शिशु की मालिश के विभिन्न प्रकार क्या हैं?

मालिश एक ऐसा आनंददायी प्रक्रिया है जो न सिर्फ आपके शिशु को आराम देती है, बल्कि उसके स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाती है।

अपने शिशु की मालिश करने का एक अच्छा समय है जब वह जाग रहा हो और सहज हो। यदि आपका बच्चा चुपचाप सतर्कता से और आसपास के माहौल में रूचि दिखा रहा है, तो इसका मतलब है कि वह आपके साथ बातचीत करने के लिए तैयार है। स्नान के बाद, सोने और खाने से पहले, इसे अपने बच्चे की दिनचर्या का हिस्सा बनाना बेहतर है। सोने से पहले एक मालिश दिन के उत्तेजना के बाद बच्चे को आराम देता है और वह अच्छी नींद ले पाता है।

साधारनतया, एक बच्चे की हर दिन कम से कम एक बार मालिश होनी चाहिए। कुछ लोग पहले तीन महीनों के लिए दिन में दो या चार बार भी इसे करते हैं। लेकिन शिशु की मालिश करने की कोई आदर्श संख्या नहीं है। आप कितनी बार मालिश करते हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपके पास कितना समय है और आपका बच्चा मालिश का कितना आनंद लेता है। अगर आपका बच्चा दिन में एक बार भी मालिश का आनन्द ले पात है, तो भी वह मालिश के प्रभावों से लाभान्वित होता है।

हालाँकि शिशु की मालिश एक सामान्य अभ्यास है और इसके कोई परिभाषित प्रकार नहीं हैं, फिर भी कुछ सामान्य तकनीकों और विकल्पों के चयन के आधार पर इसे कुछ तकनीकों में बांटा जा सकता है।

जननम से जानिए : शिशु की मालिश के विभिन्न प्रकार

तेल वाली मालिश

शिशु की मालिश के विभिन्न प्रकार क्या हैं

शिशु की मालिश तेल के बिना भी हो सकती है। मगर इनका प्रयोग शिशु और आपके आराम के लिए आवश्यक होता है। इससे जहाँ एक ओर आपका हाथ सही तरीके से फिसलता है, वहीं दूसरी ओर यह बच्चे में सही संवेदनाएं जगा पाता है। विशेषज्ञों के अनुसार नारियल का तेल, तिल का तेल, सरसों का तेल, जैतून का तेल, कैमोमाइल तेल, चाय के पेड़ का तेल, कैलेंडुला तेल, कास्टर तेल इत्यादि कुछ तेल शिशु की मालिश के लिए बेहतर होते हैं।

कई बार शिशु हाथ या पैर को मुंह में ले लेता है। इसलिए यह ध्यान रखें कि उन्हीं तेल का इस्तेमाल करें जो मुंह में जाने पर नुकसान ना करे।शिशु की त्वचा अभी भी विकसित हो रही होती है, इसलिए वैसे ही तेल चुनें जो बच्चे की त्वचा के लिए सबसे उपयुक्त हैं।

रोलिंग मालिश

आप अपने शिशु को हलके रोलिंग मसाजर से भी मालिश दे सकती हैं। ध्यान रखें कि इसका दबाव हल्का हो और शिशु इससे असहज न हो। जननम की सलाह है की आप ऐसे किसी मसाजर का उपयोग करने से पहले अपने डॉक्टर का परामर्श अवश्य लें।

साइकिल और तितली मालिश

एक और प्रकार है जिसे “साइकिल एंड तितली” कहा जाता है। इसमें अपने शिशु को उसकी पीठ के बल लेटाते हुए, धीरे-धीरे उसके पैरों या एड़ियों को पकड़ें और उन्हें साइकिल की तरह हलके-हलके घुमाएं। इसके बाद आप शिशु की तितली की तरह हाथों को फैलाते हुए मालिश करें

मालिश के दौरान, अपने बच्चे की नापसंद या असुविधा के संकेतों पर नजर रखें। अगर वह अपने शरीर को कठोर बनाता है, चेहरे पर असहज भाव बनाता है, या रोता है, तो मालिश का तरीका बदल कर देखिये।

शुरुआत में यह प्रक्रिया मुश्किल लग सकती है, मगर जैसे-जैसे आप इसकी अभ्यस्त होती जाएँगी, यह आपको आसान लगने लगेगा और आपका शिशु भी इसका आनंद लेना शुरू कर देगा।

मालिश के अनेक फायदे हैं, मगर फिर भी इसकी शुरुआत करने के पहले अपने डॉक्टर की सलाह अवश्य लें। आपकी डॉक्टर सही समय और शिशु के लाभ को ध्यान में रखकर आपको सही परामर्श दे सकती है।

शिशु की मालिश के विभिन्न प्रकार क्या हैं

सारांश : नियमित शिशु की मालिश देखभाल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे कई तरीके हैं जिनसे आप अपने बच्चे की मालिश कर सकते हैं जिसमें तेल मालिश, रोलिंग मालिश और साइकिल और तितली मालिश शामिल हैं। मालिश की शैली के साथ अपने बच्चे के आराम पर विचार करना महत्वपूर्ण है और यदि आप ध्यान दें कि एक तकनीक आपके बच्चे को असहज बना रही है, तो इसे बदलने और अपने बच्चे के डॉक्टर से परामर्श करने का प्रयास करें।

Summary: Regular baby massage is an important part of care. There are many ways that you can massage your baby including oil massage, rolling massage and bicycle and butterfly massage. It is important to consider your child's comfort with the style of massage and if you notice that a technique is making your child uncomfortable, try to change it and consult your child's doctor.

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