गर्भावस्था की पहली तिमाही में किये जाने वाले टेस्ट

एक स्वास्थ्य गर्भावस्था और गर्भ में पल रहे शिशु के उचित विकास को सुनिश्चित करने के लिए आपको सही जांच और ठीक देखभाल लेना अत्यंत ज़रूरी है। गर्भावस्था कीपहली तिमाही में किये जाने वाले टेस्ट और जाँच इस दिशा में बहुत लाभकारी होते है। आधुनिक तकनीकों की सहायता से अब डॉक्टर गर्भ में पल रहे शिशु की स्तिथि का सही मुआयना करके सही समय पर उपचार देकर जन्म दोषो के होने की संभावना को कम कर सकते है।


इसी बात की बारीकी को समझते हुए जननम आपके लिए पहले तिमाही में किये जाने वाले कुछ मूल टेस्ट और जांचो की सूचि लाया है।


यूरिन टेस्ट्स या मूत्र जांच - यह एचसीजी के स्तर को मापकर आपकी गर्भावस्था की पुष्टि करने के लिए अपनाया जाने वाला टेस्ट है। इसके साथ की यह गुर्दे संक्रमण, गर्भावस्था के मधुमेह और एल्बमिन (एक तरह का प्रोटीन) के स्तर को मापने में भी लाभकारी है।


ब्लड टेस्ट - यह रक्त के आरएच (रीसस) कारक, एनीमिया, रूबेला (जर्मन खसरा), हेपेटाइटिस बी, सिफिलिस और एचआईवी के परिक्षण के लिए लाभकारी है।


फीटल अल्ट्रासाउंड टेस्ट यह आपकी गर्भावस्था की सही उम्र का पता लगाने, भ्रूण की सही स्तिथि को जानने, एक्टोपिक गर्भावस्था की पहचान करने और प्रसव की सही तिथि को जानने में मदद करता है।


सीवीएस परीक्षण - यह 35 से ऊपर गर्भधारण करने वाली महिलाओ में क्रोमोसोमल असामान्यताओं का पता लगाने के लिए किया जाने वाला एक अहम परीक्षण है। यह परीक्षण कई प्रकार के अनुवांशिक दोष, जैसे डाउन सिंड्रोम, सिकल सेल एनीमिया, सिस्टिक फाइब्रोसिस, हेमोफिलिया, और मांसपेश डिस्ट्रॉफी को जांचने में मदद करता है।


गैर-आक्रामक प्रसवपूर्व परीक्षण (एनआईपीटी) स्क्रीनिंग - यह एक प्रकार का सेल-फ्री भ्रूण डीएनए परीक्षण है जो सिर्फ गर्भावस्था के 10 सप्ताह के बाद ही किया जा सकता है। इस परीक्षण के द्वारा डाउन सिंड्रोम की संभावना का 99% तक अनुमान लगाया जा सकता है।


चूंकि अभी आपका भ्रूण अपनी प्रारंभिक अवस्था में है, तो किसी भी तरह की लापरवाही बरतना आपके और शिशु के लिए खतरनाक हो सकता है। जननम की मानें और अपने डॉक्टर से बात करके यह टेस्ट ज़रूर करवायें। इससे आप अपनी गर्भावस्था का निश्चिन्त होकर आनंद ले पाएंगी। 

सारांश : गर्भवास्था के पहले तिमाही में महिलाओं को अपना विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस अवस्था में समय-समय में जांच करवानी चाहिए, जो बच्चे और मां के लिए लाभकारी होती है । साथ ही डॉक्टर की सलाह लेते रहना चाहिए ।


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अगर आप एक स्वस्थ गर्भावस्था का आश्वासन चाहती हैं तो गर्भावस्था में होने वाली देखभाल में सही टीकाकरण भी शामिल करें। यह आपको गर्भावस्था के दौरान कई प्रकार के संक्रमणों से प्रतिरक्षा प्रदान करके गर्भ के अंदर पल रहे शिशु की अच्छी सेहत और उचित विकास को सुनिश्चित करता है।

हर महिला के लिए प्रेगनेंसी के शुरूआती सिम्प्टम अलग-अलग होते हैं। ज़्यादातर महिलाओं के लिए, यह वह महिना होता है जब आपको पता चलता है कि आप प्रेग्नेंट हैं। इस महीने आपको प्रेगनेंसी के शायद सिर्फ़ दो ही सिम्प्टम दिखेंगे -- पॉज़िटिव प्रेगनेंसी टेस्ट (और पीरियड मिस करना)।

जैसे-जैसे अलग होने वाले सेल के गोले किसी इंसानी शरीर का रूप ले रहे हैं, आपका बच्चा ब्लास्टोसिस्ट से ज़ाइगोट में बदल रहा है। उसी प्रकार, जैसे-जैसे आपका शरीर और दिमाग आपके माँ बनने की नई भूमिका को अपना रहे हैं, वैसे-वैसे आपको भी बदलाव महसूस हो रहे होंगे।

इस स्टेज में डॉक्टर के पास जाकर मेडिकल ट्रीटमेंट करवाने की ज़रूरत है और कोई भी दवाई डॉक्टर के सलाह के बिना नहीं लेनी है। पैप स्मीयर टेस्ट, यूरिन (पेशाब) की जांच, खून की जांच, एचआईवी टेस्ट, ब्लड ग्रूप और हाइपरटेंशन का पता लागाने की ज़रूरत है।

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