गर्भावस्था से पहले आहार संबंधी मिथक और तथ्य

जानिये, गर्भावस्था से पहले आहार सम्बन्धी मिथक और तथ्य के बारे में

गर्भावस्था से पहले आहार को लेकर कई प्रकार के मिथक और भ्रांतियां प्रचलित हैं। जहाँ कुछ खाद्य पदार्थों को नजरअंदाज किया जाता है, वहीँ कुछ खाद्य पदार्थों को लेकर यह भी माना जाता है कि ये गर्भवती होने से रोकते हैं, प्रजनन क्षमता को प्रभावित करते हैं और शुरूआती गर्भावस्था में गर्भपात की संभावना बनाते हैं। गर्भधारण के पहले शरीर में संतुलित आहार के साथ सभी पोषक तत्वों का जाना आवश्यक है। ऐसे में किसी मिथक या शक के कारण सही पोषक तत्व वाले खाद्य पदार्थ को नजरअंदाज करना सही नहीं है।

जननम से जानिए, गर्भावस्था से जुड़ खाद्य मिथक और तथ्य

garbhaavastha se pahale aahaar sambandhee mithak aur tathy
मिथक # 1: 

पूर्ण क्रीम दूध कम वसा वाले दूध की तुलना में अधिक पौष्टिक है।

तथ्य: कम वसा (फैट) वाले दूध और पूर्ण क्रीम दूध में एक समान महत्वपूर्ण पोषक तत्व होते हैं, यानि कि दोनों में कैल्शियम, फास्फोरस और प्रोटीन होते हैं। मगर कम वसा वाले दूध में कम कैलोरी और कम संतृप्त वसा होती है जो कि गर्भधारण के पहले सही वजन बनाए रखने के लिए उपयुक्त है। इसलिए पूर्ण क्रीम को स्किम्ड दूध से अधिक पौष्टिक मानना सही नहीं है।

मिथक # 2: 

पपीता, अनानास, नींबू, और केले जैसे फल सेबचना चाहिए क्योंकि वे गर्भपात का कारण बन सकते हैं!

तथ्य: इन खाद्य पदार्थों को खाने से गर्भपात होने का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। ऐसे उदाहरण भी मौजूद नहीं जहाँ यह बात साबित हो। परन्तु भारत में कच्चा पपीता का गर्भावस्था के दौरान सेवन बिलकुल मना किया जाता है। गर्भावस्था के दौरान इसके सेवन से समयपूर्व दर्द और गर्भपात तक हो सकता है।

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मिथक # 3: 

सब्जियों के बदले फलों को खाकर भी काम चलसकता है।

तथ्य: फल और सब्ज़ियों में से कुछ पोषक तत्व समान हैं, लेकिन उन्हें दो अलग-अलग खाद्य समूहों के रूप में माना जाता है और वे एक दूसरे के पूरक नहीं होते हैं। फल और सब्जियों में यौगिक होते हैं जिन्हें फाइटोकेमिकल्स कहा जाता है। फाइटोकेमिकल्स विटामिन या खनिज नहीं हैं लेकिन वे आपको संक्रमण, कोशिका क्षति और बीमारी से बचाने में मदद कर सकते हैं। फलों में पाए जाने वाले फाइटोकेमिकल्स सब्जियों में भिन्न हैं। इसलिए फल और सब्जी दोनों का अपना महत्व है।

मिथक # 4: 

प्रजनन क्षमता बढ़ाने के लिए विटामिन और खनिज सप्लीमेंट लेना जरुरी है|

तथ्य: जब आप स्वस्थ होती हैं, तो आप बिना किसी सप्लीमेंट के गर्भधारण कर सकती हैं। आपके शरीर की पोषण संबंधी आवश्यकताओं को संतुलित भोजन द्वारा अच्छी तरह से से पूरा किया जा सकता है।

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मिथक # 5: 

समुद्री भोजन खाने से गर्भधारण के बाद बच्चे में त्वचा सम्बन्धी समस्या हो सकती हैं।

तथ्य: इस बात का कोई सबूत नहीं है कि गर्भावस्था के दौरान समुद्री भोजन खाने से बच्चे के लिए त्वचा की समस्याएं पैदा हो जाएंगी। समुद्री भोजन प्रोटीन, लौह और जस्ता - पोषक तत्वों का एक अच्छा स्रोत है जो आपके बच्चे के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। सैल्मन, हेरिंग, सार्डिन जैसे गहरे समुद्र की फैटी मछली ओमेगा -3 फैटी एसिड के अच्छे स्रोत भी हैं, जो आपके बच्चे के दिमाग और आंखों के विकास में एक अहम् भूमिका निभाएंगे।

मिथक # 6: 

अंडे, गाय के दूध, सूखे फल और मांस नहीं खाने से गर्भावस्था आसान होगी।

तथ्य: साक्ष्य इस विश्वास का समर्थन नहीं करते हैं कि गर्भावस्था के दौरान इन खाद्य पदार्थों से परहेज करने आपकी गर्भावस्था आसान होगी ।

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मिथक # 7:

 करेला गर्भाशय के संकुचन का कारण बनता है और इसलिए इसे नहीं  खाना चाहिए।

तथ्य: कुछ संस्कृतियों में गर्भनिरोधक / गर्भपात की परंपरागत विधि के रूप में करेले के रस या पेस्ट का उपयोग करना बताया जाता है। हालाँकि, इस बात का कोई सबूत नहीं है कि करेला गर्भधारण के पहले संकुचन का कारण बन सकता है।

 

मिथक # 8: 

गर्भावस्था के दौरान केक खाना सुरक्षित नहीं है।

तथ्य: यदि आपको मधुमेह नहीं है, तो केक खाने में कोई बुराई नहीं है। कई केक अतिरिक्त कैलोरी, चीनी और संतृप्त वसा से भरे होते हैं, और इनमें पोषक तत्व भी कम होते हैं। इसलिए यदि इन्हें कम खाया जाय तो बेहतर है।

 

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मिथक # 9: 

संरक्षित, डिब्बाबंद और जमे हुए खाद्य पदार्थसुरक्षित नहीं हैं।

तथ्य: आम तौर पर पोषक तत्वों और स्वाद के लिए ताजा सामग्री से पके हुए खाद्य पदार्थों को खाना सबसे अच्छा होता है। कैनिंग प्रक्रिया के दौरान विटामिन सी और फोलेट जैसे घुलनशील पदार्थ नष्ट जाते हैं। हालांकि, इनका कोई नुकसान नहीं होता। संरक्षित, डिब्बाबंद और जमे हुए खाद्य पदार्थों को गर्भधारण का प्रयास करते हुए सुरक्षित रूप से उपभोग किया जा सकता है, बशर्ते कि इन्हें बनाने में खाद्य सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन किया गया है।

मिथक # 10: 

सही वजन में आने के लिए डाइटिंग को अपनाया जा सकता है।

तथ्य: गर्भावस्था के दौरान बहुत कम खाना आदर्श नहीं है क्योंकि कम आहार के कारण आपमें पोषक तत्वों की कम हो सकती है, जो आपमें कई स्वास्थ्य समस्याएँ पैदा कर सकती है।

जानकारी ही बचाव है। इसलिए आँख मूँद कर किसी की बात पर विश्वास करने या सालों से चले आ रहे गलत मिथकों पर यकीन करने से बेहतर है कि सही जानकारी जुटाइए। अपने डॉक्टर की सलाह लें और गलत मिथकों से बचें।

सारांश : गर्भधारण के पहले आहार को लेकर कई प्रकार के मिथक और भ्रांतियां प्रचलित हैं। जहाँ कुछ खाद्य पदार्थों को नजरअंदाज किया जाता है, वहीँ कुछ खाद्य पदार्थों को लेकर यह भी माना जाता है कि ये गर्भवती होने से रोकते हैं, प्रजनन क्षमता को प्रभावित करते हैं और शुरूआती गर्भावस्था में गर्भपात की संभावना बनाते हैं। गर्भधारण के पहले शरीर में संतुलित आहार के साथ सभी पोषक तत्वों का जाना आवश्यक है।

Summary : There are multiple myths about eating while you are trying to get pregnant. Surprisingly, most of these myths are false and are not backed by any scientific evidence. It’s always advisable to consult your doctor before believing in any such myths.

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