गर्भावस्था के दौरान और इसके बाद अपने मुंह और दांतों को ऐसे रखें साफ़

शरीर के बाकी हिस्सों की तरह मुंह की सफ़ाई सबसे अहम होती है। ख़ासकर दांतों को स्वस्थ रखना और मसूड़ों की मज़बूती। गर्भावस्था के दौरान और बच्चे को जन्म देने के बाद मांओं के लिए मुंह की सफ़ाई और भी अधिक ज़रूरी होती है। एक तो उन महिलाओं के अपने स्वास्थ्य के लिए, दूसरे प्रसव के बाद मांएं अक्सर बच्चों को चुम्बन करती हैं, इसलिए भी उनका मुंह साफ़ रहना बेहद ज़रूरी होता है।

तो आइए, आज हम आपको बताते हैं कि किन विधियों से आप अपने मुंह, दांतों और जीभ का ख्याल रख सकती हैं।

तिल के तेल से गरारे करें (Gargle with warm sesame oil)

दांतों और मसूड़ों को ख़ूबसूरत बनाने के लिये गुनगुने शुद्ध तिल के तेल से गरारे करना एक अच्छा आयुर्वेदिक तरीका है। करीब एक मिनट तक इस तिल के तेल को मुंह में रहने दें, फिर इसकी मसाज़ करें। इसके बाद गुनगुने पानी से कुल्ला कर लें। यह दांतों में कैविटी को रोकता है और विज़डम टूथ के दर्द में राहत देने के साथ दांतों की सेंसिटिविटी को भी रोकता है।

गर्भावस्था के दौरान और इसके बाद अपने मुंह और दांतों को ऐसे रखें साफ़

स्क्रैपर से करें जीभ की सफ़ाई (Tongue scraper)

आयुर्वेद में जीभ की सफ़ाई को जिह्वा निर्लेखन कहा जाता है। जीभ सारे स्वाद (मीठा, खट्टा, नमकीन, कड़वा, तीखा) को अच्छी तरह महसूस कर सके, इसके लिये इस पर जमी सफ़ेद परत को हटाना बहुत ज़रूरी है। जीभ की सफ़ाई के बाद हम छह अलग-अलग स्वाद महसूस कर सकते हैं।

जीभ थायराइड, फेफड़ों, दिल, गुर्दे, पेट, और कोलन से भी जुड़ी है। जीभ को स्क्रैप करके आप न केवल स्वस्थ मुंह बनाए रखते हैं, बल्कि इससे विसरा भी तंदुरुस्त रहता है। इसके अलावा, जिह्वा निर्लेखन एमा यानी टॉक्सिन को हटाने में भी मददगार है। इससे मुंह से बैक्टीरिया भी ख़त्म होता है, जिससे मुंह की बदबू से राहत मिलती है।

जो लोग ब्रश की जगह नीम का दातुन इस्तेमाल करते हैं, वे दातुन को ही स्क्रैपर के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं।

गर्भावस्था के दौरान और इसके बाद अपने मुंह और दांतों को ऐसे रखें साफ़

नीम, बबूल वाले टूथपेस्ट (Use herbal toothpaste)

दांतों के लिये फ्लोराइड और बेकिंग सोडा जैसी चीज़ें नुकसानदेह हो सकती हैं। आयुर्वेदिक तरीके से बने टूथपेस्ट यानी हर्बल टूथपेस्ट दांतों की सफ़ाई के लिये बेहतर होते हैं। ये सलाइवा यानी लार को बढ़ाते हैं और कैल्शियम तत्वों को बढ़ाने में मददगार हैं। इससे पाचन प्रक्रिया दुरुस्त होती है। नीम, त्रिफला, दालचीनी, लौंग, बबूल आदि से बने टूथपेस्ट इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

गर्भावस्था के दौरान और इसके बाद अपने मुंह और दांतों को ऐसे रखें साफ़

तिल खाएं (Sesame seeds)

अगर दांतों में किसी तरह की समस्या है, तो शरीर में कैल्शियम, मैगनीशियम और जिंक की कमी है। ज़रूरत है इन्हें कैल्शियम देने की, जिसके लिये अपने खाने में तिल को शामिल कर सकते हैं।

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मुलेठी की जड़ (Muleti root)

आवाज़ स्वस्थ रहे, गले में खराश न हो, इसके लिये मुलेठी की जड़ को चबा सकते हैं। इससे दांत ख़राब होना भी बंद होंगे। क्रेनबेरी का जूस भी दांतों के लिये फायदेमंद माना जाता है। इससे चेहरे पर ताज़गी आती है।

गर्भावस्था के दौरान और इसके बाद अपने मुंह और दांतों को ऐसे रखें साफ़

टी ट्री ऑयल है बेहतर (Tea tree oil)

मुंह की सफ़ाई के लिये पानी और टी ट्री ऑयल की कुछ बूंदों को मिलाएं और फिर मुलायम साफ़ टूथब्रश से इसे दांतों और मसूड़ों पर रगड़ें। इससे मुंह के छालों में भी आराम मिलेगा।

गर्भावस्था के दौरान और इसके बाद अपने मुंह और दांतों को ऐसे रखें साफ़

मसूड़ों में ख़ून आने पर (For bleeding gums)

  • एक कप ऑरेंज जूस में डेढ़ चम्मच प्राकृतिक चीनी और जीरा का एक चुटकी डालकर पिएं। इससे मुंह की कई समस्याएं ठीक होने लगती हैं।
  • मुंह या मसूड़ों में सूजन होने पर हल्दी लगा सकते हैं, इससे राहत मिलती है।
  • मुसब्बर वेरा जेल, नारियल तेल की मसूड़ों पर मालिश करने से आराम आता है।
गर्भावस्था के दौरान और इसके बाद अपने मुंह और दांतों को ऐसे रखें साफ़

मुंह या जीभ में छाले होने पर

  • अगर मुंह में छाले हैं, तो घर में मौजूद शुद्ध शहद को इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • दिन में कई बार हल्दी का कुल्ला करने से आराम मिलता है।
  • तुलसी के पत्ते चबाने का भी लाभ है।
  • मुलेठी के साथ शहद का लेप बनाकर छालों पर लगा सकते हैं।
  • इलायची पउडर को भी शहद में मिलाकर लगाने से लाभ होता है।
गर्भावस्था के दौरान और इसके बाद अपने मुंह और दांतों को ऐसे रखें साफ़

जननम कहे हां

  • आयुर्वेदिक टूथपेस्ट
  • मसूड़ों की मसाज
  • दातुन

जननम कहे ना

  • हार्ड टूथब्रश
  • नॉन-हर्बल टूथपेस्ट

सारांश : आयुर्वेद के अनुसार, जीभ के विभिन्न भाग शरीर के अंगों की स्थिति के बारे में बताते हैं। इसीलिए डॉक्टर और वैद्य मरीजों की जीभ की जांच करते हैं। इसे साफ रखना बहुत जरूरी है। दांत हमारी खूबसूरती का आईना होते हैं। हमें प्राकृतिक तरीकों से उन्हें बचाने की कोशिश करनी चाहिए।

Summary: According to Ayurveda, different parts of the tongue tell about the condition of body parts. That is why doctors and physicians examine the tongue of patients. It is very important to keep it clean. Teeth are a mirror of our beauty. We must try to protect them from natural methods.

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