प्राचीन भारत का मेडिकल साइंस है आयुर्वेद, जिसके सामने आज नतमस्तक है दुनिया

संभवतः आयुर्वेद इस धरती का सबसे पुराना मेडिकल साइंस है। लेकिन विकास की दौड़ में भारत के पीछे होने की वजह से दुनिया ने इस ज्ञान को चुराया तो बहुत, लेकिन इसे स्वीकार्यता देने में हमेशा संकोच किया। लेकिन अब भारत की बढ़ती ताकत के साथ ही दुनिया आयुर्वेद की महत्ता को स्वीकार करने पर विवश हुई है। शायद यही वजह है कि लोग एक बार फिर से आयुर्वेद की ओर लौट रहे हैं, मगर नये तरीके से। वैसे तो आयुर्वेद और कुछ नहीं, बल्कि जड़ी-बूटियों और घरेलू उपयोग में आने वाली सामग्रियों में छिपा हुआ इलाज ही है, किंतु आज के व्यावसायिक युग में कंपनियों ने इसे ब्रांड का रूप दे दिया है।

आयुर्वेद का इतिहास (History of Ayurveda)

ऋगवेद, जिसके बारे में बताया जाता है कि इसकी रचना करीब तीन हजार साल से 50 हजार साल पहले हुई होगी, उसमें भी आयुर्वेद का जिक्र मिलता है। इससे साबित होता है कि आयुर्वेद कोई आज की चीज नहीं है। साथ ही हमारा और इसका नाता युगों-युगों से रहा है। ऐसी मान्यता है कि दक्ष प्रजापति के शरीर में बकरे का सिर जोड़ने वाले अश्विनी कुमार आयुर्वेद के आचार्य थे। सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी से अश्विनी कुमार, अश्विनी कुमार से इंद्र, इंद्र से धनवंतरि, धनवंतरि से काशी के राजा दिवोदास, दिवोदास से सुश्रुत ने आयुर्वेद की बारीकियां सीखीं। अत्रि, भारद्वाज, अगस्त और चरक आदि महर्षियों का भी आयुर्वेद में उल्लेखनीय योगदान रहा है।

आयुर्वेद का आधार स्तंभ और वेदों से नाता (Baseline of Ayurveda and its connection with the Vedas)

चरकसंहिता को आयुर्वेद का आधार स्तंभ माना गया है। दरअसल अग्निवेश ने इस संहिता का निर्माण किया था, जिसका प्रतिसंस्कार चरक के करने की वजह से इसका नाम चरकसंहिता पड़ा था। धनवंतरि ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि ब्रह्मा ने ही आयुर्वेद का प्रतिपादन किया था। वेद जिन्हें कि मानव सभ्यता का मार्गदर्शन करने वाला माना गया है, उनमें भी आयुर्वेद का उल्लेख है। ऋगवेद में आयुर्वेद के उद्देश्य से लेकर औषधियों से मिलने वाले लाभों, जलचिकित्सा, शल्यचिकित्सा, विषचिकित्सा से लेकर वशीकरण तक का जिक्र है। ऋगवेद हमें 67 औषधियों की जानकारी देता है। उसी तरह से यजुर्वेद में भी 82 औषधियों की जनकारी मिलती है। सामवेद में भी कई बीमारियों का इलाज बताया गया है। अब जहां तक अथर्ववेद की बात है, तो इसे तो आयुर्वेद का आधार ही माना गया है, क्योंकि इसमें आयुर्वेद से जुड़े कई विषयों के बारे में विस्तार से बताया गया है।

घरेलू उपचार के साथ ऐसे काम करता है आयुर्वेद (This is how Ayurveda works with home remedies)

आयुर्वेद की खासियत यह है कि यह केवल इलाज ही नहीं करता, बल्कि यह भी सिखाता है कि जिंदगी को जीते कैसे हैं? हमारे शरीर के भीतर तीन तत्वों वात, पित्त और कफ का संतुलन बहुत ही जरूरी है, जिससे बीमारियां हमारे शरीर से दूर रहती है। आयुर्वेद यही संतुलन बनाकर काम करता है। यदि आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होगी, तो बीमारियां आपके आसपास भी नहीं फटकेगी। आयुर्वेद दरअसल इसी क्षमता को विकसित करने में योगदान देता है। घरेलू उपचार, आहार में बदलाव, मालिश, ध्यान, जड़ी-बूटियों वाले उपचार के साथ मिलकरआयुर्वेदिक दवाईयां असर दिखाती हैं।

प्राचीन समय में आयुर्वेद (Ayurveda in ancient time)

ऋषि-मुनियों ने आयुर्वेद को अपनाया था। प्राचीन काल में हमारे पूर्वजों ने भी इसे ही अपनाया था। प्राचीन समय से ही आयुर्वेद को इसलिए भी अपनाया गया, क्योंकि इसका किसी भी तरह का साइड इफैक्ट नहीं है। इससे लोग न केवल निरोगी होते थे, बल्कि उनकी आयु भी लंबी हुआ करती थी। सौ साल तक तो लोग आसानी से जी लेते थे। दांत मजबूत होते थे। अधिक उम्र होने तक बालों का रंग काला ही रहता था। 

वर्तमान में आयुर्वेद (Ayurveda today)

एलोपैथिक दवाओं के कुप्रभाव सामने आने के बाद आज लोगों का भरोसा फिर से आयुर्वेद में बढ़ने लगा है। वे जड़ी-बूटियों से लेकर घरेलू उपचार को अधिक महत्व दे रहे हैं। यही वजह है कि पश्चिमी देशों ने भी आयुर्वेदिक दवाइयों का पेटेंट करना शुरू कर दिया है। यह बात जरूर है कि आयुर्वेदिक औषधियां थोड़ी देर से असर दिखाना शुरू करती हैं, लेकिन उनका असर स्थायी होता है और इनका कोई दुष्प्रभाव भी नहीं होता। अब तो आयुर्वेदिक दवाइयां गोलियों से लेकर इंजेक्शन के रूप में भी मिलने लगी

हैविज्ञान और आयुर्वेद (Science and Ayurveda)

आयुर्वेद में दवाइयों को बनाने के तरीके इतने सरल हैं कि बिना जानवरों पर प्रयोग किए भी शोधकर्ता इसके इस्तेमाल को मंजूरी दे रहे हैं। आयुर्वेद की प्रक्रिया पूरी तरह से वैज्ञानिक है, क्योंकि इन दवाइयों को आयुर्वेदिक ग्रंथों में वर्णित विधि के अनुसार तैयार किए जाने पर ही वांछित लाभ मिलता है।

सारांश : कहते हैं कि इस संसार के रचयिता ब्रह्मा जी ने स्वयं आयुर्वेद को दुनिया के सामने पेश किया था। आयुर्वेद का विवरण वेदों में भी पाया जा सकता है। आधुनिक एलोपैथिक दवाओं के साइड इफैक्ट और अन्य कुप्रभावों को देखते हुए आज एक बार फिर से आयुर्वेद की स्वीकार्यता तेज़ी से बढ़ी है और अब अनेक पश्चिमी देश भी इसमें दिलचस्पी लेने लगे हैं। यहां तक कि वे अनेक आयुर्वेदिक दवाओं का पेटेंट भी करा रहे हैं।

Summary: It is said that Brahma ji, the creator of this world himself presented Ayurveda to the world. Details of Ayurveda can also be found in Vedas. Given the side effects of other allopathic medicines and other bad effects today, once again the acceptance of Ayurveda has increased rapidly and now many Western countries are also interested in it. Even he is also patenting many Ayurvedic medicines.

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