क्या योग प्रसवोत्तर जल्द ठीक होने मे मदद करता है?

गर्भावस्था किसी महिला के जीवन में सबसे सुखद समयों में से एक है। इस दौरान वह कई प्रकार के शारीरिक और मानसिक उतार-चढ़ावों से गुजरती है।गर्भावस्था के इन अनुभवों के बाद जब वो शिशु को जन्म देती है तो यह सुकून भरा क्षण होता है। लेकिन, इसके बाद अपने स्वास्थ्य को वापस पाना एक बड़ी चुनौती होती है। प्रसव के बा स्वास्थ्य को बेहतर करने के लिए और शरीर को सही आकार में लाने के लिए योग बहुत फायदेमंद हो सकता है। योग के साथ सबसे अच्छी बात यह है कि इसे अपनी सुविधानुसार घर के भीतर भी किया जा सकता है।साथ ही इसके लिए बहुत अधिक समय देने की भी जरुरत नहीं पड़ती।


 प्रसवोत्तर आरोग्य प्राप्ति:

गर्भावस्था के दौरान एक महिला के शरीर में भारी बदलाव आते हैं। इन परिवर्तनों से शरीर के सभी हिस्सों में बहुत तनाव होता है; साथ ही बच्चे को जन्म देने की प्रक्रिया भी तकलीफदेह होती है। योग गर्भावस्था के कारण उत्पन्न हुए शारीरिक और मानसिक तनावों को शांत करने का एक शानदार तरीका है।


 वजन घटाने में सहायक:

क्या योग प्रसवोत्तर जल्द ठीक होने मे मदद करता है

गर्भावस्था के दौरान सभी महिलाओं का वजन बढ़ता हैं। प्रसव के बाद यह वजन कम करना आसान नहीं होता है। वजन घटाने के लि योग एक जांचा-परखा माध्यम है। थोड़े अनुशासन और समर्पण से किया गया योग हमेशा फायदेमंद साबित होता है। सही आहार लेते हुए योग करने से आपका वजन तेजी से घट सकता है।


 शरीर को मजबूत बनाने में सहायक:

गर्भावस्था के बाद ज्यादातर नई माताओं को कमज़ोरी का अनुभव होता है। इस कमज़ोरी के लक्षणों में सहनशक्ति की कमी, मांसपेशी या जोड़ों का दर्द और थकावट शामिल है। योग धीरे-धीरे मांसपेशियों और जोड़ों की शक्ति को वापस लाता है 


सही शारीरिक मुद्राप्राप्ति:

गर्भावस्था के अधिक वजन के कारण और प्रसव बाद भी शिशु की देखभाल के दौरान रीढ़ और कमर पर दबाव आता है, इससे आप सही शारीरिक मुद्राएं हासिल नहीं कर पाती। गलत शारीरिक मुद्रा कमर दर्द, पीट दर्द या गर्दन दर्द जैसी समस्याएँ पैदा कर सकती हैं। योग आपको सही शारीरिक मुद्राएं हासिल करने में मदद कर सकता है।


मनोवैज्ञानिक लाभ:

योग को मन और शरीर का जुड़ाव माना जाता है। शांत मन से किया गया योग आपको तनावों से दूर रखता है। इससे आपमें संयम भी बढ़ता है और आप अन्य शारीरिक या मानसिक चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना कर पाती हैंयोग के कई लाभ हैं, मगर प्रश्न यह है कि क्या प्रसव के बाद योग करना सुरक्षित है?


जननम से जानिए, क्या प्रसव के बाद योग किया जा सकता है?

किसी भी शारीरिक व्यायाम को करने से पहले यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि प्रसव के बाद का शरीर आपके पुराने शरीर से भिन्न है। यदि आप गर्भावस्था के पहले योग करती थी, या गर्भावस्था के दौरान भी आपने योग किया है, तो भी आप प्रसव के बाद बाद तुरंत योग शुरू नहीं कर सकती। इसके कई कारण हैं जिसमें कई स्वास्थ्य सम्बन्धी जटिलताएं शामिल हैं। यदि आपकी सीजेरियन डिलीवरी हुई है तो आपको अधिक सावधान रहने की जरुरत है।

आमतौर पर डॉक्टर योनि प्रसव के बाद कम से कम एक और सीज़ेरियन प्रसव के बाद डेढ़ से दौ महीने बाद ही किसी प्रकार के योगाभ्यास या व्यायाम की सलाह देते हैं। जब एक बार आपका डॉक्टर इसकी सहमति दे, फिर आप कम दबाव की योग मुद्राओं के साथ योगाभ्यास शुरू कर सकते हैं। दबाव पर ध्यान देते हुए धीरे-धीरे मुश्किल योग मुद्राओं की तरफ जाएं। यदि रखिए, अतिरिक्त दबाव न लें और यदि किसी भी प्रकार की असहजता हो तो योग को रोक दें। यदि तकलीफ जारी रहती है तो अपने डॉक्टर से जांच कराएं और उनकी सलाह अनुसार ही पुनः योगाभ्यास शुरू करें।याद रखिए, शरीर को सही आकार में लाना और फिर से अपने सर्वोत्तम स्वास्थ्य में आना एक प्रक्रिया है। इसमें आहार, आराम, देखभाल, सकारात्मकता और शारीरिक गतिविधियां शामिल हैं। इसमें समय लगता है। इसलिए सही समय आने पर अपनी क्षमतानुसार योगाभ्यास करें, तभी आप योग का सम्पूर्ण लाभ उठा पाएंगी। 


सारांश - गर्भावस्था जीवन की एक महत्वपूर्ण अवधि है, जबकि प्रसवोत्तर काल एक मुश्किल अवधि। प्रसव के बाद इस अवधि में स्वास्थ्य और फिटनेस हासिल करना बहुत महत्वपूर्ण है जिसे योगभ्यास की मदद से आसानी से किया जा सकता है। वजन घटाने, ताकत और मानसिक दृढ़ता समेत इसमें कई लाभ हैं। हालांकि, आपको योग शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। योग को केवल एक विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए।


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