पीरियड्स न होने पर भी प्रेग्नेंट होना संभव है?

सवाल : क्या 2 साल तक पीरियड ना होने पर भी प्रेगनेंट होना संभव है?

जवाब : जी हाँ। पीरियड के बिना भी प्रेगनेंट होना संभव है। कुछ महिलाओं को नियमित रूप से पीरियड नहीं आते हैं, इसके बावजूद उनमें अण्डोत्सर्ग (ओव्यूलेशन) होता है। ऐसे में बहुत समय तक पीरियड ना होने के बावजूद भी प्रेगनेंट होना संभव है।

सवाल : एक स्वस्थ जोड़े को कंसीव करने में कितना समय लगता है?

जवाब : यदि जोड़ा 19 वर्ष से 25 वर्ष तक की उम्र का है और वो नियमित रूप से संबंध बनाता है, तो एक महीने में ही प्रेगनेंसी हो सकती है। लेकिन जैसे-जैसे आयु बढ़ती है, प्रेगनेंसी का चांस कम होता चला जाता है। एक सामान्य युवा जोड़े को कंसीव करने में 4 से 6 महीने लग जाते हैं और 80 से 90 प्रतिशत जोड़ों को कंसीव करने में एक साल का समय लग जाता है।

सवाल : कितने समय तक कंसीव करने की कोशिश के बाद डॉक्टर से राय लेनी चाहिए?

जवाब : एक सामान्य युवा जोड़े को कंसीव करने में 4 से 6 महीने लग जाते हैं और 80 से 90 प्रतिशत जोड़े एक साल तक कोशिश करने के बाद कंसीव कर पाते हैं। यदि एक साल तक कोशिश करने के बावजूद आप कंसीव ना कर पाएं, तो डॉक्टर की सलाह लें।

सवाल : प्रेगनेंट होने के लिए तनाव को नुकसानदेह क्यों माना जाता है?

जवाब : हमारे मस्तिष्क में एक ग्रंथि होती है, जिसको हाइपोथेलेमस कहते हैं। हाइपोथेलेमस भूख और भावनाओं को कंट्रोल करता है। यही ग्रंथि आपके अंडाशय (ओवरी) से अंडाणुओं को निकलने के लिए निर्देश देती है। तनाव में होने से इस ग्रंथि पर असर पड़ता है और वह अंडाशय (ओवरी) को निर्देश देने में अक्षम हो जाती है। इसीलिए तनाव को गर्भधारण की प्रक्रिया में नुकसानदेह माना जाता है।

सवाल : किसी महिला के शरीर में कितने अंडाणु मौजूद होते हैं?

जवाब : एक महिला का जन्म अपने सभी अंडाणुओं के साथ होता है। जन्म के समय महिला के शरीर में लगभग एक करोड़ अंडाणु होते हैं। युवावस्था तक ये घट कर आधे रह जाते हैं। युवा हो जाने के बाद महिलाओं के शरीर से हर महीने लगभग 1000 अंडाणु कम होते चले जाते हैं। उनमें से सिर्फ एक ही अंडाणु हर महीने परिपक्व होता है।

सवाल : क्या किसी महिला में अंडाणुओं की कमी हो सकती है?

जवाब : कुछ महिलाएं बहुत कम अंडाणुओं के साथ जन्म लेती हैं। ऐसी महिलाओं को आगे चलकर अंडाणुओं की कमी हो जाती है।

सवाल : यदि अंडाशय (ओवरी) फर्टाइल नहीं हो, तब क्या होता है?

जवाब : अंडाशय (ओवरी) के फर्टाइल नहीं होने से महिला प्राकृतिक तौर पर और अप्राकृतिक तौर पर भी अपने स्वयं के अंडाणुओं से प्रेगनेंट होने में असमर्थ रहती है, क्योंकि अंडाशय (ओवरी) के फर्टाइल ना होने की वजह से अंडाणुओं का स्तर सामान्य से नीचा होता है।

सवाल : क्या छोटे अंडाशय (ओवरी) होने का मतलब इनफर्टिलिटी (प्रजनन अक्षमता) है?

जवाब : महिलाओं के प्रजनन काल में संभावित फर्टाइल अंडाणुओं की संख्या अंडाशय (ओवरी) के आकार पर निर्भर करती है। छोटे अंडाशय (ओवरी) होने से संरक्षित अंडाणुओं की संख्या सामान्य से काफी कम होती है, जिससे महिलाओं को गर्भधारण करने में दिक्कत हो सकती है।

सवाल : क्या उम्र बढ़ने के साथ-साथ अंडाशय (ओवरी) का आकार छोटा होता चला जाता है?

जवाब : रजोनिवृत्ति (मेनोपोज़) के बाद अंडाशय (ओवरी) स्वतः ही सिकुड़ने लगता है। मेनोपोज़ से पहले जहां अंडाशय (ओवरी) का आकार 3 से 4 सेंटीमीटर तक होता है, वही बाद में उसका आकार सिकुड़कर 0.5 से 1 सेंटीमीटर तक रह जाता है।

यह भी पढ़ें : -

आज ही जननम फेसबुक कम्युनिटी को ज्वाइन करें जहाँ\हमारे एक्सपर्ट्स प्रेगनेंसी के हर पहलु पर टिप्स दे रहे है - यहाँ क्लिक करें  जननम आपको सही, सटीक और उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए हमेशा आपके साथ हैं, लेकिन इसी के साथ आपको डॉक्टर से सलाह लेना भी ज़रूरी है।


Other articles related to this

डार्क चॉकलेट हारमोंस को नियंत्रित करके अंडाणुओं एवं शुक्राणुओं को विकसित करते हैं, बशर्ते कि चॉकलेट ...

यदि प्रेगनेंसी के विषय में सोच रही हैं, तो किसी भी प्रकार का नशा ना करें। गर्म तासीर वाले खाद्य पदार...

मेनोपॉज की दो स्थितियां होती हैं, पेरि मेनोपॉज और पोस्ट मेनोपॉज। पेरि मेनोपॉज में ओव्यूलेशन संभव है,...

अगर आप एक स्वस्थ गर्भावस्था का आश्वासन चाहती हैं तो गर्भावस्था में होने वाली देखभाल में सही टीकाकरण ...

आधुनिकता के प्रभाव में आजकल युवतियाँ 35 वर्ष कि आयु के बाद माँ बनने का निर्णय लेने लगी हैं। अनुष्का ...

जेनेटिक काउंसलिंग यानि अनुवांशिक परामर्श व्यक्तियों, परिवारों या जोड़ों को स्वास्थ्य सम्बन्धी जटिलता...

Other articles related to this

डार्क चॉकलेट हारमोंस को नियंत्रित करके अंडाणुओं एवं शुक्राणुओं को विकसित करते हैं, बशर्ते कि चॉकलेट में 70 प्रतिशत कोको हो। लेकिन चॉकलेट का अधिक सेवन आपके दांतों को खराब कर सकता है।

यदि प्रेगनेंसी के विषय में सोच रही हैं, तो किसी भी प्रकार का नशा ना करें। गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्थों का सेवन न करें। अत्यधिक चाय और कॉफ़ी न पिएं। जंक फूड न लें। अपने वजन को नियंत्रण में रखें।

मेनोपॉज की दो स्थितियां होती हैं, पेरि मेनोपॉज और पोस्ट मेनोपॉज। पेरि मेनोपॉज में ओव्यूलेशन संभव है, इसलिए पेरि मेनोपॉज में महिलाएं प्रेगनेंट हो सकती हैं। लेकिन पोस्ट मेनोपॉज में कुदरती रूप से प्रेगनेंट हो पाना संभव नहीं है। इसके लिए IVF उपचार की मदद लेनी पड़ती है।

अगर आप एक स्वस्थ गर्भावस्था का आश्वासन चाहती हैं तो गर्भावस्था में होने वाली देखभाल में सही टीकाकरण भी शामिल करें। यह आपको गर्भावस्था के दौरान कई प्रकार के संक्रमणों से प्रतिरक्षा प्रदान करके गर्भ के अंदर पल रहे शिशु की अच्छी सेहत और उचित विकास को सुनिश्चित करता है।

आधुनिकता के प्रभाव में आजकल युवतियाँ 35 वर्ष कि आयु के बाद माँ बनने का निर्णय लेने लगी हैं। अनुष्का शंकर, मंदिरा बेदी, फराह खान आदि वो महिलाएं हैं, जो इस निर्णय पर अटल रहीं हैं।

जेनेटिक काउंसलिंग यानि अनुवांशिक परामर्श व्यक्तियों, परिवारों या जोड़ों को स्वास्थ्य सम्बन्धी जटिलताओं के विषय में निर्णय लेने में सक्षम बनाने की एक प्रक्रिया है। यह अनुवांशिक या वंशानुगत विकारों और भविष्य की पीढ़ियों को

जननम कम्युनिटी से जुड़ने के फायदे!

Join the #1 global parenting resource and start receiving the following helpful newsletter:

Join the community now!

Fill the following & enjoy perks!

Due Date or child's birthday