बच्चों की त्वचा और बाल का ऐसे रखें ख्याल

जननम से जानें, बच्चों की त्वचा और बाल का कैसे रखें ख्याल

मौसम में आए बदलाव और हल्की ठंड के कारण बसंत ऋतु में शिशु की त्वचा पर कई तरह के प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकते हैं, जिनमें सबसे प्रमुख है त्वचा का रुखी होना और खुजली होना। इससे शिशु एकदम बेचैन हो जाता है। अपने शिशु को इससे बचाने के लिए आपको कुछआयुर्वेदिक और घरेलू नुस्खों का पालन करना चाहिए। 

6 माह से एक साल तक के शिशु का ऐसे रखें ख्याल

बच्चों की त्वचा और बाल का ऐसे रखें ख्याल
  1. यदि आपका शिशु 6 माह से एक साल के बीच का है, तो उसे आपको अपने दूध के अलावा फाॅर्मूला मिल्क भी देना चाहिए। इसमें नैन और लैक्टोजन आदि शामिल हैं।
  2. आधा बादाम और आधा काजू पीसकर रोजाना आपको अपने शिशु को खिलाना चाहिए। आप चाहें तो धीरे-धीरे इसकी मात्रा बढ़ा भी सकते हैं।
  3. इस बात का ध्यान रखें कि आपक शिशु की त्वचा सूखी रहे। अन्यथा उसे रैशेज हो सकते हैं। यही वजह है कि उसका डायपर्स बदलते रहना जरूरी है।

4. यदि आपको अपने शिशु के स्किन पर रैशेज दिख जाएं, तो आॅलिव आॅयल या नारियल का तेल जरूर लगाएं। इससे उसे आराम मिलेगा और उसकी खुजली भी दूर होगी।

5. वसंत में आप अपने शिशु को छोटे चम्मच से आधा चम्मच च्यवनप्राश भी खिला सकते हैं, क्योंकि इससे उनकी प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और ठंड का उन पर असर नहीं होता।

एक से दो साल तक के बच्चे का ऐसे रखें ख्याल

  1. ध्यान रखें कि आपको अपने शिशु को खुद से एक कपड़ा अधिक पहनाना है। यदि आप एक कपड़ा पहन रहे हैं, तो उसे आप दो कपड़े पहनाएं।
  2. अधिक ठंड होने पर आपको उसे टोपी भी पहनानी है। आप चाहें तो उसे हुड वाला जैकेट भी पहना सकती हैं।
  3. शिशु के हाथों को हो सके तो ग्लव्स पहनाकर कवर कर दें, ताकि उसके नाखून से उसे स्क्रैच न लगे। इस तरह से उसकी त्वचा सुरक्षित रहेगी।
  4. लहसुन, नमक, काली मिर्च और ऑलिव ऑयल को तुलसीके पत्ते के लेप के साथ मिलाकर अपने शिशु को लगाएं। इससे उसकी त्वचा वसंत में भी सुंदर बने रहेगी।
  5. मालिश करते वक्त सुगंधित तेल का इस्तेमाल न करें। इससे एलर्जी और खुजली होने की आशंका बढ़ जाती है। बेहतर होगा कि सरसों के तेल से ही उसकी मालिश करें।

 

 

बच्चों की त्वचा और बाल का ऐसे रखें ख्याल

जननम कहे ‘हां’

  • शिशु के सिर, पैर और कानों को ढक कर ही रखें तो बेहतर होगा।
  • शिशु को वहीं नहलाएं, जहां हवा नहीं पहुंचे।
  • शिशु की मालिश हमेशा नीचे से ऊपर की ओर ही करें।

बेहतर होगा कि शिशु को सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक धूप में थोड़ा खेलने दें। इस दौरान लगातार उनके साथ रहें।माॅइस्चराइजर या अच्छी क्रीम से शिशु की त्वचा को माॅइस्चराइज करके रखें।

जननम कहे ‘ना’

  • साबुन संक्रमण पैदा कर सकता है। इसलिए नहलाते वक्त उन्हें साबुन न ही लगाएं तो बेहतर होगा।
  • देर रात शिशु को खाने की आदत न डालें। अधिकतम साढ़े 10 से 11 बजे तक उसे अंतिम आहार दे दें।
  • शिशु को बिना मौसम वाली सब्जियां और फल खाने को न दें।
  • वसंत में तो शिशु को केला, दही और चावल बिल्कुल भी न खिलाएं।
  • बिना हाथ धोएं शिशु को न ही छूएं तो बेहतर होगा। अन्यथा उन्हे संक्रमण हो सकता है।

सारांश : यदि आप बसंत ऋतु में अपने शिशु या बच्चे की त्वचा की ठीक तरह देखभाल नहीं करती हैं, तो उन्हें त्वचा संबंधी कई परेशानियां हो सकती हैं। इसलिए उनके खान-पान और पहनावे-ओढावे का उचित ख्याल रखने के साथ ही इस बात को भी ध्यान में रखें कि उन्हें त्वचा-संबंधी कोई परेशानी होने पर बाज़ार में बिकने वाले केमिकल-युक्त उत्पादों की बजाय आयुर्वेदिक विधियों से तैयार घरेलू उपचारों का सहारा लें।

Summary: If you do not take proper care of your baby or baby's skin in the spring, they may have many skin problems. So while taking proper care of their food and clothing, keep in mind that if they have any skin-related problems, they resort to home remedies prepared with Ayurvedic methods rather than chemical-containing products sold in the market. Take it.

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