पोस्टपर्टम डिप्रेशन क्या है और क्यों होता हैं?

जिस नन्ही सी जान का माँ को नौ महीने बेसब्री से इंतज़ार था, आखिर वो इस दुनिया में आ ही गया। उस प्यारे से, नन्हे से बच्चे के आने से तो माँ के मन में केवल ख़ुशी की तरंगे लहरनी चाहिए! तो फिर नई माँ को हो रही यह गंभीर उदासी क्या हैं? इसे पोस्टपर्टम डिप्रेशन कहा जाता है। बच्चे के जन्म के बाद आपके जीवन में एक आधारभूत परिवर्तन आता है और आपको कई प्रकार के नए अनुभव होते हैं। कई महिलाओं के लिए यह चिंता और अवसादका कारण भी बन जाता है। नई जिम्मेदारियों के कारण कई मानसिक और शारीरिक उतार-चढ़ाव आते हैं, जिससे डिप्रेशन या गंभीर उदासी की सम्भावना पैदा हो जाती है। आधुनिक दौर में यह समस्या काफ़ी तेजी से बढ़ रही है।

पोस्टपर्टम डिप्रेशन क्या है और क्यों होता हैं

पोस्टपर्टम डिप्रेशन कब होता है?



पोस्टपर्टम डिप्रेशन गर्भावस्था के दौरान या बच्चे के जन्म के एक वर्ष बाद तक शुरू हो सकती है। यह एक मानसिक बीमारी है जो आपके सोचने, महसूस करने, या कार्य करने के तरीके को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। हालाँकि, शुरुआत में पोस्टपर्टम डिप्रेशन और सामान्य तनाव व थकावट के बीच स्पष्ट अंतर को बता पाना मुश्किल होता है। गर्भावस्था के दौरान या उसके बाद थकावट, उदासी या निराशा की भावनाओं का अनुभव करना असामान्य नहीं है, लेकिन अगर भावनाएं आपको अपने दैनिक कार्यों को करने से रोकती हैं, तो यह पोस्टपर्टम डिप्रेशन का संकेत हो सकता है।

पोस्टपर्टम डिप्रेशन के लक्षण और संकेत 


  • बिना किसी कारण के चिड़चिड़ा हो जाना या गुस्से में रहना
  • आवश्यकता से अधिक मूडी हो जाना
  • किसी भी काम पर ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई
  • किसी भी काम को करने में आनंद नहीं आना
  • अस्पष्ट दर्द, पीड़ा या बीमारी का अहसास
  • अनियंत्रित भूख या खाने की अनिच्छा
  • गर्भावस्था के बाद भी लगातार वज़न बढ़ना
  • आत्म-नियंत्रण की कमी महसूस करना
  • बिना कारण अत्यधिक रोना
  • थकान महसूस होना और आराम करने के बाद भी नींद न आना
  • अपने आस-पास के लोगों, यहां तक ​​कि दोस्तों और परिवार से भी बचना
  • अपने बच्चे के बारे में अत्यधिक चिंता करना या बच्चे की देखभाल करने में कोई दिलचस्पी नहीं लेना
पोस्टपर्टम डिप्रेशन क्या है और क्यों होता हैं

पोस्टपर्टम डिप्रेशन के 4 प्रमुख कारण



1. भावनात्मक अस्थिरता

गर्भावस्था के दौरान और उसके बाद की स्वास्थ्य समस्याओं के कारण बीमारी, सामाजिक अलगाव, या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से तनाव संभव है, जिसके कारण भावनात्मक अस्थिरता आ सकती है। इसके कारण पोस्टपर्टम डिप्रेशन पैदा हो सकता है।


2. हार्मोनल परिवर्तन

गर्भावस्था के दौरान या प्रसव के बाद हार्मोनल परिवर्तन अनुभव किया जाता है। गर्भावस्था के समय, प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजेन हार्मोन के स्तर सामान्य से अधिक होते हैं। डिलीवरी के बाद यह स्तर अचानक सामान्य हो जाता है। इस अचानक हुए परिवर्तन से डिप्रेशन हो सकता है।


3. स्वयं की उपेक्षा

अपर्याप्त आहार, नींद में कमी, नशीली दवाओं के दुरुपयोग और थायरॉइड हार्मोन के कम स्तर जैसे शारीरिक कारक भी पोस्टपर्टम डिप्रेशन का कारण बन सकते हैं।


4. आनुवांशिक बीमारी

परिवार में मानसिक स्वास्थ्य बीमारी का इतिहास होने से भी पोस्टपर्टम डिप्रेशन हो सकता है।

पोस्टपर्टम डिप्रेशन क्या है और क्यों होता हैं

जननम की सलाह


अप्रत्याशित पोस्टपर्टम डिप्रेशन कुछ महीनों या उससे भी अधिक समय तक चल सकता है और यदि यह लम्बे समय तक चलता है तो कई अन्य गंभीर समस्याओं में परिवर्तित हो सकता है। पोस्टपर्टम डिप्रेशन मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव डालता है। साथ ही इसका प्रभाव शारीरिक स्वास्थ्य पर भी नजर आता है। डिप्रेशन के रोगी में मोटापा, दिल का दौरा और लम्बी बीमारी का खतरा बढ़ सकता है। अगर आप सचेत रहें और डिप्रेशन के लक्षणों को पहचानें और समय पर इसका डॉक्टर से इलाज कराएं तो इस समस्या से निजात पाई जा सकती है। एक सकारात्मक मानसिकता ऐसी समस्याओं से लड़ने में हमेशा सहायक होती है।

सारांश: गर्भावस्था सुखद आश्चर्य के साथ आती है, लेकिन यह कुछ चुनौतियां भी ला सकती है। पोस्टपर्टम डिप्रेशन एक ऐसी स्थिति है, जो आपको मानसिक और शारीरिक रूप से प्रभावित कर सकती है। यह एक नकारात्मक भावनात्मक स्थिति है जो गर्भावस्था के दौरान या तुरंत बाद तनाव और थकावट पैदा करती है।


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