम करने लायक बनाता है।

ऐसे करें यह प्राणायाम

कपालभाति के लिए सांसों को बाहर छोड़ें, पेट को अंदर की तरफ खींचें। बार–बार सांस अंदर खींचकर छोड़ते रहें।

गर्भावस्था के दौरान और इसके बाद इन आसनों और प्राणायामों से ख़ुद को रखें फिट

(3) पादहस्तासन (Padhastasana)

पाचन प्रक्रिया को तंदुरुस्त रखने, रीढ़ की हड्डी को मज़बूती देने में इस योग की अहम भूमिका मानी जाती है। यह पेट पर जमा होने वाले फैट को कम करता है।

ऐसे करें यह आसन

दोनों पैरों को सटाकर सीधे खड़े हो जाएं। आगे की ओर झुककर दोनों हाथों को पैरों के बीच में रखकर ज़मीन छूने को कोशिश करें। माथे को घुटने से लगाने का प्रयास करें। इसे कुछ देर दोहराएं।

गर्भावस्था के दौरान और इसके बाद इन आसनों और प्राणायामों से ख़ुद को रखें फिट

जननम कहे हां

  • भ्रामरी प्राणायाम (Bhramari pranayama)
  • योगनिद्रा (Yoga Nidra)
  • विशेषज्ञ की सलाह

जननम कहे ना

  • नौकासन (Naukasana)
  • भुजंगासन (Bhujangasana)

सारांश : प्राणायाम आयुर्वेद का एक ऐसा हिस्सा है, जिससे अनेक समस्याएं ठीक हो सकती हैं। यह हमारे मन को संतुलित करता है और आत्मा को पोषण देता है। गर्भावस्था के दौरान प्राणायाम करने से महिलाओं को बच्चे को जन्म देने में आसानी होती है और वे सुरक्षित रहती हैं।

Summary: Pranayama is a part of Ayurveda which can cure many problems. It balances our mind and nourishes the soul. During pregnancy, pranayama makes it easier for women to give birth to the child and they are safe.

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