बच्चों में उदरशूल क्यों होता है? कारण, लक्षण और उपचार

कहते हैं बच्चों की हँसी में एक माँ को प्रकृति की सुंदरता दिखाई देती है। लेकिन जब माँ का नवजात शिशु रोता है तब यही माँ उसका रोना बंद करने के लिए हर संभव उपाय व प्रयास करती है। अगर इसके बाद भी बच्चा लगातार लंबे समय तक रोता रहे तो इसे पेट दर्द या उदरशूल होना माना जा सकता है। नन्हें बच्चों में उदरशूल क्यों होता है और इसके किस प्रकार दूर किया जा सकता है, इन सवालों के जवाब जननम आपको देने का प्रयास करते हैं।

जननम से जानिए : बच्चों में उदरशूल के कारण और इसके घरेलू उपचार:

बोलना शुरू करने से पहले छोटे बच्चे अपनी खुशी और तकलीफ को हँसी और रोने के माध्यम ही व्यक्त करते हैं। कोई भी माँ तब परेशान हो जाती है जब उसका नन्हा शिशु बिना रोके लगातार रूप से रोता रहता है। ऐसा प्रायः तब होता है जब बच्चा उदरशूल या पेट के दर्द से परेशान होता है।
उदरशूल के लक्षण:

  1. नवजात शिशु के पेट में उदरशूल की जांच आप निम्न लक्षणों के आधार पर कर सकतीं हैं:
  2. बच्चे का हर समय गुमसुम रहना और दोपहर बाद या शाम के समय अधिक और अनियंत्रित रूप से रोते रहना;
  3. रोते हुए बच्चे का चेहरा लाल हो जाना;
  4. रोते हुए बच्चे का अपनी टाँगे पेट की ओर ले जाना और धनुष के आकार में करते हुए मोड़ लेना

उदरशूल के कारण:

सामान्य रूप से नवजात बच्चों के पेट में दर्द या उदरशूल का कोई व्यक्त या ज्ञात कारण नहीं होता है। फिर भी निम्न कारणों को उदरशूल होने का जिम्मेदार माना जा सकता है:

  1. नवजात शिशु को दूध की असहिष्णुता (दूध हजम न होना)
  2. किसी प्रकार की एलर्जी का होना
  3. पाचन तंत्र का विकसित होना

उदरशूल का घरेलू उपचार:
शिशु को उदरशूल होने पर पारंपरिक घरेलू उपचार अधिकतर कारगर सिद्ध होते हैं, निम्न उपायों को आप भी आज़मा कर देख सकतीं हैं:
हींग का लेप:
नवजात शिशु की नाभि-क्षेत्र से गर्भनाल जब पूरी तरह हट जाती है तब यदि वह पेट दर्द से रो रहा है तब हल्का गर्म करके हींग का लेप किया जा सकता है। इसके लिए एक चम्मच सहने लायक गर्म पानी में पीसी हुई हींग को घोलकर उसका लेप लगाया जा सकता है। इससे अक्सर बच्चों के पेट दर्द में आराम आ जाता है।
नाभि में सरसों का तेल:
अकसर परिवार की बुजुर्ग महिलाएं नवजात शिशु के पेट दर्द को दूर करने के लिए गुनगुने सरसों के तेल की नाभि में मालिश भी करती हैं।
पेट की सिंकाई:
अगर एक छोटे रुमाल में थोड़ी सी अजवायन की पोटली बना कर उसे सहने लायक गर्म कर लें और उससे पेट की सिकाई करके पेट दर्द से रोते बच्चे को हँसाया जा सकता है।
अजवायन का पानी:
नवजात बच्चे के पेट दर्द को दूर करने के साथ ही स्तनपान करवाने वाली माँ को अजवायन और सौंफ का पानी भी पीने को दें। यह पानी नवप्रसूता की पाचन शक्ति को ठीक रखती है और नवजात को पेट दर्द की शिकायत होने की संभावना कम हो जाती है।

उदरशूल की तकलीफ से होने वाला नुकसान केवल इतना है की इससे बच्चा इतना रोता है कि उसके माता-पिता के आँसू भी आ सकते हैं। इसलिए जब भी आपको लगे कि आपका नन्हा चिराग पेट में दर्द के कारण रो रहा है तो ऊपर लिखे उपायों के साथ ही आप निम्न प्रयास भी जारी रखें:

  1. रोते बच्चे को कंधे से लगाकर उसे डकार दिलवाने की कोशिश करें;
  2. अगर संभव हो तब उसे अपनी गोद में उलटा लिटाकर हल्के हाथ से पीठ को थपथपाएँ;
  3. रोते बच्चे को हँसाने के लिए अगर आपको जोकर जैसी शक्लें और आवाजें निकालनी पड़ें, तो तुरंत करें। बिना फीस दिये किए जाने वाला यह शर्तिया इलाज है।

“घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूँ कर लें, किसी रोते हुए बच्चे को हँसाया जाए” निदा फ़ाजली के इस शेर को याद करके पेट दर्द से बच्चे को निश्चिंत कर हँसाने का प्रयास करें।

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