बरसात के आने से जहाँ एक ओर जलती गर्मी से राहत मिलती है, वहीं दूसरी ओर संक्रमण का ख़तरा बढ़ जाता है। वै...

गर्भावस्था के नौ महीने बीतने का इंतज़ार परिवार का हर छोटा-बड़ा सदस्य करता है। जैसे-जैसे प्रसव की निर्ध...

बच्चों के सारे अंग बेहद कोमल होते हैं। उनकी सफाई करते समय बहुत अधिक सावधानी बरतने की ज़रूरत होती है।...

स्तनपान के बारे में कई मिथक प्रचलित हैं। कुछ बातों को सदियों से प्रचारित किया जा रहा है। कुछ बातों म...

बच्चे के जन्म के बाद महिलाओं का शरीर बेहद कमज़ोर हो जाता है। उस पर शिशु के पालन-पोषण से शरीर में बहुत...

नवप्रसूता को स्वस्थ और पौष्टिक आहार लेने की सलाह दी जाती है। कई घरों में महिलाओं को बहुत सारे घी वाल...

आंखें हमारे नन्हे-मुन्ने का सबसे नाज़ुक और आकर्षक अंग होती हैं। वे आंखें ही हैं, जो मां को अपने नवजा...

योग गर्भावस्था में किया जाने वाला एक अहम व्यायाम है, जो गर्भवती माँ और उसके बच्चे के शारीरिक व मन-मस...

हिंदू धर्म में जिन 16 संस्कारों का महत्व धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों ही तरीकों से है, उन्हीं में से च...

सौंठ यानी सूखे अदरक का पाउडर प्रसव के बाद महिलाओं के लिए संजीवनी बूटी से कम नहीं है। इसके लगातार इस्...

गर्भावस्था का समय एक महिला के लिए सबसे अनोखा होता है। उस वक़्त वो एक नयी जिंदगी को अपने अंदर पाल रही ...

बधाई हो! आपके घर में नन्ही खुशियों ने कदम रखा है! आपका उत्साह तो आसमान छू रहा होगा! हर माँ की तरह आप...

बरसात के आने से जहाँ एक ओर जलती गर्मी से राहत मिलती है, वहीं दूसरी ओर संक्रमण का ख़तरा बढ़ जाता है। वैसे तो बरसात के मौसम में सभी को स्वयं को सुरक्षित रखना आवश्यक है, लेकिन अगर आप नई-नई माँ बनी हैं और शिशु को स्तनपान करवाती हैं तब तो आपके और आपके शिशु के लिए सुरक्षा बेहद ज़रूरी है।

गर्भावस्था के नौ महीने बीतने का इंतज़ार परिवार का हर छोटा-बड़ा सदस्य करता है। जैसे-जैसे प्रसव की निर्धारित तिथि नज़दीक आती है, सभी खुशी और उत्साह में डूब कर आने वाले नन्हें मेहमान के स्वागत के लिए अपने को

बच्चों के सारे अंग बेहद कोमल होते हैं। उनकी सफाई करते समय बहुत अधिक सावधानी बरतने की ज़रूरत होती है। नवजात शिशु दिन में कई बार दूध पीते हैं यानी स्तनपान करते हैं, जिससे उनकी जीभ और मसूड़े पर दूध जम

स्तनपान के बारे में कई मिथक प्रचलित हैं। कुछ बातों को सदियों से प्रचारित किया जा रहा है। कुछ बातों में थोड़ी-बहुत सच्चाई है, मगर अधिकतर बातें आधारहीन हैं। कई बार सही जानकारी न होना, समस्याओं का

बच्चे के जन्म के बाद महिलाओं का शरीर बेहद कमज़ोर हो जाता है। उस पर शिशु के पालन-पोषण से शरीर में बहुत अधिक थकावट भी हो जाती है। ऐसे में ज़रूरी है कि प्रसव के बाद महिलाओं को ऐसा भोजन मिले, जिससे

नवप्रसूता को स्वस्थ और पौष्टिक आहार लेने की सलाह दी जाती है। कई घरों में महिलाओं को बहुत सारे घी वाले व्यंजन खिलाए जाते हैं, तो कई जगह प्रसव के बाद भिन्न-भिन्न प्रकार के लड्डू बनाकर दिए जाते हैं। हालांकि, एकल

आंखें हमारे नन्हे-मुन्ने का सबसे नाज़ुक और आकर्षक अंग होती हैं। वे आंखें ही हैं, जो मां को अपने नवजात की बातें समझाती हैं। इनकी देखभाल के लिये हर मां को ख़ास एहतियात बरतने की ज़रूरत पड़ती है।

योग गर्भावस्था में किया जाने वाला एक अहम व्यायाम है, जो गर्भवती माँ और उसके बच्चे के शारीरिक व मन-मस्तिष्क को स्वस्थ रखने में मदद करता है। चूंकि यह शरीर को खिंचाव और ताकत दोनों एक साथ देता है, इसको करने की सलाह

हिंदू धर्म में जिन 16 संस्कारों का महत्व धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों ही तरीकों से है, उन्हीं में से चौथा संस्कार है जातकर्म संस्कार। इस संस्कार को गर्भ के आठवें महीने में किया जाता है। शिशु के जन्म के वक्त भी यह संस्कार किया जाता है। इसके बारे

सौंठ यानी सूखे अदरक का पाउडर प्रसव के बाद महिलाओं के लिए संजीवनी बूटी से कम नहीं है। इसके लगातार इस्तेमाल से महिलाओं का प्रसव के बाद का समय बिना किसी शारीरिक परेशानी के व्यतीत होता है। सदियों से भारतीय घरों में प्रसव के

गर्भावस्था का समय एक महिला के लिए सबसे अनोखा होता है। उस वक़्त वो एक नयी जिंदगी को अपने अंदर पाल रही होती है। ऐसे में यदि कोई महिला नौकरीपेशा हैं तो गर्भावस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो जाते है, जिनके बारे में यदि उन्हें पता

बधाई हो! आपके घर में नन्ही खुशियों ने कदम रखा है! आपका उत्साह तो आसमान छू रहा होगा! हर माँ की तरह आप भी चाह रही होंगी कि आप अपने नवजात शिशु के साथ अच्छे से अच्छा समय बिता पाए। मगर डिलीवरी के ठीक बाद आप

जननम कम्युनिटी से जुड़ने के फायदे!

Join the #1 global parenting resource and start receiving the following helpful newsletter:

Join the community now!

Fill the following & enjoy perks!

Due Date or child's birthday