क्या चॉकलेट फर्टिलिटी बढ़ाती है?

चॉकलेट को देखते ही बच्‍चे तो बच्‍चे बड़ों के मुंह में भी पानी आने लगता है। क्‍या करें चॉकलेट इतनी टेस्‍टी होती है कि देखते ही खाने को मन करता है। बहुत ज्‍यादा और अक्‍सर चॉकलेट खाने से वजन बढ़ने लगता है यह बात तो हम सभी जानती हैं। लेकिन क्‍या आप जानती हैं कि अगर कंट्रोल और सही तरीके से चॉकलेट खाई जाए तो इसके बहुत सारे फायदे आपकी हेल्‍थ को हो सकते हैं। प्रेगनेंसी से पहले के कुछ ऐसे ही सवालों पर एक्सपर्ट के जवाब पढ़ें।

सवाल : क्या चॉकलेट फर्टिलिटी बढ़ाती है?

जवाब : डार्क चॉकलेट हारमोंस को नियंत्रित करके अंडाणुओं एवं शुक्राणुओं को विकसित करते हैं, बशर्ते कि चॉकलेट में 70 प्रतिशत कोको हो। लेकिन चॉकलेट का अधिक सेवन आपके दांतों को खराब कर सकता है।

सवाल : क्या अधिक बॉडी टेम्प्रेचर प्रेगनेंसी प्रोबैबिलिटी को कम कर सकता है?

जवाब : जी हाँ। बहुत अधिक बॉडी टेम्प्रेचर जहां पुरुषों में शुक्राणुओं को मार सकता है, वहीं महिलाओं में भी फर्टिलिटी को कम करता है। इसलिए ऐसी गतिविधियों से बचें, जिससे बॉडी टेम्प्रेचर बहुत अधिक हो जाए, जैसे- तेज़ गति से दौड़ना, भारी बोझ उठाना, एक बार में बहुत अधिक सीढ़ियाँ चढ़ना आदि। हमेशा कोशिश करें कि आपका बॉडी टेम्प्रेचर सामान्य या इसके आसपास बना रहे। मेडिकल साइंस के हिसाब से सामान्य बॉडी टेम्प्रेचर 98.4 डिग्री फॉरेनहाइट होता है।

सवाल : क्या कंसीव करने के दौरान एक्सरसाइज करना सही है?

जवाब : एक्सरसाइज करना किसी भी रूप में अच्छा होता है। यदि आप प्रेगनेंसी के बारे में सोच रही हैं, तो एक्सरसाइज करने से आपको सहायता मिलेगी। एक्सरसाइज करने से जनन प्रक्रिया आसान हो जाती है। हमारा सुझाव है कि इस दौरान आप हर रोज़ आधे घंटे की सैर और 10 मिनट की स्ट्रेच एक्सरसाइज ज़रूर करें। इस दौरान योग का अभ्यास भी बेहतर रहता है। बस इतना ध्यान रखें कि कोई भी योग या एक्सरसाइज किसी एक्सपर्ट की सलाह से ही करें।

सवाल : क्या गर्भधारण की कोशिश के दौरान दौड़ना ठीक होगा ?

जवाब : गर्भधारण करने की कोशिश करने के दौरान महिलाएं दौड़ सकती हैं, कूद सकती हैं, किसी भी प्रकार का एक्सरसाइज कर सकती हैं और साइकिल भी चला सकती हैं। इससे किसी भी प्रकार का कोई नुकसान नहीं होता है। हां, इनमें से कोई भी काम हद से ज्यादा न करें।

सवाल : प्री-प्रेगनेंसी केयर कब से शुरू होती है?

जवाब : जब आप प्रेगनेंसी के बारे में पहली बार सोचें, तभी से प्री-प्रेगनेंसी केयर शुरू कर देना चाहिए। इस समय से लेकर प्रेगनेंट होने के समय तक किसी अच्छे हेल्थ और फिटनेस केयर प्रोफेशनल की मदद से अपने और अपने साथी के स्वास्थ्य, फिटनेस और लाइफ स्टाइल में सकारात्मक बदलाव लाएं। यहां तक कि यदि आप कुछ महीने बाद प्रेगनेंसी प्लान कर रही हैं, तो भी आपको तत्काल ही प्री-प्रेगनेंसी केयर शुरू कर देना चाहिए। प्री-प्रेगनेंसी केयर और कुछ नहीं, बल्कि खान-पान, लाइफ स्टाइल, रुटीन आदि में सकारात्मक बदलाव लाते हुए अपने स्वास्थ्य का बेहतर ख्याल रखना ही है। याद रखिए, स्वस्थ महिलाएं ही स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती हैं। अगर आप ख़ुद ही हेल्थ प्रॉब्लम्स से जूझती रहेंगी, तो इसका असर आपके होने वाले बच्चे पर भी पड़ सकता है।

सवाल : प्रेगनेंसी से कितना पहले और क्या तैयारी शुरू कर देनी चाहिए?

जवाब : गर्भधारण करने से एक महीना पहले से फोलिक एसिड (400 mcg) की गोली लेनी शुरू कर देनी चाहिए। ऐसा करने से प्रेगनेंसी की उम्मीद 80 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। इसके अलावा, संतुलित और पौष्टिक आहार लेना, फिजिकल फिटनेस के लिए योगा और प्राणायाम करना, स्वच्छ हवा में मॉर्निंग और इवनिंग वॉक करना, सही समय से सोना और सही समय पर जगना, प्रेरक साहित्य पढ़ना, शरीर और मन पर अधिक बोझ न डालना, चिंता और तनाव से दूर रहना, हमेशा प्रसन्न रहना, मन में अच्छे और सकारात्मक विचार लाना, नकारात्मक विचारों से दूर रहना आदि भी काफी मायने रखते हैं।

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पीरियड के बिना भी प्रेगनेंट होना संभव है। कुछ महिलाओं को नियमित रूप से पीरियड नहीं आते हैं, इसके बावजूद उनमें अण्डोत्सर्ग (ओव्यूलेशन) होता है। ऐसे में बहुत समय तक पीरियड ना होने के बावजूद भी प्रेगनेंट होना संभव है।

मेनोपॉज की दो स्थितियां होती हैं, पेरि मेनोपॉज और पोस्ट मेनोपॉज। पेरि मेनोपॉज में ओव्यूलेशन संभव है, इसलिए पेरि मेनोपॉज में महिलाएं प्रेगनेंट हो सकती हैं। लेकिन पोस्ट मेनोपॉज में कुदरती रूप से प्रेगनेंट हो पाना संभव नहीं है। इसके लिए IVF उपचार की मदद लेनी पड़ती है।

अगर आप एक स्वस्थ गर्भावस्था का आश्वासन चाहती हैं तो गर्भावस्था में होने वाली देखभाल में सही टीकाकरण भी शामिल करें। यह आपको गर्भावस्था के दौरान कई प्रकार के संक्रमणों से प्रतिरक्षा प्रदान करके गर्भ के अंदर पल रहे शिशु की अच्छी सेहत और उचित विकास को सुनिश्चित करता है।

आधुनिकता के प्रभाव में आजकल युवतियाँ 35 वर्ष कि आयु के बाद माँ बनने का निर्णय लेने लगी हैं। अनुष्का शंकर, मंदिरा बेदी, फराह खान आदि वो महिलाएं हैं, जो इस निर्णय पर अटल रहीं हैं।

जेनेटिक काउंसलिंग यानि अनुवांशिक परामर्श व्यक्तियों, परिवारों या जोड़ों को स्वास्थ्य सम्बन्धी जटिलताओं के विषय में निर्णय लेने में सक्षम बनाने की एक प्रक्रिया है। यह अनुवांशिक या वंशानुगत विकारों और भविष्य की पीढ़ियों को

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